मधुबनी : पुष्पम प्रिया चौधरी ने किया तीन दिवसीय मधुबनी दौरा - Live Aaryaavart

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शनिवार, 22 अगस्त 2020

मधुबनी : पुष्पम प्रिया चौधरी ने किया तीन दिवसीय मधुबनी दौरा

अधूरी औधोगिक प्रांगण बिहार सरकार की अकर्मण्यता और उदासीनता का बर्बर प्रतीक
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मधुबनी (आर्यावर्त संवाददाता) प्लुरल्स पार्टी की प्रेसिडेंट और मुख्यमंत्री उम्मीदवार पुष्पम प्रिया चौधरी अपने तीन दिवसीय मधुबनी यात्रा के दूसरे दिन 14.94 एकड़ में फैले झंझारपुर औद्योगिक प्रांगण देखने पहुंची थी. उन्होंने बंद पड़ी उधोगों को खोलने और उससे होने वाली रोजगार सृजन करके पलायन रोकने की बात कही. जब 1983 में झंझारपुर पेपर मिल लगया जा रहा था तब पांचवे वर्ग में पढ़ने वाले दिनेश कुमार गुप्ता के आंखों में सपने थे कि अब रोजगार मिलेगा पर यह पेपर मिल कभी शुरू ही नहीं हो पाया. दिनेश कुमार गुप्ता के आंखों देखे सपने तो पूरे नहीं हो पाए पर अगली पीढ़ी के अमित जो पांचवी में पढ़ते हैं के सपनों को पूरा करने और रोजगार के वायदा पुष्पम प्रिया चौधरी ने किया.  झंझारपुर औधोगिक प्रांगण की परिकल्पना सिर्फ हवाई वायदों और कागजों पर सिमट के रह गया. अधूरी संरचना और गंदगी के ढेर के रूप में तब्दील यह प्रांगण अनऔधोगिक का प्रतीक बन गया है. सरकारी अकर्मण्यता और लालफीताशाही के काले कारनामों का नमूना देखना है तो यंहा आकर देखा जा सकता है कि किस तरह सैकड़ो बोरा सीमेंट बर्बाद हो जाने दिया गया. मिल की मशीनें चोरी हो गई. यह अधूरी औधोगिक प्रांगण बिहार सरकार की अकर्मण्यता और उदासीनता का बर्बर प्रतीक है.


किसान  बिचौलियों के चंगुल में फंसने को विवश
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प्लुरल्स पार्टी की प्रेसिडेंट पुष्पम प्रिया चौधरी अपने तीन दिवसीय मधुबनी भ्रमण के दूसरे दिन झंझारपुर मखाना प्रोसेसिंग यूनिट पहुंची. 2008 में शुरू हुई इस प्रोसेसिंग यूनिट  को बर्बाद करने पर बिफरी पुष्पम प्रिया चौधरी ने उपस्थित लोगों से कहा कि "जिन नेताओं ने आपकी यह हालत की है उनसे आप सवाल क्यों नहीं पूछते है? उनसे सवाल पूछने की हिम्मत नहीं होती है आपकी? दूसरी नेताओं की जिम्मेदारी मुझपर क्यों थोपते हैं लोग?" इस प्रोसेसिंग यूनिट के बंद होने से 2000 मखाना उत्पादक किसानों को प्रोसेसिंग के लिए सीमांचल जाना पड़ता है. प्रोसेसिंग यूनिट नजदीक न होने के कारण किसानों को बिचौलियों के चंगुल में फंसने को विवश होना पड़ता है. इस प्रोसेसिंग यूनिट को जानबूझकर इसी कारण बर्बाद होने दिया गया ताकि बिचौलियों को लाभ मिले. झंझारपुर NCDC के वित्तीय सहायता से ICDP मधुबनी द्वारा निर्मित इस परिसर में व्यापार मंडल का कार्यालय भी है, जिसके गार्ड द्वारा इसमें गाय पाला जा रहा है. यह सरकारी अकर्मण्यता का चरम बिंदु है. प्लुरल्स पार्टी की मुख्यमंत्री उम्मीदवार पुष्पम प्रिया चौधरी ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि "मिथिला के बड़े उद्योगों को तो आप बचा नहीं पाये, न आपकी सरकार ने नया यूनिट शुरू किया. इसके साथ -साथ जो  छोटे प्लांट थे उनकी उपेक्षा करके बर्बाद करने की गति को तीव्र कर दिया और झंझारपुर का 2008 में बना और जंग खाता मखाना प्रोसेसिंग प्लांट इसका एक बानगी मात्र है. यह बताता है कि आपकी सरकार इंडस्ट्री को कितना सीरियसली लेते हैं! 2000 किसानों का सहारा बनने वाले प्लांट व व्यापार मंडल के भवन में मखाना की जगह गाय, भैंस और भूसा का मिलना औधोगिक सेंस पर गोबर करने जैसा है". पुष्पम प्रिया चौधरी ने कहा कि "हम बिहार बनाने निकले हैं.मिथिला के साथ बिहार की इंडस्ट्रियल कहानी फिर से लिखने का समय आ गया है".

