भारत के साथ समुद्री सहयोग पर सुपरिभाषित व्यवस्था बनाने के पक्ष में आसियान

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नयी दिल्ली 25 जनवरी, आसियान देशों के नेताओं ने क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि के लिए भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए अपने समुद्री सहयोग को व्यापक स्वरूप देने के लिए एक स्थायी एवं सुपरिभाषित व्यवस्था बनाने तथा भारत आसियान क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग साझेदारी (आरसेप) करार को शीघ्र ही अंतिम रूप देकर हस्ताक्षर करने का इरादा जाहिर किया। भारत आसियान मैत्री रजत जयंती शिखर सम्मेलन में आये छह आसियान नेताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की द्विपक्षीय बातचीत और राष्ट्रपति भवन में रिट्रीट के दौरान समान रूप से यह भावना परिलक्षित हुई। इन नेताओं ने आतंकवाद के वैश्विक खतरे को लेकर चिंताएं साझा कीं और आसियान की क्षेत्रीय राजनीतिक सुरक्षा तथा आर्थिक सामाजिक सांस्कृतिक सहयोग सुनिश्चित करने को लेकर बातचीत की।  श्री मोदी ने शिखर सम्मेलन में आने के लिये सभी नेताओं के प्रति व्यक्तिगत रूप से आभार व्यक्त किया। उन्होंने आसियान की अध्यक्षता कर रहे सिंगापुर के प्रधानमंत्री और हाल ही में अध्यक्षता छोड़ने वाले फिलीपीन्स के राष्ट्रपति को भारत आसियान संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए विशेष रूप से धन्यवाद ज्ञापित किया। इन नेताओं में म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू ची, विएतनाम के प्रधानमंत्री नगुएन शुआन फुक, फिलीपीन्स के राष्ट्रपति रॉड्रिगो हुतेर्ते, कंबोडिया के प्रधानमंत्री सामदेच टेको हुन सेन, सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सीन लूंग, थाईलैंड के प्रधानमंत्री प्रयुत चान ओचा, ब्रुनेई के सुल्तान हसनल बोलाकिया, मलेशिया के प्रधानमंत्री नजीब रजाक, लाओस के प्रधानमंत्री थॉन्ग लून सिसौलिथ तथा इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो शामिल हैं। विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) प्रीति सरन ने यहां संवाददाताओं से कहा कि साझा मूल्य समान भविष्य विषय पर आधारित भारत एवं आसियान के संबंधों की रजत जयंती के मौके पर जो बात एक समान दिखायी दी, वह यह है कि आसियान के नेताओं द्वारा क्षेत्रीय भारत के सकारात्मक भूमिका मान्यता दी गयी और हिन्द-प्रशांत क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि में उसकी भूमिका को अधिक व्यापक बनाने की ज़रूरत है। रिट्रीट में रक्षा क्षेत्र और समुद्री सहयोग को बढ़ाने पर मुख्य फोकस था। आसियान नेताओं ने समुद्री सहयोग को व्यापक बनाने के लिए एक सुपरिभाषित व्यवस्था कायम करने पर बल दिया जिसमें हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों के दोहन एवं उपभोग की नियम आधारित व्यवस्था तथा सुरक्षा का ढांचा शामिल हो ताकि क्षेत्र में पारंपरिक एवं गैरपारंपरिक चुनौतियों का मुकाबला किया जा सके जिनका हम आमतौर पर सामना करना पड़ रहा है। गौरतलब है कि इस दौरान दक्षिण चीन सागर का नाम नहीं लिया गया। आसियान नेताओं का मानना है कि भारत आसियान आरसेप समझौते पर जल्द हस्ताक्षर किये जाने चाहिए। ऐसा होने से करीब 1.8 अरब आबादी वाला भारत-आसियान क्षेत्र 28 खरब डॉलर के सकल घरेलू उत्पाद के साथ विश्व का सबसे बड़ा आर्थिक ब्लॉक बन जाएगा। श्री मोदी ने भी भारत की एक्ट ईस्ट नीति को रेखांकित करते हुए दोनों पक्षों के लिये लाभकारी एवं संतुलित आरसेप समझौते के मसौदे को जल्द ही अंतिम रूप दिए जाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

सुश्री सरन ने कहा कि प्रधानमंत्री ने आसियान के नेताओं के समक्ष भारत की नारीशक्ति का भी उल्लेख किया। इस समय भारतीय नौसेना का छह सदस्यीय महिला दस्ता दक्षिणी गोलार्द्ध की परिक्रमा के लिये निकला हुआ है। उन्होंने बताया कि आसियान नेताओं ने दावोस में श्री मोदी के भाषण की विशेष रूप से प्रशंसा की और भारत की प्रगति की गाथा की सराहना करते हुए उनसे इस बारे में और जानकारी मांगी खासकर कैशलेस व्यवस्था की दिशा में उठाए गए कदम, करप्रणाली में सुधार, लालफीताशाही में कमी लाना तथा भ्रष्टाचार से मुकाबले के लिये ‘आधार’ के आधार पर उठाए गए कदमों की जानकारी। सुश्री सरन ने कहा कि फिलीपीन्स ने भारत ने आधार से भ्रष्टाचार रोकने को लेकर उठाए गए कदमों पर विशेष रुचि दिखायी है। द्विपक्षीय बैठकों के बारे में उन्होंने बताया कि सुश्री आंग सान सू ची के साथ बातचीत में सितवे बंदरगाह पर जल्द से जल्द परिचालन शुरू करने, त्रिपक्षीय राजमार्ग का काम जल्द पूरा करने और कालादान मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट परियोजना में प्रगति को लेकर बातचीत हुई। श्री मोदी ने म्यांमार के रोहिंग्या समस्या के कारण चर्चित रखाइन प्रांत में पुनर्निर्माण में सहयोग के मुद्दे पर भी बात की।  उन्हाेंने कहा कि विएतनाम के साथ व्यापक सामरिक साझेदारी के तहत समुद्री टोही पोतों के निर्माण में सहयोग काे लेकर बात हुई जबकि फिलीपीन्स के राष्ट्रपति ने आतंकवाद और नशीले पदार्थों की तस्करी के संकट से निपटने में क्षमता निर्माण में सहयोग पर चर्चा की। उन्होंने भारत से हवाई सेवाओं को लेकर भी दिलचस्पी दिखायी। उन्होंने परमाणु सहित व्यापक विनाश के हथियारों के प्रसार के खतरे को लेकर भी बात की। इसी प्रकार से रक्षा सहयोग खासकर समुद्री पोतों के निर्माण में सहयोग पर बात की। आैषधि क्षेत्र और ढांचागत क्षेत्र में विकास में भारतीय कंपनियों की भागीदारी को फिलीपीन्स ने सराहा। जीएमआर को फिलीपीन्स में दो हवाई अड्डे बनाने का ठेका मिला है। सुश्री सरन ने कहा कि थाईलैंड के प्रधानमंत्री ने अपने देश की ‘एक्ट वेस्ट’नीति और श्री मोदी ने भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति में साम्यता एवं समन्वय पर चर्चा की है।
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