भारत-पाक प्रस्तावित वार्ता में भारत कश्मीर जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर वार्ता नहीं करने जा रहा, बल्कि सिर्फ सही माहौल तैयार करने का प्रयास कर रहा है ताकि बाद में होने वाली वार्ता के लिए विश्वास में आई कमी को दूर किया जा सके।
सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों ने कहा कि हम कश्मीर जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर वार्ता नहीं करने जा रहे। फिलहाल हमारा प्रयास सही माहौल बनाने का है। तभी दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली के उपाय किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि विश्वास में आई कमी को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है और हम पाकिस्तान से उन चार मुद्दों पर वार्ता नहीं कर रहे हैं जो हमारे महत्व की हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ वार्ता का कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि युद्ध कोई विकल्प नहीं होता।
सरकार ने अपना रुख एक पत्रकार वार्ता के दौरान स्पष्ट किया है, जिसमें पूछा गया था कि क्या सरकार पाकिस्तान के साथ वहीं से वार्ता शुरू करेगी जहां से मुशर्रफ के समय में खत्म हुई थी या नए सिरे से फिर वार्ता होगी। हाल में पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी ने दावा किया था कि कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारत और पाकिस्तान समझौता करने के काफी करीब पहुंच गए थे। समझौते में दोनों ओर के कश्मीर और सियाचिन ग्लेशियर से सेना हटाने और इन इलाकों को कुछ स्वायत्ता जैसी बातें शामिल थीं।
पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने चार विचार सुझाए थे, जिस पर पाकिस्तान ने दावा किया था कि दोनों देश समझौते के नजदीक पहुंच गए थे। इनमें दोनों तरफ के कश्मीर एवं सियाचिन ग्लेशियर से सेना हटाने और इन इलाकों में कुछ स्वायत्ता जैसी बातें शामिल थीं।
हाल में भूटान में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने दोनों देशों के बीच वार्ता को बहाल करने पर सहमति जताई थी। विदेश मंत्री एसएम कृष्णा अगले महीने पाकिस्तान की यात्रा करेंगे।
सूत्रों ने कहा कि शर्म अल शेख विवाद के बाद से कई चीजों में बदलाव आया है। भारत सरकार पाकिस्तान के रुख में बदलाव देख रही है और शर्म अल शेख के बाद से इसके लहजे में भी बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली का प्रयास जारी है, ताकि दोनों अनौपचारिक तौर पर वार्ता कर सकें और आगे बढ़ सकें। अनौपचारिक सूत्रों से उपलब्ध कराई गई जानकारी वार्ता के लिए काफी उपयोगी सिद्ध हुई।
उन्होंने इन बातों से इनकार किया कि गृह मंत्री पी चिदंबरम पाकिस्तान से वार्ता के पक्ष में नहीं हैं। यह एक संयुक्त उत्तरदायित्व है और उनका मानना है कि गृह मंत्री का ऐसा विचार नहीं है। उन्होंने कहा कि चिदंबरम खुद इस महीने के अंत तक पाकिस्तान जा रहे हैं और दक्षेस के गृह मंत्रियों की बैठक से सरकार को काफी उम्मीदें हैं।
सूत्रों ने कहा कि कृष्णा के दौरे से गतिरोध खत्म करने में सहयोग मिलेगा, क्योंकि लंबे समय से किसी भारतीय विदेश मंत्री ने पाकिस्तान का दौरा नहीं किया है। विश्व के अन्य देशों को यह संदेश भी भेजना है कि दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार आ रहा है।
सूत्रों ने कहा कि हाल में कृष्णा की अमेरिका यात्रा से भारत को उच्च तकनीक के निर्यात की जरूरत पर वाशिंगटन प्रभावित हुआ। ओबामा प्रशासन इस बात से प्रभावित हुआ कि दो दोस्ताना देशों के बीच उच्च तकनीक का ज्यादा आयात-निर्यात होना चाहिए।
अफगानिस्तान में भारत की भूमिका से विश्व के देशों में सकारात्मक संदेश गया है खासकर आधारभूत संरचना के निर्माण, शिक्षा और महिलाओं के विकास को लेकर। उन्होंने कहा कि बाधाओं से परे अफगानिस्तान में हम अपना काम जारी रखेंगे। सूत्रों ने कहा कि चीन, नेपाल एवं बांग्लादेश जैसे अन्य पड़ोसी देशों के साथ मतभेदों को सुलझाने का प्रयास जारी है।
सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों ने कहा कि हम कश्मीर जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर वार्ता नहीं करने जा रहे। फिलहाल हमारा प्रयास सही माहौल बनाने का है। तभी दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली के उपाय किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि विश्वास में आई कमी को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है और हम पाकिस्तान से उन चार मुद्दों पर वार्ता नहीं कर रहे हैं जो हमारे महत्व की हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ वार्ता का कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि युद्ध कोई विकल्प नहीं होता।
सरकार ने अपना रुख एक पत्रकार वार्ता के दौरान स्पष्ट किया है, जिसमें पूछा गया था कि क्या सरकार पाकिस्तान के साथ वहीं से वार्ता शुरू करेगी जहां से मुशर्रफ के समय में खत्म हुई थी या नए सिरे से फिर वार्ता होगी। हाल में पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी ने दावा किया था कि कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारत और पाकिस्तान समझौता करने के काफी करीब पहुंच गए थे। समझौते में दोनों ओर के कश्मीर और सियाचिन ग्लेशियर से सेना हटाने और इन इलाकों को कुछ स्वायत्ता जैसी बातें शामिल थीं।
पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने चार विचार सुझाए थे, जिस पर पाकिस्तान ने दावा किया था कि दोनों देश समझौते के नजदीक पहुंच गए थे। इनमें दोनों तरफ के कश्मीर एवं सियाचिन ग्लेशियर से सेना हटाने और इन इलाकों में कुछ स्वायत्ता जैसी बातें शामिल थीं।
हाल में भूटान में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने दोनों देशों के बीच वार्ता को बहाल करने पर सहमति जताई थी। विदेश मंत्री एसएम कृष्णा अगले महीने पाकिस्तान की यात्रा करेंगे।
सूत्रों ने कहा कि शर्म अल शेख विवाद के बाद से कई चीजों में बदलाव आया है। भारत सरकार पाकिस्तान के रुख में बदलाव देख रही है और शर्म अल शेख के बाद से इसके लहजे में भी बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली का प्रयास जारी है, ताकि दोनों अनौपचारिक तौर पर वार्ता कर सकें और आगे बढ़ सकें। अनौपचारिक सूत्रों से उपलब्ध कराई गई जानकारी वार्ता के लिए काफी उपयोगी सिद्ध हुई।
उन्होंने इन बातों से इनकार किया कि गृह मंत्री पी चिदंबरम पाकिस्तान से वार्ता के पक्ष में नहीं हैं। यह एक संयुक्त उत्तरदायित्व है और उनका मानना है कि गृह मंत्री का ऐसा विचार नहीं है। उन्होंने कहा कि चिदंबरम खुद इस महीने के अंत तक पाकिस्तान जा रहे हैं और दक्षेस के गृह मंत्रियों की बैठक से सरकार को काफी उम्मीदें हैं।
सूत्रों ने कहा कि कृष्णा के दौरे से गतिरोध खत्म करने में सहयोग मिलेगा, क्योंकि लंबे समय से किसी भारतीय विदेश मंत्री ने पाकिस्तान का दौरा नहीं किया है। विश्व के अन्य देशों को यह संदेश भी भेजना है कि दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार आ रहा है।
सूत्रों ने कहा कि हाल में कृष्णा की अमेरिका यात्रा से भारत को उच्च तकनीक के निर्यात की जरूरत पर वाशिंगटन प्रभावित हुआ। ओबामा प्रशासन इस बात से प्रभावित हुआ कि दो दोस्ताना देशों के बीच उच्च तकनीक का ज्यादा आयात-निर्यात होना चाहिए।
अफगानिस्तान में भारत की भूमिका से विश्व के देशों में सकारात्मक संदेश गया है खासकर आधारभूत संरचना के निर्माण, शिक्षा और महिलाओं के विकास को लेकर। उन्होंने कहा कि बाधाओं से परे अफगानिस्तान में हम अपना काम जारी रखेंगे। सूत्रों ने कहा कि चीन, नेपाल एवं बांग्लादेश जैसे अन्य पड़ोसी देशों के साथ मतभेदों को सुलझाने का प्रयास जारी है।

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