अस्पताल नहीं तो वोट नहीं
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प्लुरल्स पार्टी की प्रेसिडेंट पुष्पम प्रिया चौधरी अपने तीन दिवसीय मधुबनी दौरे के दूसरे दिन सिसवार की 'युवा शक्ति' के अनुरोध पर सिसवार का राजकीय औषधालय जो अब खंडहर बन गया है के निरीक्षण के लिए आईं थी. ग्रामीणों ने "अस्पताल नहीं तो वोट नहीं" अभियान शुरू किया है जिसके बारे में पुष्पम प्रिया चौधरी ने कहा कि "आपके वोट बहिष्कार के बाद भी कोई न कोई जीत ही जाएगा इसलिए इस बार उनलोगों को हराने के लिए वोट करें, जिन्होंने आपको सिर्फ वायदे किए हैं". उपस्थित लोगों ने बताया कि नेता सिर्फ वोट मांगने आते हैं जिस पर प्लुरल्स पार्टी की मुख्यमंत्री उम्मीदवार ने कहा कि आप वोट दे या न दें पर यह स्वास्थ्य सुविधाओं की बहाली पहली प्राथमिकता होगी. मधुबनी जिले के फुलपरास प्रखंड स्थित सिसवार का यह अस्पताल 1962 स्थापित हुआ था अपने स्थापना काल में तमाम सुविधाओं से सुसज्जित और पंचकोसी के गांवों के लोगों की स्वास्थ्य समस्याओं का उचित निवारण दिया करता था जो आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा  रहा  है. यह राजकीय अस्पताल अपने शुरुआती में इतनी सक्षम था कि पड़ोसी राष्ट्र नेपाल के दर्जनों गांवों से भी लोग यहाँ इलाज करवाने आते थे. लेकिन 1998 में बिहार सरकार के कैबिनेट ने इसे अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा दिया जिसके परिणामस्वरूप तेजी से हो रही इसकी दुर्दशा को और बदतर करने का सूत्रपात कर दिया. अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिसवार की खोई महत्ता को वापस लौटाने व आसपास के 7 पंचायतों, 32 गाँवों व लगभग 60 हजार की आबादी हेतु फिर से प्रभावी बनाने हेतु प्लुरल्स प्रेसिडेंट पुष्पम प्रिया चौधरी सिसवार आईं थी. ग्रामीण आदित्य ने पुष्पम प्रिया चौधरी को बताया कि उनके पिताजी की मौत इसलिए हुई क्योंकि दुर्घटना के बाद निकट में कोई अस्पताल न होने की वजह से हो गई क्योंकि अस्पताल की सुविधा 80-90 की दूरी पर है मिलती है. प्लुरल्स प्रेसिडेंट ने आदित्य को वादा किया कि "जब प्लुरल्स की सरकार बनेगी तब किसी की जान अस्पताल के आभाव में नहीं होने दूंगी". अस्पताल परिसर के पास 1.50 बीघा जमीन है परंतु अब सिर्फ खंडहर अपने अतीत की याद दिलाता है. वह यह भी याद दिलाता है कि किस तरह सरकारों ने अपनी प्राथमिकताओं से जनता और उनके मुद्दों को दूर कर दिया है.


