आध्यात्म : शनि देव को मित्र मान कर आराधना करें,सारे दुःख स्वतः कट जायेंगे - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 15 दिसंबर 2017

आध्यात्म : शनि देव को मित्र मान कर आराधना करें,सारे दुःख स्वतः कट जायेंगे

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आध्यात्मिक संवाददाता,आर्यावर्त डेस्क, 15  दिसंबर,2017, अक्सर हम देखते हैं कि शनि देव का नाम सुनते ही लोग डर जाते हैं लेकिन यदि शनि जी की सात्विक तरीके से समर्पित भाव से आराधना की जाये तो वो मनुष्य के कष्टों को हर लेते हैं और जीवन को सुगम बनाने का आशीर्वाद देते हैं.हम "लाइव आर्यावर्त" के अपने  सुधी पाठकों के लिए आध्यात्म विषय के अंतर्गत जाने माने वास्तु विशेषज्ञ  एवं वैदिक ज्योतिष तमोजीत चक्रवर्ती से प्राप्त जानकारी को यहाँ प्रकाशित कर रहे हैं.  आध्यात्मिक विशेषज्ञों का कहना है कि  मनुष्यों को विनम्र रहना चाहिए  क्योंकि आप इस पृथ्वी और तारों से बने हैं | इतना तो हम सभी जानते हैं कि तारे एवं अलग अलग ग्रह आकाश में विचरण करते हैं जिनका मनुष्य के जीवन में खासा प्रभाव रहता है | शनि देव हमारे सौर्य मंडल के नौवे ग्रह हैं, उनका वृश्चिक राशि से धनु राशि में गोचर प्रारम्भ हो चुका है - 26 जनवरी 2017 से 24 जनवरी 2020 तक. शनि जी की गति एक बार पुनः वक्र होगी 19 अप्रैल 2018 से 6 सितम्बर 2018 तक. उसके बाद शनि जी अपनी सीधी दिशा में पुनः धनु राशि में 1 मई 2019 तक रहेंगे. 1 मई 2019 से शनि जी की गति वक्र होगी और वह अपनी राशि अर्थात मकर राशि में प्रवेश करेंगे 25 जनवरी 2020 के दिन | ज्योतिष तमोजीत कहते हैं कि इन तीन महत्वपूर्ण वर्षों में शनि जी तीन नक्षत्रों से अपनी यात्रा करेंगे. 

मूल नक्षत्र जिनके स्वामी केतु हैं ( 26 जनवरी 2017 से 2 मार्च 2018) पूर्व आषाढ़ जिनके स्वामी शुक्र हैं ( 2 मार्च 2018 से 27 दिसम्बर 2019) उत्तर आषाढ़ जिनके स्वामी सूर्य हैं ( 27 दिसम्बर 2019 से 24 जनवरी 2020).. मूल एक गण्डान्त नक्षत्र है जिनके स्वामी केतु और अलक्ष्मी देवी हैं .शनि जी कर्मों के ग्रह हैं अर्थात वो कर्मों के फल देने वाले देव हैं चाहे जनम कुंडली कैसी भी हो | इस मूल समय में अलक्ष्मी जी का एक महत्वपूर्ण योगदान होता है कर्मो के फल देने में शनि जी के निर्देशानुसार यह समय अलक्ष्मी जी के कारण बहुत ही कठिनाईयों भरा हो सकता है और काफी उतार चढ़ाव आ सकते हैं . शनि जी के एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करने के समय में उनके नियमों का पालन और उनको संतुष्ट करना काफी लाभकारी सिद्ध होगा .शनि देव की आराधना के साथ निम्न अनुशासन का पालन करें,लाभ होगा. 

1. मदिरापान, धूम्रपान, गुटखा, इत्यादि का सेवन ना करें.
2. अधिक "ऐशो आराम" से बचें. 
3. नारियों को सम्मान करें. 
4. शनिवार के दिन एक समय उपवास रखने से लाभ होगा.
5. शनिवार के दिन मांसाहार न करें.
6. शनिवार के दिन संध्याकाल में किसी मंदिर में मोमबत्ती,धूप अगरबत्ती जलाएं.
7.यदि संभव हो तो शनिवर के दिन हनुमान चालीस का पाठ करें.
8. एक नीले रंग का रुमाल अपने साथ हमेशा रखें.

तमोजीत चक्रवर्ती बताते हैं कि शनिवार के दिन उपवास रखना लाभदायक होगा. इस दिन शाम को सूर्यास्त तक बिना नमक के फल, दूध, चाय और कॉफ़ी और उसके पश्चात रात्रि में रोटी और शुद्ध घी में बनी हुई आलू की सब्ज़ी सेवन कर सकते हैं. एक रोटी और आलू की सब्ज़ी गौ माता को खिलाने के लिए पहले ही अलग करके रख लें तत्पश्चात आप ग्रहण करें. हिन्दू धर्म में दान का भी महत्व है.आप अपनी सामर्थ्य के अनुसार चाहें तो  काली उरद की दाल,काला तिल,काला कपड़ा,नारियल,सुपाड़ी ,कोयला,सरसों तेल,या तली हुई खाद्य पदार्थ किसी ब्राह्मण या गरीब व्यक्ति को दान में दे सकते हैं. आप सात्विक तरीके से पूरी आस्था के साथ इन उपायों को करें ,अवश्य ही आपके घर में खुशहाली आएगी.

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