मीडिया ने दिया म्हादेई, गोमांस विवादों को तूल : पर्रिकर

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पणजी, 10 जनवरी, गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने बुधवार को मीडिया पर म्हादेई जल विवाद और गोमांस विवाद को अनावश्यक तूल देने का आरोप लगाया। पर्रिकर ने कर्नाटक में उनकी पार्टी के नेता बी. एस. येदियुरप्पा को लिखे पत्र में 'मानवतावादी आधार' पर म्हादेई जल विवाद का हल ढूंढने का सुझाव दिया था। इस पत्र का गोवा और कर्नाटक, दोनों जगहों पर विरोध हुआ। मीडिया पर इस मसले को तूल देने का आरोप लगाते हुए पर्रिकर ने कहा, "म्हादेई मुद्दा न तो मेरा है और न ही गोवा का..म्हादेई मुद्दा आपके (मीडिया) द्वारा सृजित है।" म्हादेई नदी पर बन रहे काल्सा-भांदुरा बांध परियोजना को लेकर गोवा, कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच पैदा हुआ यह विवाद इस समय केंद्रीय अभिकरण के पास लंबित है। कर्नाटक म्हादेई बेसिन के पानी का रुख पास के ही मालप्रभा नदी की ओर मोड़ना चाहता है। म्हादेई नदी को मांडवी नदी भी कहा जाता है और इसे उत्तर गोवा की जीवन रेखा माना जाता है। मांडवी नदी कर्नाटक से निकलती है और गोवा के पणजी में अरब सागर में मिलती है। इस नदी का विस्तार कर्नाटक में 28.8 किलोमीटर और कर्नाटक में 50 किलोमीटर है। मुख्यमंत्री ने मीडिया पर गोवा में गोमांस की कमी का मुद्दा उछालने का भी आरोप लगाया। गोवा में गोरक्षा दलों व पुलिस अधिकारियों पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए गोमांस कारोबारी चार दिनों तक हड़ताल पर रहे। सरकार की ओर से कर्नाटक से गोमांस मंगाने में सुरक्षा मुहैया करवाने का आश्वासन मिलने के बाद हड़ताल मंगलवार को वापस ली गई। पर्रिकर ने कहा, "मसला क्या था? आपको तथाकथित पशुओं का हित चाहने वालों से पूछना चाहिए। मैंने पुलिस से कानून के अनुसार काम करने को कहा है। कानूनी प्रावधानों के मुताबिक अगर कागजात हैं और सही बिल है तो आप किसी को (मास) मंगाने से नहीं रोक सकते हैं।" मुख्यमंत्री ने मीडिया से कहा, "मैं इस मामले को उस तरह से नहीं देखता हूं जैसे आप देखते हैं। आपके देखने का नजरिया गलत है, विचारधारा प्रेरित है। मेरा मुद्दा कानून और व्यवस्था है।"
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