बिहार : माले ने नीतीश से पूछा - बिहार में आपातकाल है क्या?

  • कर्मचारी नेताओं की गिरफ्तारी के खिलाफ माले का प्रतिवाद.
  • दमन व धोखाधड़ी के जरिए आंदोलनों को दबाया नहीं जा सकता.

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पटना 19 दिसंबर 2017, बिहार के चर्चित कर्मचारी नेता, महासंघ गोप गुट के सम्मानित अध्यक्ष और भाकपा-माले बिहार राज्य कमिटी के सदस्य का. रामबली प्रसाद तथा महासंघ गोप गुट के वर्तमान महासचिव का. प्रेमचंद सिन्हा की गिरफ्तारी के खिलाफ आज पटना में भाकपा-माले ने प्रतिवाद मार्च निकाला और दोनों गिरफ्तार नेताओं की अविलंब रिहाई की मांग की. गेट पब्लिक लाइब्रेरी से माले वे ऐक्टू नेताओं के नेतृत्व में मार्च निकला और गर्दनीबाग धरना स्थल पर एक सभा आयोजित की गयी और तानाशाही थोपने वाली नीतीश सरकार का पुतला फूंका. इस सभा को भाकपा-माले राज्य कमिटी सदस्य व ऐक्टू के बिहार राज्य सचिव रणविजय कुमार, एएनएम (आर) की राज्य महासचिव सुनीता आदि ने संबोधित किया. जबकि संचालन माले राज्य कमिटी सदस्य नवीन कुमार ने किया. माले नेताओं ने दोनों नेताओं की अविलंब रिहाई के साथ-साथ आंदोलनकारी महिला स्वास्थ्यकर्मियों से सम्मानजनक वार्ता की भी मांग की. मौके पर माले के पटना नगर सचिव अभ्युदय, जितेन्द्र कुमार, अशोक कुमार, अनय मेहता और बड़ी संख्या में एनएनएम (आर) कर्मी उपस्थित थे.

माले नेताओं ने नीतीश कुमार से पूछा है कि क्या उनकी सरकार बिहार में आपातकाल लागू करना चाहती है? जिस तरीके से दोनों नेताओं की गिरफ्तारी हुई है, वह यही संकेत देता है. आंदोलनकारी नेताओं को वार्ता के बहाने बुलाकर जेल भेजने का काम किया गया है. यह भाजपा-जदयू सरकार की घोर अलोकतांत्रिक व तानाशाही रवैये का दिखलाता है. दमन व धोखाधड़ी के जरिए जनांदोलनों की आवाज को कुचला नहीं जा सकता. बिहार सरकार अब इसी रास्ते चल रही है. माले नेताओं ने कहा कि अपनी मांगों को लेकर एएनएम (आर) लंबे समय से आंदोलित हैं. जिसका नेतृत्व हमारे ये दो कर्मचारी नेता कर रहे हैं. एनएम (आर) की मांगों पर 18 दिसंबर को स्वास्थ्य मंत्री से वार्ता का लिखित पत्र प्राप्त हुआ था. जब उक्त दोनों नेताओं के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल वार्ता के लिए स्वास्थ्य विभाग पहुंचा, तो वार्ता की बजाए धोखे से दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया और दिन भर सचिवालय थाने में बैठाकर रखा गया. प्रेमचंद सिन्हा को कल ही और रामबलि प्रसाद को आज जेल भेज दिया गया. काॅ. रामबली प्रसाद को रात भर थाने में बैठकाकर रखा गया. माले नेता ने दोनों नेताओं की अविलंब रिहाई की मांग की है. और बिहार सरकार को चेतावनी दी है कि धोखे के जरिए आंदोलन के दमन से बाज आए. 
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