
लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करने के लिए बनाई गई जॉइंट कमिटी की पहली बैठक में सिविल सोसायटी के कुछ प्रस्ताव हटा दिए गए। इसके अलावा सरकार ने सिविल सोसायटी की ओर से तैयार जन लोकपाल बिन के प्रारूप को भी मसौदे का आधार मानने से इनकार कर दिया।
जन लोकपाल बिल में जज और मंत्री को सस्पेंड करने का प्रस्ताव था, लेकिन सरकारी सूत्रों के मुताबिक इन दोनों प्रस्तावों को संयुक्त मसौदे से हटा दिया गया है। ड्राफ्टिंग कमिटी की बैठक की विडियोग्राफी पर भी सहमति नहीं बन सकी और ऑडियो रिकॉर्डिंग का फैसला लिया गया है।
मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि जॉइंट कमिटी की अगली मीटिंग 2 मई को होगी। बैठक को ऐतिहासिक कदम करार देते हुए उन्होंने कहा, ' जन लोकपाल बिल को मॉनसून सेशन में पेश करना हमारा लक्ष्य है। ' सिब्बल के मुताबिक, ' सरकार और सिविल सोसायटी के बीच होने वाली बैठकों में जो कुछ भी होगा उसे संयु्क्त रूप से जनता के सामने रखा जाएगा। '
सिविल सोसायाटी के सदस्य प्रशांत भूषण ने कहा, ' फिलहाल व f डियो रिकॉर्डिंग पर सहमति नहीं बन सकी है। लेकिन बैठक में सभी ने यह माना कि ठोस, कारगर और स्वतंत्र लोकपाल बिल आज के समय की जरूरत है। ' उन्होंने कहा, '2 मई को होने वाली बैठक में जन लोकपाल बिल के मूलभूत सिद्धांतों पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा हर हफ्ते कम से कम एक बैठक जरूरी होगी। '
इस जॉइंट ड्राफ्ट कमिटी में 5 केंद्रीय मंत्री और 5 सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी कमिटी के अध्यक्ष हैं, जबकि वरिष्ठ वकील शांति भूषण इसके सह अध्यक्ष है। मुखर्जी के साथ ही इस कमिटी में गृह मंत्री पी. चिदंबरम, विधि मंत्री वीरप्पा मोइली (संयोजक), मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल और जल संसाधन मंत्री सलमान खुर्शीद भी शामिल हैं।
सिविल सोसायटी की ओर से अन्ना हजारे, कर्नाटक के लोकायुक्त संतोष हेगड़े, पूर्व विधि मंत्री शांति भूषण, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और आरटीआई कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल को शामिल किया गया है। जॉइंट कमिटी को 30 जून तक लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करना है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें