दो ब्राहमणों को भारत रत्न, दलितों.पिछडों के बारे में सोचा तक नहीं: - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 3 जनवरी 2015

दो ब्राहमणों को भारत रत्न, दलितों.पिछडों के बारे में सोचा तक नहीं:

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बहुजन समाज पार्टी .बसपा. अध्यक्ष मायावती ने पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी और महामना पं. मदन मोहन मालवीय का नाम लिए बगैर इनको ..भारत रत्न.. दिये जाने पर सवाल खडा करते हुए आज कहा कि किसी पिछडे या दलित को इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान से क्यों नहीं सम्मानित किया गया। सुश्री मायावती ने यहां पत्रकारों से कहा कि भारतीय जनता पार्टी .भाजपा. सरकार पिछडों और दलितों की लगातार उपेक्षा कर रही है। हाल ही में भारत रत्न से दो ब्राहमणों को सम्मानित कर दिया गया जबकि दबे.कुचले लोगों को जीवनभर उठाने में लगे रहे बसपा संस्थापक कांशीराम और समाज सुधारक ज्योति बा फुले जैसे लोगों के बारे में सोंचा तक नहीं गया। उन्होंने कहा कि इससे सिद्ध होता है कि केन्द्र सरकार दलितों और पिछडों के बारे में विरोधी मानसिकता रखती है।

सुश्री मायावती ने कहा कि मनमोहन सरकार ने कांशीराम को भारत रत्न दिये जाने की उनकी मांग ठुकरा दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि नरेन्द्र मोदी सरकार भी इस मामले में पूर्व सरकार के रास्ते पर चल रही है। उन्होंने कहा कि दलितों के मामले में भाजपा और कांग्रेस का रुख एक ही रहता है. इसलिए संयुक्त प्रगतिशील गठबन्धन की तरह ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन सरकार भी दलितों की उपेक्षा कर रही है। उन्होंने कहा कि कांशीराम के मरने पर संयुक्त प्रगतिशील गठबन्धन सरकार ने शोक भी नहीं प्रकट किया था जबकि वह बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर के बाद दलितों के र्सवमान्य नेता थे।

 मोदी सरकार ने गत 24 दिसम्बर को श्री वाजपेयी और श्री मालवीय को भारत रत्न से सम्मानित करने की घोषणा की थी। इस बीच भाजपा ने सुश्री मायावती के आरोपों को बेबुनियाद बताया। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि सुश्री मायावती स्वयं जातिवादी राजनीति करती हैं और इसीलिए वह हर चीज को जातीय चश्मे से देखती हैं। श्री पाठक ने कहा कि बसपा ने लगातार दस वषोर्ं तक मनमोहन सरकार को समर्थन दिया। कांशीराम को भारत रत्न से सम्मानित करने के लिए उस सरकार पर क्यों नही दबाव बनाया। उन्होंने कहा कि यह सही है कि श्री कांशीराम ने समाज के लिए बेहतरीन काम किये हैं लेकिन उन्हें केवल जाति के आधार पर भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग उनके लिए ही न्यायोचित नहीं होगी।

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