बौध गुरु करमापा नज़रबंद. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 29 जनवरी 2011

बौध गुरु करमापा नज़रबंद.

चीन का जासूस होने का आरोप झेल रहे तिब्बती बौद्ध धर्म गुरु करमापा उग्येन दोरजे के पास कोई कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए कोई राजनयिक विशेषाधिकार है और भारतीय कानूनों के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

हिमाचल प्रदेश में करमापा के मठ और दिल्ली के मजनू का टीला से 23 देशों की मुद्राओं में करीब 7 करोड़ रुपये की रकम बरामद की गई है। इस बरामदगी के बाद शक जताया जा रहा है कि करमापा के तार चीन से जुड़े हो सकते हैं। उधर, करमापा के कार्यालय की ओर से साफ किया गया है कि करमापा कानूनी कार्रवाई में सहयोग करने के लिए तैयार हैं। केंद्र सरकार के एक अधिकारी ने कहा, 'भारत तिब्बत की सरकार को मान्यता नहीं देता है तिब्बत की किसी निष्कासित सरकार को भारत मान्यता नहीं देता है। भारत धर्मशाला में तिब्बतियों की सरकार को दलाई लामा का एक ब्यूरो भर मानता है। भारत के लिए तिब्बती शरणार्थी हैं, उनके पास कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए कोई अधिकार नहीं हैं। अधिकारी ने कहा कि कानून अपना काम करेगा।'  हालांकि कोर्ट के एक आदेश के मुताबिक 1985 से पहले जन्मे तिब्बती शरणार्थी भारतीय नागरिकता ले सकते हैं।
 भारत सरकार ने साफ किया है कि करमापा दलाई लामा के संभावित उत्तराधिकारियों में से एक हैं, लेकिन अभी उन्हें चुना जाना बाकी है। वहीं, एक अन्य अधिकारी का कहना है कि भारत तिब्बती धर्मगुरुओं को धार्मिक नेता ही मानता है, इसलिए उनके साथ वही बर्ताव किया जाएगा तो भारतीय धर्मगुरुओं के साथ किया जाता है। केंद्र सरकार ने करमापा उग्येन दोरजे के हिमाचल प्रदेश स्थित अस्थायी आवास से करोड़ों रुपए की विदेशी मुद्रा बरामद होने पर गंभीर चिंता जताई है। सरकार को संदेह है कि संभवत: करमापा चीन के लिए एजेंट के रूप में काम कर रहा था। केंद्र सरकार इस मामले की जांच करेगी। इस संबंध में करमापा से पूछताछ भी हो सकती है और उन पर मुकदमा भी चलाया जा सकता है।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि दोरजे के चीन से संबंध स्पष्ट हैं। 17वें करमापा को हमेशा से ही चीन का आदमी माना जाता रहा है। चीन हिमालय सीमा लद्दाख से तवांग पर स्थित सभी बौद्ध मठों पर अपने नियंत्रण का प्रयास करता रहा है और करमापा उसकी मदद करता आया है। सूत्रों के मुताबिक करमापा पहले चीन में रहता था और फिर भारत आया था। उस पर काफी पहले से ही संदेह रहा है। करमापा की गतिविधियों को लेकर भी संशय रहा है क्योंकि यह देखा गया कि वह धार्मिक भावनाओं की आड़ लेकर चीन का एंजेडा चला रहा था। सूत्रों के मुताबिक खुफिया एजेंसियों ने करमापा पर काफी समय से नजर रखी हुई थी।
 करमापा उग्येन त्रिनले दोरजे को उनके सिद्धबाड़ी स्थित अस्थायी निवास पर अघोषित नजरबंद कर दिया गया है। ग्यूतो तांत्रिक विवि सिद्धबाड़ी स्थित करमापा के कार्यालय व आवास के बाहर सशस्त्र पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस करमापा सहित उनके अन्य प्रमुख सहयोगियों से किसी भी समय पूछताछ कर सकती है। उधर, शुक्रवार को दलाईलामा कर्नाटक के लिए रवाना हो गए। करमापा को भारत ने सामान्य तिब्बती की तरह शरण दे रखी है। ऐसे में सशस्त्र पहरे के कदम को अलग नजर से देखा जा रहा है।

करमापा अकाउंटेंट कार्यालय से पुलिस को भारत और 25 अन्य देशों की मुद्रा बरामद हो चुकी है, जिनकी कीमत करीब छह करोड़ है। इनमें चीनी मुद्रा के 11 लाख युआन भी शामिल हैं। इसके अलावा 6 लाख यूएस डॉलर, 30 लाख भारतीय मुद्रा सहित ताइवान, नेपाल, कनाडा, डेनमार्क, सिंगापुर, हांगकांग व जर्मनी की मुद्राएं शामिल हैं। करमापा के अस्थायी निवास से बरामद भारतीय और विदेशी मुद्रा की गिनती अभी जारी है। मैहतपुर में गाड़ी में एक करोड़ ले जाते वक्त गिरफ्तार युवकों की सूचना पर पुलिस ने ग्यूतो तांत्रिक विश्वविद्यालय में बुधवार रात ढाई बजे छापा मारा था।

अकाउंटेंट कार्यालय से बरामद भारतीय और विदेशी मुद्रा को गिनने के लिए नोट गिनने वाली मशीन लगानी पड़ी है। करीब दो दर्जन पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी भी इसमें जुटे हैं। शुक्रवार सुबह 4 बजे नोटों की गिनती बंद कर गिनी गई राशि पुलिस के माल खाने में जमा करवाई गई। शुक्रवार सुबह दस बजे दोबारा गिनती शुरू की गई। जांच में आईबी, रॉ, सीआईडी सहित जिला कांगड़ा और ऊना पुलिस जुटी हैं। शुक्रवार दोपहर बाद अकाउंटेंट कार्यालय में नोटों की बरामदगी का काम पूरा करने के बाद जांच एजेंसियों ने करमापा के निजी सचिव गोम्पो छेरिंग के कार्यालय का ताला तोड़कर कमरे में रखे नोटों के बैगों को कब्जे में लेकर गिनती शुरू कर दी है।

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