कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाला मामले में आज झारखंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों आर एस रूंगटा और आर सी रूंगटा को एक विशेष अदालत द्वारा जमानत दे दी गई. दोनों निदेशक उनके खिलाफ जारी समन के तहत अदालत के समक्ष पेश हुए थे. विशेष तौर पर कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाला मामले को देख रहे सीबीआई न्यायाधीश भरत पराशर ने दोनों ही आरोपियों को एक-एक लाख रूपए के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक मुचलके के आधार पर जमानत दे दी.
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘दोनों आरोपियों को जमानत दिया जाना न्याय के हित में होगा.’’ इसी दौरान, सीबीआई ने अदालत को बताया कि इस मामले में आरोपियों के रूप में बुलाए गए दो लोगों- रामाबतार केडिया और नरेश महतो की कथित तौर पर मौत हो गई है और वह इन लोगों की मौत से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है. रूंगटा, केडिया और महतो के अलावा अदालत ने झारखंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड को भी आरोपी के रूप में तलब किया था. लगाए गए आरोप भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक षडयंत्र), 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान जमानत की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के लिए जालसाजी), 471 (नकली दस्तावेज का इस्तेमाल) और 477-ए (झूठे खाते खुलवाना) के तहत दंडनीय हैं.
इन सभी को झारखंड में उत्तरी धाडू कोयला ब्लॉक का आवंटन झारखंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड को किए जाने के मामले में आरोपियों के तौर पर समन भेजा गया था. यह समन अदालत द्वारा पिछले साल 18 दिसंबर को आरोप पत्र का संज्ञान लिए जाने के बाद भेजा गया था. सुनवाई के दौरान रूंगटा और कंपनियों का पक्ष रखने के लिए आए वरिष्ठ वकील रमेश गुप्ता ने अपने मुवकिलों के लिए यह कहते हुए जमानत मांगी कि वे जांच में मौजूद रहे हैं और उन्होंने हर तरह सीबीआई के साथ सहयोग किया है.
इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनके मुवकिलों के खिलाफ समन जारी होने पर वे (मुवकिल) अदालत में पेश हुए हैं. वरिष्ठ सरकारी वकील ए के सिंह ने इनकी जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए दावा किया कि हालांकि जांच के लिए इनकी जरूरत नहीं है लेकिन मुकदमे के दौरान इनकी मौजूदगी होनी चाहिए. सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों निदेशकों (रूंगटा) को जमानत दे दी और मामले की सुनवाई को दो फरवरी तक स्थगित कर दिया.
अपने आरोपपत्र में सीबीआई ने आरोप लगाया था कि जांच के दौरान यह पाया गया था कि जेआईपीएल ने अपने दावे को मजबूत करने के लिए स्टील मंत्रालय और कोयला मंत्रालय के समक्ष कई पहलुओं को ‘गलत तरीके से पेश’ किया और इस तरह कोयला मंत्रालय के अधिकारियों एवं जांच समिति को प्रेरित किया कि वे कोयला ब्लॉक का आवंटन उसे करें.
सीबीआई ने आरोप लगाया कि 27वीं और 30वीं जांच समिति ने जेआईपीएल को तीन अन्य कंपनियों-इलेक्ट्रो स्टील कास्टिंग लिमिटेड, आधुनिक अलॉएज एंड पावर लिमिटेड और पंवनजय स्टील एंड पावर लिमिटेड के साथ संयुक्त रूप से उत्तरी धाडु स्थित कोयला ब्लॉक आवंटित किया गया. हालांकि सीबीआई ने 12 अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर नहीं करते हुए कहा कि इन अपराधों को अंजाम देने के लिए इनकी संलिप्तता के कोई साक्ष्य नहीं मिलते. अपने आरोप पत्र में सीबीआई ने आरोप लगाया कि आवेदक कंपनियों द्वारा किए जा रहे दावों की पुष्टि के लिए न तो जांच समिति की ओर से कोई प्रयास किए गए और स्टील मंत्रालय ने आवेदक कंपनियों के आकलन के लिए किसी तरीके का विकास भी नहीं किया.
उसने कहा कि इस मामले से जुड़े कोयला मंत्रालय के कुछ रिकॉर्ड गायब बताए जाते हैं और सीबीआई ने एक अलग एवं प्रारंभिक जांच दर्ज कर ली है. सीबीआई ने कहा कि उसकी जांच के दौरान पूरी प्रक्रिया में किसी भी सरकारी सेवक की संलिप्तता नहीं मिली है.
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