आलेख : रूढिवादी समाज में तड़फते वैवाहिक रिश्तों की हकीकत!

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हम सब जानते हैं कि विवाह के लिये एक विषम लिंगी की जरूरत होती है। लेकिन विवाह की सफलता के लिये यह पर्याप्त नहीं है। विवाह की सफलता के लिये, आपको ऐसा साथी तलाशना चाहिये, जो मानसिक और शारीरिक रूप से आपके अनुकूल हो। लेकिन क्या एक रूढिवादी समाज में यह सम्भव है? बिलकुल नहीं है। बल्कि असम्भव है। इसका अभिप्राय यह भी है कि, यदि आप अपने अनुकूल साथी तलाश नहीं कर सकते तो, जीवनभर इसकी वांछित कीमत चुकाते रहने को तैयार रहें।

We all know that there is a need for an opposite sex to marry. But this is not enough for the success of marriage. For the success of marriage, you should search a partner, who would Mentally and physically friendly with you. But is it possible in a conservative society? Not at all. Rather, it is impossible. It also means that, if you can not find a suitable partner, then be prepared to keep paying the desired price throughout your life.

इस विषय में वैवाहिक विवाद सलाहकार विशेषज्ञों का कहना है कि-क्या आप में सामाजिक रूढियों को तोड़ने का साहस है? ताकि आप अपने लिये उपयुक्त तथा अनुकूल वैवाहिक साथी तलाश कर सकें। जिसके बदले ताउम्र खुश रह सकें। या आप समाज की रूढियों के सामने नतमस्तक हो जायें। जिसके प्रतिफल में, आप जीवनभर खुद ही खुद की हत्या करते रहेंगे। सब कुछ आप पर निर्भर करता है, कि आखिर आप अपने लिये चाहते क्या हैं?

In this regard, marital dispute consultants say that, do you have the courage to break the Social customs? So that you can find suitable and friendly marriage partners for you. After which you can remain happy. Or you can bow to the principles of society. In the result of which, you will continue to kill yourself all the time in life. Everything depends on you, what do you want for yourself?

मैं इसमें इतना और जोड़ना चाहूंगा कि, रूढिवादी समाजों में, दोनों ही स्थितियों में धोखा होने का अंदेशा बना रहेगा। हां, धोखे की सम्भावना कम या अधिक हो सकती है। क्योंकि रूढ़िवादी समाजों में, विवाह जैसा अति महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले, भावी वैवाहिक साथियों में, एक दूसरे से खुलकर बात करने की परम्परा नहीं रही है।

I would like to add more in that, in conservative societies, there will be fear of cheating in both situations. Yes, the probability of deception can be less or more. Because in conservative societies, before taking a very important decision like marriage, there is no tradition to talk openly to each other in future marital partners.

इस कारण, वे एक-दूसरे के भूतकाल, आदतों, विचारों और यौन व्यवहारों के बारे में खुलकर बात करने का साहस नहीं जुटा पाते हैं। इसके अलावा, संयोग तथा नियती के निर्णयों का कभी नहीं टाला जा सकता। बहुत से लोगों को ऐसी सोच के परिणाम भी भोगने पड़ते हैं।

Because of this, they do not have the courage to speak openly about each other's past, habits, thoughts and sexual behaviors. Apart from this, coincidence and destiny decisions can never be avoided. Many people also have to suffer the consequences of such thinking.

केवल इतना ही नहीं, बल्कि टूटते परिवारों, बढते तलाकों और अनेक आत्महत्या प्रकरणों के पीछे भी, कहीं न कहीं-बेमेल विवाह, यौन असंतोष, विवाहेत्तर सम्बन्ध या विवाहपूर्व यौन सम्बन्धों में विवाहोपरान्त भी लिप्तता और पुरुषों द्वारा स्त्रियों के रूढिगत शर्मीले स्वभाव तथा उनके विलम्बित चर्मोत्कर्ष यौनांद स्वभाव को नहीं समझना की अक्षमता, साथ ही साथ स्त्रियों द्वारा पुरुषों के अवसादपूर्व यौनव्यवहारों को नहीं समझना भी मूल कारण होते हैं। साथ ही साथ पुरुषों की एक तरफा यौन आनंद प्राप्त करने की स्वार्थी प्रवृत्ति को चुपचाप सहने का स्त्रियों का स्वाभाव।

Not only this, but also even behind the broken families, increasing divorces, and many suicide cases, somewhere-Unmatched marriages, sexual dissatisfaction, extramarital relationships or Even after marriage also continuing premarital sex relations and men's ineligibility, to understand women's orthodox shy nature and their delayed orgasm nature (sexual satisfaction), Simultaneously, women's nature to quietly tolerate men's selfish tendency for one-sided sexual pleasure.

इस विषय को सरलता से समझने के लिये, हमें विभिन्न स्वास्थ्य वैब साइट्स पर यौन विशेषज्ञों से पूछे जाने वाले सवालों पर विचार करना चाहिये। जिनमें हमें युवा पीढी के यौन-विषयक सवालों, जिज्ञासाओं, और भ्रान्तियों को समझना चाहिये। साथ ही साथ विवाहित लोगों की, वैवाहिक समस्याएं, उनका यौन असन्तोष, यौनिक पीड़ा और यौन दुर्व्यवहार भी इस विषय को समझने में सहायक हो सकते हैं।

In order to understand this topic easily, we should consider the questions asked to the sexual experts on various health websites. In which we should understand the questions, curiosities, and myths of the young generation. As well as married people's marital problems, their sexual dissatisfaction, sexual harassment and sexual abuse can also help in understanding this subject.

सबसे पहली बात तो यह है कि रूढीवादी समाज में स्थापित धारणाओं तथा असुरक्षा की भावना के चलते स्त्री और पुरुष का संसार बिलकुल अलग-अलग होता है। किन्हीं अपवादों को छोड़ दिया जाये तो, ​वैवाहिक रिश्ते में बंधने से पहले और विवाह के बाद भी, यौन-विषयक मामलों में एक दूसरे के प्रति ईमानदारी होती ही नहीं। बल्कि यह कहना अधिक सही होगा कि उनके मध्य निष्कपटता हो ही नहीं सकती। इसका एक बड़ा कारण यह है, उनके मन में कुछ पाने की तुलना में सबकुछ खो देने का डर अधिक होता है।

First of all, because of the Established assumptions and insecurity set up in a conservative society, the world of man and woman is totally different. Except for any exceptions, even before marriage and after marriage, there is no sincerity in each other in sexual matters. Rather it would be more right to say that they can not be honest in their midst. One of the major reasons for this is that the fear of losing everything is more than getting something in their mind.

अत: रूढिवादी समाज में, विवाहित लोगों को यथास्थिति से समझौता करके, जैसे-तैसे वैवाहिक रिश्ते को निभाना अधिक सुरक्षित लगता है।

So in a conservative society, married people get more secure by compromising the status quo, as well as maintaining a marital relationship.




--डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'--
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