शशि हत्याकांड में स्थानीय अदालत ने आज तीनों अभियुक्तों आनंद सेन, विजय सिंह और सीमा आजाद को दोषी करार कर उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस मामले में यूपी के पूर्व खाद्य प्रसंस्करण मंत्री आनंद सेन, उसके ड्राइवर विजय सेन और सहयोगी सीमा आजाद को कोर्ट ने आज ही दोषी करार दिया। इन अभियुक्तों पर 10-10 हजार का जुर्माना भी लगाया गया है। आनंद सिंह पर धारा 364 और 202 के तहत केस दर्ज है। कोर्ट में एससी और एसटी एक्ट के तहत बहस पूरी हो चुकी थी।
22 अक्टूबर 2007 को लॉ की छात्रा शशि लापता हुई थी। 23 तारीख को अयोध्या कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज हुई। 27 अक्टूबर को तत्कालीन खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री आनंद सेन के निजी ड्राइवर विजय सेन से पूछताछ की गई। 30 अक्टूबर को विजय सेन और आनंद सेन की करीबी महिला सीमा आजाद पर शशि के अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया। पूछताछ में विजय सेन ने पहली बार कबूला कि शशि मर चुकी है। इसी दिन आनंद सेन का मुख्यमंत्री ने इस्तीफा ले लिया। फिर सुल्तानपुर के चकारी गांव से मल्लाह बब्बू पासी के घर से शशि की घड़ी बरामद की गई। पुलिस ने अपहरण के मुक़दमे को हत्या में तब्दील किया। फिर बैंगलोर में विजय सेन का नार्को टेस्ट हुआ जिसमें उसने सारी कहानी कह डाली।
फरार सीमा आजाद 8 जून 2008 को कानपुर में गिरफ्तार की गई और 14 जून को आनंद सेन ने लखनऊ के गाजीपुर थाने में सरेंडर किया और जेल भेज दिए गए। पिछले करीब चार साल से इंसाफ की आस में दौड़ते रहे शशि के परिवार को आनंद सेन और उसके सांसद पिता मित्र सेन यादव की तरफ से सुलह करने और जान से मारने की धमकियां मिलती रही पर उन्हें सिर्फ इंसाफ चाहिए था।

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