विशेष : आईटी में अग्रणी शहरी ही साइबर ठगी के अधिक शिकार - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 4 नवंबर 2025

विशेष : आईटी में अग्रणी शहरी ही साइबर ठगी के अधिक शिकार

Dr-rajendra-sharma
यदि यह प्रष्न किया जाए कि देश में सूचना प्रोद्यौगिकी में सबसे आगे कौन सा स्थान है तो बिना किसी झिझक व संदेह के एक ही शब्द का उत्तर आयेगा कि भारत में बेंगलुरु सूचना प्रोद्यौगिकी का बड़ा हब है। बल्कि यह कहना चाहिए कि बेंगलुरु की वैश्विक पहचान ही आईटी हब के रुप में होती है। अब यह भी माना जाना चाहिए कि सूचना प्रोद्यौगिकी या यों कहें कि आईटी में बेंगलुरुवासियों की समझ देश के अन्य प्रदेशों के नागरिकों की तुलना में अधिक ही होगी। दूसरी यह कि बेंगलुरु आईटी हब है तो निश्चित रुप से यहां के निवासियों का साक्षरता स्तर और समझ ना केवल अधिक होगी अपितु अन्य शहरों की तुलना में अधिक ही होगी। अब तस्वीर का दूसरा पहलू जो सामने आता है वह यह कि देश में साइबर अपराधों से पीड़ितों की भी सबसे अधिक संख्या बेंगलुरु में ही है। साल दर साल साइबर अपराध से ग्रसित लोगों की बेंगलुरु में बढ़ती ही जा रही है। हांलाकि दिल्ली, हैदराबाद आदि आदि अधिक समझदारों के क्षेत्रों में भी साइबर अपराध अधिक हो रहा है। देश के केवल तीन शहरों बेंगलुरु, दिल्ली एनसीआर और हैदराबाद में ही साइबर ठगी के अपराधों का प्रतिशत 65 फीसदी है। यह आंकड़ा भी केन्द्र सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए गठित इंडियन साइबर क्राइम कार्डिनेशन सेंटर आई4सी की हालिया रिपोर्ट में उभर कर आया है। रिपोर्ट के अनुसार अकेले बेंगलुरु में साइबर ठगी के 26.8 फीसदी मामलें हो रहे हैैं तो दिल्ली एनसीआर में 18.4 और हैदराबाद में 19.97 प्रतिशत मामलें सामने आ रहे हैं। यह इस मायने में भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि साइबर ठगी और उससे बचने की उपायों की बात भी स्वाभाविक हैं आईटी एक्सपर्ट द्वारा ही की जाती है। वैसे भी यह सामान्य सोच की बात है कि साइबर ठगी के शिकार पैसे वाले लोग ही आ रहे हैं और पैसे वाले लोगों की समझ, सरकारी गैरसरकारी क्षेत्र में कार्य का अनुभव और पढ़े-लिखे होने को लेकर कोई सवाल ही नहीं उठाया जा सकता। ऐसे में साइबर अपराधियों के कौशल या समझ को सराहा जाए या समझदार होने पर भी नासमझी पर आंसू बहाये जाएं या क्या किया जाएं, गंभीर चिंता, चिंतन और मंथन का विषय है।


