राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा ने कहा है कि वेश्यावृति पर कानून समाज के लिए घातक सिद्ध होगा. वैश्यावृति को कानूनी तौर पर मान्यता देने के सवाल पर राष्ट्रीय महिला आयोग की नवनियुक्त अध्यक्ष ममता शर्मा ने कहा है कि हमारा समाज अभी इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं है और ऐसा खुलापन समाज के लिए घातक सिद्ध होगा.
ममता ने कहा कि केन्द्र, राज्य सरकारों और फिर उच्चतम न्यायालय का जो फैसला होगा वह सभी को मान्य होगा लेकिन हमारा समाज अभी इसके लिए तैयार नहीं है, पर्दे के पीछे कुछ भी चल रहा हो लेकिन यह खुलापन घातक सिद्ध होगा. उच्चतम न्यायालय ने हाल में वेश्यावृत्ति को कानूनी बनाने और यौनकर्मियों के पुनर्वास को लेकर केन्द्र और राज्य सरकारों से उनकी राय मांगी है. उत्तर प्रदेश में बलात्कार के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए ममता ने कहा कि कड़ा कानून बनाकर बलात्कारियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए ताकि यह घिनौना कृत्य करने वालों के हौसले पस्त हो सकें.
गिरिजा व्यास के बाद हाल ही में राष्ट्रीय महिला आयोग के अध्यक्ष का पद संभालने वाली ममता ने कहा,बलात्कार के मामलों से सख्ती से निपटना जरूरी है और इनमें जब तक कड़ी सजा नहीं मिलेगी, काम नहीं चलेगा. ये मामले गैरजमानती होते हैं लेकिन आरोपियों को फिर भी जमानत मिल जाती है. ये (बलात्कारी) जब तक जेल में बंद नहीं होंगे तब तक इन्हें अक्ल नहीं आएगी. ऐसे में पुलिस की भूमिका अहम हो जाती है. ममता ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बलात्कार की घटनाएं सबसे ज्यादा होती हैं और सामूहिक बलात्कार में तो महिला एकदम असहाय हो जाती है. ऐसा कानून बनना चाहिए जिससे ऐसे पुरूषों के हौसले पस्त हों.
ममता ने कहा कि उन पुरूषों को भी अपनी गंदी मानसिकता बदलनी होगी जो बलात्कार और छेड़छाड़ की घटनाओं के लिए उल्टा लड़कियों को ही दोषी ठहराते हैं. आजाद देश की लड़कियों को अपने मुताबिक कपड़े पहनने और घूमने फिरने की स्वतंत्रता है. भोपल और फिर राजधानी दिल्ली में हाल में आयोजित स्लट वाकॅ (बेशर्मी मोर्चा) के बारे में अध्यक्ष ने कहा कि ये महिलायें जो मुद्दा उठा रही हैं वह ठीक है लेकिन उनका तरीका सही नहीं है. उन्होंने कहा,स्लट वाक का नाम गलत है, लेकिन उनका इरादा सही है. बेशर्मी मोर्चा वाली महिलाएं कहती हैं कि हमें काम करने की आजादी होनी चाहिए. यह सही बात है लेकिन इन्हें गांव में जाकर अशिक्षित महिलाओं को शिक्षित करने में भी आजादी का प्रयोग करना चाहिए.
महिला आयोग की अध्यक्ष बनने के बाद अपनी प्राथमिकताओं के बारे में ममता ने कहा कि हम कुछ ऐसा करना चाहते हैं कि महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा राहत पहुंचे. हमारी प्राथमिकता होगी कि जो मामले लंबित हैं उनका राज्यों और अपराध के हिसाब से लेखा जोखा तैयार किया जाए और उन्हें सुलझाने की प्रक्रिया शुरू हो. उन्होंने कहा, यह बड़े दुख की बात है कि आजादी के 66 साल बाद भी हमारे देश में लिंगभेद खत्म नहीं हो पाया है. हम इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाने का प्रयास करना चाहते हैं.

2 टिप्पणियां:
MERE KHYAL SE YE KANOON AYA TO SAMAJ MAI HONE WALI KUKRITI KAM HONE MAI SAHAYTA MILEGI.
बैश्य्याब्रती कोई नया व्य्ब्साय नही है. राजा महाराजो के समय खुलापन था आज भी खुलापन है. अंतर इतना है. क़ि लोग शर्म खाते है काम अपना करते ह़ी है. -संतोष गंगेले पत्रकार
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