काम नहीं होने के कारण पलायन को मजबूर
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"मैडम, यंहा हर घर से कोई न कोई पंजाब के खेतों में और दिल्ली कमाने गया है. यंहा काम नहीं होने के कारण पलायन को मजबूर है, यंहा कुछ कीजिए" प्लुरल्स प्रेसिडेंट पुष्पम प्रिया चौधरी से यह बात बौड़हा ग्राम के नितेश ने की जब तीन दिवसीय मधुबनी दौरे के दूसरे दिन खुटौना प्रखंड के माधोपुर पंचायत बौड़हा में थी.  यंहा लक्ष्मी संस्कृत प्राथमिक सह मध्य विद्यालय का निरीक्षण किया और आधारभूत संरचनाओं के घोर अभाव को देखकर बिफरी प्लुरल्स प्रेसिडेंट ने कहा कि सरकारों ने पूरी व्यवस्था को चौपट कर दिया है. बौड़हा ग्राम में 400 साल पुराने राम मंदिर को देखने के बाद पुष्पम प्रिया चौधरी ने कहा कि "न संस्कृति बच रही, न विकास आ रहा है". बौड़हा, लौकहा, मधुबनी के ग्रामीणों शशि शेखर, नीतेश, गौतम और मुकेश राज ने बताया कि 400 साल पहले गाँव वालों ने आलू की फसल बेच कर इस सुंदर मंदिर का निर्माण कराया था. इन्होंने कहा कि अगर यहाँ टुरिज़म हब का विकास हो तो सबको रोज़गार भी मिलेगा और गाँव भी विकसित होगा. पुष्पम प्रिया चौधरी ने कहा कि "इसलिए मैं कहती हूँ कि आज के युवा सब जानते हैं - उनके पास नीयत भी है, विज़न भी, जो नक़ली नेताओं के पास नहीं है. अब विरासत और युवा एक साथ पॉलिसी निर्माण का हिस्सा होंगे".

किसान देश में माखौल का विषय बना
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"किसान देश में माखौल का विषय बना हुआ है और सरकारों को किसानों से कोई मतलब नहीं है. सरकारी योजनाएं सिर्फ और सिर्फ कागजों पर चलती है और अखबारों में दिखती है". यह व्यथा लदनिया प्रखंड में हर्बल औषधीय पौधों की खेती में क्रांति की शुरुआत करने वाले अरविंद कुमार मिश्र ने प्लुरल्स पार्टी की प्रेसिडेंट पुष्पम प्रिया को बताई. प्लुरल्स पार्टी की मुख्यमंत्री उम्मीदवार पुष्पम प्रिया चौधरी मधुबनी के अपने तीन दिवसीय दौरे के दूसरे दिन  कमतोलिया ग्राम में थी. हर्बल एग्रीकल्चर में क्रांति लाने वाले अरविंद कुमार मिश्र ने 2004 से इसकी शुरुआत की थी उसके बाद इस प्रखंड में कई किसानों ने इस तरह के औषधीय पौधों की खेती करना शुरू किया. इन्होंने बताया कि 27 तरह के औषधीय पौधों की खेतीकरते हैं जिसमें जापानी पुदीना और लेमन ग्रास महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने बताया कि एक समय मधुबनी पूरे राज्य में औषधीय पौधों के खेती में प्रथम स्थान पर था परंतु लालफीताशाही और सरकारी उदासीनता के कारण किसान विमुख होते जा रहे हैं. गागन नदी से बाढ़ और सुखाड़ के समस्याओं और तमाम सरकारी परेशानियों के बीच औषधीय पौधों की खेती करने वाले अरविंद कुमार मिश्र ने बताया कि कृषि में बहुत संभावना है, यह रोजगार सृजन का बेहतर साधन हो सकता है अगर सरकारी अनुदान और सहयोग दे परंतु इसके बदले सरकारी अनुदान के गबन से संबंधित मुकदमा मिलती है. इनका मानना था कि सरकार अगर खाद, बीज, बाजार और प्रोसेसिंग प्लांट  की सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करे तो बिहार को औषधीय पौधों की खेती में सर्वोत्तम स्थान हासिल हो सकता है.

