भारत आने के लिए 125 करोड़ खर्चे वालमार्ट ने - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

सोमवार, 10 दिसंबर 2012

भारत आने के लिए 125 करोड़ खर्चे वालमार्ट ने


भारत में अपने स्टोर खोलने को बेकरार ग्लोबल रीटेल कंपनी वॉलमार्ट अमेरिकी सांसदों के बीच अपनी पैरवी (लॉबीइंग) पर 2008 से अब तक 25 मिलियन डॉलर (करीब 125 करोड़ रुपये) खर्च कर चुकी है। इसमें भारत में आने की मंजूरी देने के लिए लॉबीइंग पर खर्च भी शामिल है। वॉलमार्ट की ओर से अमेरिकी सेनेट में दाखिल डिस्क्लोजर रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है। उधर, सीनियर बीजेपी लीडर मुरली मनोहर जोशी ने कहा है कि अगले चुनावों में एनडीए की सरकार आने पर एफडीआई का फैसला रद्द कर दिया जाएगा। वॉलमार्ट ने अमेरिकी सीनेट को सौंपे अपने लॉबीइंग संबंधी दस्तावेज में बताया कि 2012 में 30 सितंबर तक कंपनी ने भारत में एफडीआई सहित विभिन्न मसलों पर विचार-विमर्श के लिए 18 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इनमें से 10 करोड़ रुपये (16.5 लाख डॉलर) सिर्फ जुलाई-सितंबर तिमाही में ही खर्च किए गए हैं। इसी तिमाही में (14 सितंबर को) भारत सरकार ने मल्टि-ब्रैंड रिटेल में 51% एफडीआई को मंजूरी दी थी।

वॉलमार्ट ने अमेरिकी सीनेट, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव, यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (यूएसटीआर) और अमेरिकी विदेश विभाग में अपना पक्ष रखने के लिए लॉबीइंग की। अमेरिका में कंपनियों को विभिन्न विभागों और एजेंसियों में अपना पक्ष रखने के लिए लॉबीइंग करने की इजाजत है। हालांकि, उन्हें हर तिमाही में अमेरिकी सीनेट को अपनी लॉबीइंग गतिविधियों की जानकारी देनी होती है। वॉलमार्ट का कहना है कि वर्ष 2009 की कुछ तिमाहियों को छोड़कर वह वर्ष 2008 के बाद से भारत आने को लेकर लगातार लॉबीइंग कर रही है। दुनियाभर में वॉलमार्ट का सालाना कारोबार 444 अरब डॉलर का है और इसके कर्मचारियों की संख्या 22 लाख है। भारत आने का रास्ता साफ होने के साथ ही कंपनी ने यहां के बाजार में उतरने की तैयारी शुरू कर दी है। भारत का रीटेल बाजार करीब 500 अरब डॉलर का है। वर्ष 2020 तक इसके 1000 अरब डॉलर से ज्यादा होने का अनुमान है।

कोई टिप्पणी नहीं: