झारखंड का तृतीय अनुपूरक बजट बिना बहस के ही पारित

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रांची 20 जनवरी, झारखंड विधानसभा के बजट सत्र की कार्यवाही आज चौथे दिन भी हंगामे के कारण बाधित रही। विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव को पहली पाली में हंगामे के कारण सभा की कार्यवाही को दो बार स्थगित करना पड़ा जबकि भोजनावकाश के बाद दूसरी पाली में भी हंगामे के कारण सभा की कार्यवाही एक बार स्थगित करनी पड़ी और तृतीय अनुपूरक बजट को बिना बहस के ही पारित कर दिया गया। विधानसभा की कार्यवाही शुरु होने पर झारखंड विकास मोर्चा के प्रदीप यादव समेत झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के कई सदस्यों ने मुख्य सचिव राजबाला वर्मा, पुलिस महानिदेशक डी.के.पांडेय और अपर पुलिस महानिदेशक अनुराग गुप्ता के विरुद्ध पद के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने तथा उनके कार्यकाल के दौरान लिये गये फैसलों की केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की। सत्ता पक्ष के कई सदस्य विपक्षी दलों पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि हर दिन एक ही मुद्दे को लेकर सदन की कार्यवाही बाधित करने का तरीका सही नहीं है। विधानसभा श्री उरांव ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के अमित कुमार की ओर से लाए गए कार्य स्थगन प्रस्ताव को अमान्य कर दिया। विधायक श्री कुमार ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) द्वारा आयोजित छठी संयुक्त असैनिक परीक्षा के प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण नियमों का पालन नहीं किये जाने के मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर कार्यस्थगन प्रस्ताव लाया था । इस बीच नौजवान संघर्ष मोर्चा के भानु प्रताप शाही ने नगर निकाय चुनाव दलीय आधार पर कराए जाने के निर्णय की चर्चा करते हुए कहा कि कई छोटे राजनीतिक दल निकाय चुनाव दलीय आधार पर कराये जाने के कारण चुनाव लड़ने से वंचित रह जाएंगे। श्री शाही ने बताया कि इसके कारण झारखंड पार्टी , भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी (भाकपा माले), जय भारत समानता पार्टी और नौजवान संघर्ष मोर्चा जैसे छोटे राजनीतिक दल नगर निकाय चुनाव में अपने उम्मीदवार नहीं खड़ा कर सकेंगे । उन्होंने कहा कि यदि ये छोटे दल चुनाव में उम्मीदवार नहीं खड़ा कर सकेंगे तो ऐसी पार्टियां कहां जाएंगी ।

नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने कहा कि सदन में तीन दिनों से जो मुद्दा उठ रहा है वह विषय किसी विपक्षी सदस्य का व्यक्तिगत मसला नहीं बल्कि राज्य हित से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि चाहे भानु प्रताप शाही द्वारा उठाया गया मसला हो या बोकारो के ललपनिया में तृतीय और चतुर्थ वर्ग की नौकरियों में स्थानीय लोगों की बहाली का मुद्दा हो, सदन के अंदर ही मुख्यमंत्री ने इस मसले पर आश्वासन दिया था। लेकिन बाद में वे खुद नियुक्ति पत्र बांट कर आ गए । श्री सोरेन ने कहा कि जेपीएससी परीक्षा में आरक्षण नियमों का अनुपालन नहीं होने पर विरोध कर रहे अभ्यर्थियों को लाठी डंडे से पीटा जाता है । यदि विपक्ष इन मुद्दों को सदन में नहीं उठाएगा तो विपक्ष का सदन में बैठने का क्या औचित्य है। उन्होंने कहा कि ऐसे पदाधिकारी जिनपर एक भी व्यक्ति की मौत के लिए जिम्मेदार होने का आरोप है यदि उनपर कार्रवाई नहीं होती है तो फिर जनता के सवाल को सदन में नहीं तो कहां उठाया जाएगा । नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि यह बात सामने आ गयी है कि लिखित रुप से जांच को धीमी करने का आदेश दिया गया था और विपक्ष द्वारा सवाल उठाए जाने पर भी कोई कार्रवाई नहीं होना दुखद है। उन्होंने कहा कि पूरे राज्य के लोगों को यह लग रहा है कि यह सदन नहीं है बल्कि यहां प्रपंच रचा जा रहा है। झारखंड विकास मोर्चा के प्रदीप यादव ने कहा कि एक और नौजवानों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है, वहीं दूसरी ओर मुख्य सचिव द्वारा पद का दुरुपयोग कर एक बैंक के अधिकारी पर अपने बेटे के व्यापार में निवेश का दबाव डाला जा रहा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि भानु प्रताप शाही ने जो मुद्दा उठाया है उसपर नगर विकास मंत्री जवाब देंगे। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन और झाविमो के प्रदीप यादव द्वारा मुख्य सचिव पर बैंक अधिकारी पर दबाव डालने का जो आरोप लगाया गया है उस मामले की जांच स्पेशल बेंच द्वारा करायी जाएगी। मुख्यमंत्री के वक्तव्य से भी विधायक संतुष्ट नहीं हुए और ठोस कार्रवाई की मांग को लेकर शोरगुल करने लगे । हंगामे के कारण विधानसभा अध्यक्ष ने सभा की कार्यवाही दोपहर 12:45 तक के लिए स्थगित कर दी ।
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