सीहोर : 19 अपै्रल को भव्य कलश यात्रा के साथ किया जाएगा प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव का श्रीगणेश - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 15 अप्रैल 2026

सीहोर : 19 अपै्रल को भव्य कलश यात्रा के साथ किया जाएगा प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव का श्रीगणेश

Sehore-kalash-yatra
सीहोर। शहर के भव्य और दिव्य न्यू बस स्टैंड स्थित बालाजी सरकार श्री हनुमान मंदिर में आगामी दिनों में होने वाले सात दिवसीय श्री 21 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ और प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव की शुरूआत आगामी 19 अपै्रल को आस्था और उत्साह के साथ आयोजित की जाएगी। लगातार सात दिनों तक आयोजित होने वाले महायज्ञ के साथ मानस सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इसमें एक दर्जन से अधिक कथा वाचक, संत और महंतों के साथ कथा व्यास राष्ट्रीय राम कथा व्यास मानस कोकिला महंत डॉ. प्रज्ञा भारती वृन्दावन के द्वारा श्रीराम कथा का वाचन किया जाएगा। राम कथा दोपहर तीन बजे से जयंती कालोनी में निर्मित की गई महायज्ञ शाला के पास पंडाल में की जाएगी। इसके अलावा रात्रि नौ बजे से बारह बजे तक महाकाल मंडल रामलीला उज्जैन के द्वारा भगवान की विभिन्न लीलाओं का मंचन किया जाएगा। महोत्सव को लेकर श्री-श्री 1008 यज्ञ संचालक पंडित दुर्गा प्रसाद कटारे, मंदिर समिति अध्यक्ष रुद्रप्रकाश राठौर, पंडित अनिल शास्त्री के सानिध्य में यज्ञ में बैठने वाले यजमानों की व्यवस्था की गई है। श्री-श्री 1008 यज्ञ संचालक पंडित दुर्गा प्रसाद कटारे ने बताया कि 21 कुंडीय श्रीराम महायज्ञ एक भव्य धार्मिक अनुष्ठान है, जो आमतौर पर विश्व कल्याण, शांति और भगवान राम की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए आयोजित किया जाता है। इसमें 21 कुंडीय यज्ञशाला में 84 जोड़े आहुतियां देते हैं। यह कार्यक्रम सात दिनों तक चलता है, जिसमें कलश यात्रा, राम कथा, रासलीला, हनुमान चालीसा पाठ और अंतिम दिन विशाल भंडारा किया जाएगा। इसके अलावा आगामी 19 अपै्रल से नियमित रूप से यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई है।


महायज्ञ में सहभागी बनकर विश्व कल्याण की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाएं

पंडित श्री कटारे ने बताया कि यह यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि मानवता के कल्याण का संकल्प है। यज्ञ की पवित्र अग्नि में समर्पित हर आहुति शांति, सद्भावना और सकारात्मक ऊर्जा को जागृत करती है। इस महायज्ञ में सहभागी बनकर विश्व कल्याण की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाएं। आपके सहयोग से ही यह प्रयास सफल होगा,  यज्ञ में भाग लेने वाले जितने पग बढ़ाते हैं, उन्हें अश्वमेघ यज्ञ की फल प्राप्त होती है। वैदिक विधि से यज्ञ मंडप का परिक्रमा करने से अनंत गुणा अधिक फल प्राप्त होता है। इष्ट मंत्र जपते हुए माला से परिक्रमा करने वाले विशुद्ध ज्ञान प्राप्त करते है। फल से परिक्रमा करने वाले को पुत्र, पौत्र, नात्र की प्राप्ति होती हैं। कंचन व द्रव्य लेकर परिक्रमा करने वाले को लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। जौ से परिक्रमा करने वाले यश की प्राप्ति करते है।

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