सरकारी आंकड़ों की ही बात करें तो 2024 में 22845 करोड़ रुपए से अधिक की साइबर ठगी हुई है। इस साल के शुरुआती पांच माह की ही बात की जाए तो भारतीयों ने सात हजार करोड़ रु. से अधिक की राशि साइबर ठगी में गंवा चुके हैं। असल में साल दर साल साइबर ठगी के मामलें और राशि में बढ़ोतरी ही हो रही है। यह सब तो तब है कि सरकार ने 2018 में साइबर ठगी रोकने के लिए आई4सी का गठन किया जा चुका है। समय समय पर मोबाइल पर कॉल करते ही साइबर ठगी से बचने का संदेश कॉलर टोन के रुप में होता है तो सोशल मीडिया के सभी प्लेटफार्म पर साइबर ठगों द्वारा अपनाये जाने वाले तरीकों से बचने के लिए आगाह किया जाता रहा है। एक और यह कि साइबर ठगी की टर्मनोलोजी से भी आज का लगभग प्रत्येक व्यक्ति रुबरु होने के बावजूद गलती कर ही रहा है। फिशिंग, स्पूकिंग, स्पैम और साइबर स्टाकिंग के साथ ही डिजिटल अरेस्ट आज मोबाइल एण्ड्रायड रखने वाला प्रत्येक व्यक्ति जानकार है। खैर सबसे मजेदार या हास्यास्पद बात तो यह है कि साइबर ठगी के अधिकांश शिकार पैसे वाले और पैसेवालों में भी अधिकांश उच्च पदों से रिटायर्ड अधिकारी होते हैं। उनकी समझ पर किसी तरह का प्रश्न नहीं उठाया जा सकता। यह सब होने के बावजूद चीन, म्यांमार, लाओस, थाईलैंड व ऐसे ही अन्य स्थानों से ठगों द्वारा भारतीयों को पैसे के लालच से जोड़कर यह अपराध करवा रहे हैं। देखने में यह भी आया है कि साइबर ठग डिजिटल अरेस्ट कोई चंद मिनटों तक नहीं रखकर एक दो दिन या इससे भी अधिक दिनों तक रखकर आसानी से ड़रा-धमकाकर पैसे खातों से ले लेते हैं। भ्रमित इस कदर हो जाते हैं कि लाखों-करोडों में राशि देते समय आगे पीछे की सोचना ही भूल जाते है और ठगाते हुए अहसास होता है कि बड़ा धोखा हो गया।


हांलाकि सरकार द्वारा टोल फ्री नंबर जारी करने के साथ ही अवेयरनेस कार्यक्रम भी लगातार चलाया जा रहा है। आई4सी को सशक्त बनाया जा रहा है। 782 करोड़ रुपए के साइबर सिक्योरिटी प्रोजेक्ट पर भी तेजी से काम हो रहा है। पर दशकों से हाई बे के किनारों पर दिखाई देने वाला स्लोगन साबधानी हटी-दुर्घटना घटी और सतर्कता ही बचाव है एक समय भले ही यातायात सुरक्षा के प्रमुख अवेयरनेस संदेश होते थे पर लगता आज साइबर ठगी से बचने के लिए भी यह संदेश अधिक कारगर दिखाई दे रहे हैं। बार बार यही कहा जाता है कि अनजान नंबरों से आने वाले वीडियो कॉल की अनदेखी करें। इसी तरह से मोबाइल या मेल पर आने वाले अनजाने लिंक पर क्लिक करने से भी बचे। कोई कॉल या वीडियो कॉल पर किसी भी तरह का अफसर बनकर कॉल करे तो उसे तरजीह ना दे। ज्यादातर मामलों में आपकों या आपके परिवार के निकटस्थ को अवैध गतिविधियों में लिप्त होने का झूठा आरोप लगाकर भय दिखा कर ठगी की जा रही है। यह अब कोई नई बात नहीं रही ऐसे में साबधान रहकर ही साइबर ठगी से बच सकते हैं। डिजिटल अरेस्ट के हालात ही नहीं बनने दिए जा सकते हैं। जब घर में भी कोई सदस्य या परिचित रुपया पैसा उधार मांगता है तो हम दस बार सोचते हैं, आनाकानी करते हैं तो फिर ना जाने ऐसा कौनसा सम्मोहन या भय के हालात हो जाते हैं कि अपनी मेहनत की पूंजी को ठगों के हवाले कर देते हैं। ऐसे में सौ बात की एक बात यह है कि सतर्कता ही इसका एकमात्र बचाव है और हमें सतर्क रहकर ही साइबर ठगों के जाल को नष्ट करना होगा। अन्यथा देश के सर्वाधिक जानकार, विशेषज्ञ और पढ़े लिखे लोग ही अधिक शिकार हो रहे हैं तो फिर किसे दोष दिया जा सकता है।







डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

स्तंभकार

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