पश्चिम बंगाल के नाट्यकर्मियों ने नाटककार व अभिनेता गिरीश कर्नाड की नोबेल पुरस्कार विजेता रबींद्रनाथ टैगोर पर की गई टिप्पणी पर हैरानी व नाराजगी व्यक्त की है। कर्नाड ने टैगोर को औसत दर्जे का नाटककार बताया है। रंगकर्मी बिभास चक्रवर्ती ने कहा, "इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। हमें उनकी टिप्पणियों को नजरअंदाज करना चाहिए। पिछले 150 साल से टैगोर के काम की भारत में पहचान और स्वीकृति है।"
वहीं थियेटर व फिल्म अभिनेता कौशिक सेन ने कहा है कि इन टिप्पणियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, "इससे निश्चित रूप से फर्क पड़ता है क्योंकि कर्नाड एक स्थापित नाटककार हैं। मेरे विचार से वह असुरक्षा महसूस कर रहे हैं।" उन्होंने कहा, "इसके अलावा नाटक मंचन के लिए होते हैं। नाटक का पाठ करना और उसका मंचन करना दो अलग चीजें हैं। जब तक आपने उनका मंचन न किया हो तब तक आप उनके बारे में निर्णय नहीं दे सकते।"
कन्नड़ फिल्मों के 74 वर्षीय नाटककार, अभिनेता व फिल्म निर्देशक कर्नाड ने शुक्रवार को कहा था कि टैगोर एक महान कवि थे लेकिन वह एक औसत दर्जे के नाटककार थे। कर्नाड ने कहा, "तत्कालीन बांग्ला समाज ने उनके नाटकों को स्वीकार नहीं किया। न ही उनके समकालीन नाटककारों ने उन्हें महान नाटककार माना।"
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