इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के स्तर पर पत्रावली पर स्वयं हस्ताक्षर नहीं करने सम्बंधित जनहित याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को होगी। न्यायाधीश इम्तियाज मुर्तजा और न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है जिस पर निर्णय होना आवश्यक है। अतिरिक्त महाधिवक्ता बुलबुल गोदियाल ने प्रारम्भिक आपत्ति प्रस्तुत की कि यह जनहित याचिका नहीं है, जिस पर अदालत ने कहा कि सरकार को जो बात कहनी हो, वह लिखित रूप में प्रस्तुत की जाए।
याचिका के अनुसार उप्र में मुख्यमंत्री पत्रावली पर स्वयं हस्ताक्षर नहीं करते और उनकी जगह मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी उनके नाम पर पत्रावली अनुमोदित करते हैं। यह विधि के सिद्धांतों के विपरीत है क्योंकि यह उत्तरदायित्व की भावना का विलोप करता है और इससे कई प्रकार के विवाद और दुरुपयोग की संभावना रहती है। इसलिए नूतन ने मुख्यमंत्री को अपने अधिकारियों की जगह पत्रावली पर स्वयं हस्ताक्षर करने के लिए आदेशित करने की प्रार्थना की है।
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