- 50वां इंडिया कार्पेट एक्सपो अब भदोही में, 2027 के जर्मनी मेले में भी भारतीय निर्यातकों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय विस्तार का अवसर
बैठक का सबसे अहम और चर्चित निर्णय रहा, नई दिल्ली में प्रस्तावित 50वें इंडिया कार्पेट एक्सपो (आईसीई) को निरस्त कर इसे भदोही में आयोजित करना। परिषद ने तय किया कि अब यह प्रतिष्ठित एक्सपो अक्टूबर माह के प्रथम सप्ताह में भदोही स्थित कार्पेट एक्सपो मार्ट में आयोजित होगा। यह निर्णय केवल आयोजन स्थल का परिवर्तन नहीं, बल्कि एक रणनीतिक बदलाव है, जो सीधे तौर पर कालीन उद्योग के वास्तविक केंद्र, भदोही को सशक्त करने की दिशा में उठाया गया है। सीईपीसी के सीनियर एवं पूर्व प्रशासनिक सदस्य उमेश गुप्ता का मानना है कि इस निर्णय से स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और निर्यातकों को अभूतपूर्व लाभ मिलेगा। अब उन्हें अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जुड़ने के लिए राजधानी का रुख नहीं करना पड़ेगा। इससे लागत में कमी आएगी, साथ ही छोटे और मध्यम स्तर के निर्यातकों की भागीदारी भी बढ़ेगी। बैठक में वैश्विक स्तर पर भारतीय कालीन उद्योग की मौजूदगी को और मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया गया। इसी क्रम में वर्ष 2027 में जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित हैमटेक्सटाइल मेले में परिषद की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया।
परिषद अपने सदस्यों को हॉल 12.1 में स्टॉल उपलब्ध कराएगी, जिससे भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने का सुनहरा अवसर मिलेगा। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और भारतीय कालीन उद्योग को अपनी पारंपरिक गुणवत्ता के साथ-साथ आधुनिक बाजार की मांगों के अनुरूप खुद को ढालना आवश्यक हो गया है। जर्मनी का हैमटेक्स्टाइल मेला विश्व के सबसे बड़े टेक्सटाइल आयोजनों में से एक माना जाता है, जहां भागीदारी भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाजारों के द्वार खोल सकती है। इसके साथ ही बैठक में कार्पेट एक्सपो मार्ट, भदोही के संचालन, बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण और सुविधाओं के विस्तार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। सदस्यों ने इस बात पर बल दिया कि यदि भदोही को स्थायी रूप से अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक हब बनाना है, तो यहां की व्यवस्थाओं को विश्वस्तरीय बनाना अनिवार्य होगा। कुल मिलाकर, यह बैठक केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भदोही के कालीन उद्योग के लिए एक नई दिशा तय करने वाला मंच साबित हुई। दिल्ली से एक्सपो को भदोही स्थानांतरित करने का निर्णय जहां स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति देगा, वहीं अंतरराष्ट्रीय मेलों में भागीदारी भारतीय कालीनों की वैश्विक साख को और मजबूत करेगी। मतलब साफ है यदि इन निर्णयों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में भदोही न केवल भारत, बल्कि विश्व के कालीन व्यापार का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।

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