नयी दिल्ली / चेन्नई 13 नवंबर, सरकार द्वारा अधिसूचित एक रैंक एक पेंशन (ओआरओपी) के विरोध में पूर्व सैनिकों का अपने पदक लौटाने का सिलसिला आज भी जारी रहने के बीच रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने इसे राष्ट्र का अपमान करार दिया है। पूर्व सैनिक पिछले तीन दिन से देश भर में अलग अलग जगहों पर पदक लौटा रहे हैं और आज उन्होंने इंडिया गेट पर जाकर अपने पदक लौटाये। कुछ जगहों पर पूर्व सैनिकों ने अपने पदक जलाने का प्रयास भी किया है। इस बीच, श्री पर्रिकर ने आज चेन्नई में नौसेना के एक कार्यक्रम में कहा कि लोकतंत्र में सभी को विरोध का अधिकार है लेकिन पदकों को लौटाना तथा उन्हें जलाना राष्ट्र का अपमान है। ये पदक उन्हें राष्ट्र के प्रति बलिदान के लिए दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि ओआरओपी का वादा सरकार ने नहीं किया था। यह चुनावी वादा था, जो भारतीय जनता पार्टी ने किया था और इसे पूरा किया गया है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि ओआरओपी की अधिसूचना पूर्व सैनिकों के विभिन्न संगठनों के साथ विचार- विमर्श के बाद की गई है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में गठित की गई कोशियारी समिति की रिपोर्ट के अनुच्छेद 6.4 में कहा गया है कि पेंशन की पांच वर्ष में समीक्षा स्वीकार्य प्रस्ताव है। पूर्व सैनिकों की शिकायत सुनने के लिए एक आयोग का गठन किया गया है और यदि किसी की कोई शिकायत है तो वह आयोग में अपनी बात कह सकता है।
सरकार ने पिछले सप्ताह ही ओआरओपी से संबंधित अधिसूचना जारी की थी लेकिन पूर्व सैनिकों ने इसे आधा अधूरा बताते हुए इसे मानने से इन्कार कर दिया था। पूर्व सैनिकों और सरकार के बीच मुख्य रूप से पेंशन की समीक्षा की अवधि को लेकर मतभेद है। सरकार ने हर पांच वर्ष में पेंशन की समीक्षा की घोषणा की है जबकि पूर्व सैनिक हर वर्ष पेंशन समीक्षा की मांग कर रहे हैं।

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