क्रिकेट स्टेडियम 14 सालों से निर्माण की राह देख रहा
"मैडम जी, यह क्रिकेट स्टेडियम 14 सालों से निर्माण की राह देख रहा है, कुछ कीजिएगा जरूर" यह बात रौशन कामथ प्लुरल्स पार्टी की प्रेसिडेंट पुष्पम प्रिया चौधरी से कह रहे थे.  मधुबनी के अपने तीन दिवसीय दौरे के दूसरे दिन लदनिया प्रखंड के खोजा पंचायत के खाजेडीह में थी.  यंहा उपस्थित ग्रामीण रघुनाथ चौधरी ने कहा कि यंहा आधारभूत संरचनाओं की घोर कमी है. सामने अधूरी निर्मित भवन को दिखाते हुए कहा कि इस भवन को बिहार की भ्रष्टाचार की व्यवस्था ने निगल लिया है. स्वास्थ्य की सुविधा के लिए 15 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है. प्लुरल्स पार्टी की मुख्यमंत्री उम्मीदवार पुष्पम प्रिया चौधरी ने जब पूछा कि पढ़ाई कैसी होती है तब दसवें में पढ़ने वाले छात्र कृष्णा की यह टिप्पणी कि "मैडम, जब पढ़ाई होगी तब तो पता चलेगा कि शिक्षक कैसा पढ़ाते हैं". यह टिप्पणी बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर एक करारा तमाचा है.

उपेक्षित है बलिराजगढ़ का ऐतिहासिक स्थल 
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"बिहार में न तो विरासतों का सम्मान है न ही पुरातात्विक धरोहरों की चिंता" यह बात प्लुरल्स प्रेसिडेंट पुष्पम प्रिया चौधरी ने यंहा उपस्थित ग्रामीणों से कही जब वे अपने तीन दिवसीय मधुबनी यात्रा के दूसरे दिन बलिराजगढ़ का किला देखने आई थी. यंहा उपस्थित ग्रामीणों ने  इस ऐतिहासिक धरोहर को राष्ट्रीय पर्यटक स्थल के रूप में विकसित कराने की मांग पुष्पम प्रिया चौधरी से की. हालांकि, अब तक बलिराज गढ़ का समुचित विकास नहीं हो पाया है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण बिहार के मधुबनी जिला के बाबूबरही पंचायत में स्थित बलिराज गढ़ क्षेत्र के खुदाई में अब तक कई प्रयास किए हैं परंतु अब तक इसे ऐतिहासिक स्थल के रूप में विकसित करने में सफल नहीं हुए हैं. इससे पहले 1962-63, 1972-73 व 1974-75 में उत्खनन हो चुका है.  मधुबनी जिला के अंतर्गत बाबूबरही प्रखंड में स्थित बलिराजगढ़ बिना उत्खनित ऐतिहासिक स्थल है पौराणिक मान्यता है कि प्रहलाद के पौत्र एवं विरोचन के पुत्र राजा बलि का यह गढ़ रहा है. इसकी ऐतिहासिक महत्ता को देखते हुए वर्ष 1905 में सरकार द्वारा इसे अधिग्रहण कर लिया था. 1962-63 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और 1972-73 एवं 1974-75 में पुरातत्व और संग्रहालय निदेशालय बिहार सरकार द्वारा यहां उत्खनन कराया गया था. जिसमें 10वीं एवं 11वीं शताब्दी से लेकर 200 ईसा पूर्व तक के अवशेष मिले हैं. उत्खनन में ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी के दौरान शुंग काल में निर्मित रक्षात्मक दीवार, प्राचीन मंदिर के अवशेष तथा मानव एवं पशु टेराकोटा की आकृतियां व ताबे के सिक्के प्राप्त हुए हैं.

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