- छात्रों की गूंज: निष्पक्ष परीक्षाओं के लिए देशव्यापी आंदोलन के साथ कांग्रेस
छात्र कोई अनुचित मांग नहीं कर रहे हैं। उनकी मांग केवल इतनी है कि परीक्षाएं निष्पक्ष और पारदर्शी हों, उनका भविष्य सुरक्षित हो, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को कड़ी सजा मिले। जब सरकार ने संवाद के बजाय दमन का रास्ता चुना, तब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी स्वयं प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करते हुए यह मांग करने पहुंचे कि प्रधानमंत्री छात्रों से मिलें, उनकी बातें सुनें और देश के युवाओं को जवाब दें। इसी पृष्ठभूमि में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपने राष्ट्रव्यापी "छात्रों की गूंज" अभियान को और तेज़ किया है। यह अभियान उन करोड़ों छात्रों की आवाज़ को बुलंद करने का आंदोलन है, जो पेपर लीक, परीक्षा अनियमितताओं, भर्ती में देरी, बेरोज़गारी और सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था के लगातार कमजोर होने से प्रभावित हुए हैं। पिछले 12 वर्षों में देशभर में कम-से-कम 152 पेपर लीक की घटनाओं से 7.5 करोड़ से अधिक छात्र प्रभावित हुए हैं। परीक्षाएं रद्द हुईं, परिणामों में देरी हुई और भर्ती प्रक्रियाएं ठप पड़ गईं। इससे पूरी एक पीढ़ी का भविष्य संकट में आ गया है। ये घटनाएं मोदी सरकार की संगठित पेपर लीक माफिया पर कार्रवाई करने में विफलता और जवाबदेही तय करने से लगातार इनकार को उजागर करती हैं।
NEET-UG 2026 का संकट सरकार की परीक्षा प्रणाली की विफलता का सबसे बड़ा उदाहरण बन गया है। 3 मई को आयोजित परीक्षा में 22 लाख से अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया था। पेपर लीक का खुलासा होने के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी और छात्रों को 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा देने के लिए मजबूर किया गया। री-नीट परीक्षा से पहले के दौर में कम-से-कम 21 NEET अभ्यर्थियों द्वारा आत्महत्या किए जाने की खबरें सामने आईं। इसके बावजूद भाजपा सरकार पूरी तरह मौन रही और छात्रों व उनके परिवारों को अकेले इस संकट का सामना करना पड़ा। री-नीट परीक्षा भी छात्रों का विश्वास बहाल नहीं कर सकी। परिणाम घोषित होने के बाद अनेक छात्रों ने आरोप लगाया कि उनके द्वारा दिए गए उत्तर, NTA द्वारा अपलोड की गई स्कैन OMR शीट और अंतिम स्कोरकार्ड में गंभीर अंतर है। कई मामलों में 595 अंक अपेक्षित होने के बावजूद लगभग 60 अंक, 609 अंक के स्थान पर 167 अंक, तथा 702 अंक के स्थान पर मात्र 87 अंक दर्शाए गए। एक छात्र को अपने उत्तरों पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए प्रति प्रश्न ₹200 की दर से कुल ₹27,800 जमा करने पड़े। छात्रों की शिकायतों का पारदर्शी समाधान करने के बजाय NTA द्वारा कथित रूप से उन्हें कानूनी कार्रवाई की धमकी दी गई।
कांग्रेस पार्टी ने मांग की है कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए तथा मूल OMR शीट, स्कैन कॉपी, मशीन द्वारा रिकॉर्ड किए गए उत्तर, अंतिम उत्तर कुंजी, प्रश्नवार अंक और मूल्यांकन प्रक्रिया में किए गए प्रत्येक बदलाव का समय-चिह्नित रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए। यह संकट केवल प्रतियोगी परीक्षाओं तक सीमित नहीं है। CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली, UGC-NET समाजशास्त्र प्रश्नपत्र लीक तथा अन्य कई घटनाओं ने परीक्षा प्रणाली में गहरी संस्थागत कमियों को उजागर किया है और छात्रों का विश्वास बुरी तरह कमजोर किया है। ओडिशा में कक्षा 1 से 8 तक की नई पाठ्यपुस्तकों में 1,678 त्रुटियां पाए जाने की खबरें सामने आईं। वहीं CBSE की ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रणाली पर धुंधली स्कैन कॉपियां, पन्ने गायब होने, गलत मूल्यांकन और टेंडर प्रक्रिया में पक्षपात जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। देश के अनेक राज्यों में शिक्षक भर्ती तथा अन्य सरकारी भर्तियां गलत उत्तर कुंजी, प्रशासनिक लापरवाही और अनावश्यक देरी के कारण वर्षों से लंबित हैं। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, जबकि राज्य विश्वविद्यालय पर्याप्त शिक्षकों, बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक संसाधनों के अभाव से जूझ रहे हैं। इसका सबसे अधिक नुकसान उन छात्रों को हो रहा है, जिनके लिए सरकारी शिक्षा ही सामाजिक और आर्थिक उन्नति का सबसे बड़ा माध्यम है।
श्री राहुल गांधी इस पूरे संघर्ष में लगातार छात्रों के साथ खड़े रहे हैं। उन्होंने 17 जून को कोटा में छात्रों, अभिभावकों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के साथ संवाद कर "छात्रों की गूंज" अभियान की शुरुआत की। इसके बाद 17 जुलाई 2026 को देहरादून में भी उन्होंने छात्रों से मुलाकात की, जहां युवाओं ने पेपर लीक, भर्ती में देरी, बेरोज़गारी और घटते अवसरों को लेकर अपनी चिंताएं साझा कीं। NEET, JEE, UPSC, SSC, रेलवे तथा विभिन्न राज्य स्तरीय परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र कोचिंग, यात्रा, रहने और आवेदन शुल्क पर लाखों रुपये खर्च करते हैं। इसके बावजूद उन्हें यह भरोसा नहीं होता कि प्रश्नपत्र सुरक्षित रहेगा, परिणाम समय पर आएंगे या भर्ती प्रक्रिया पूरी होगी। ऐसी परीक्षा व्यवस्था, जो छात्रों से लगातार पैसा ले लेकिन निष्पक्षता, पारदर्शिता और समयबद्ध भर्ती की गारंटी न दे सके, अवसर का नहीं बल्कि शोषण का माध्यम बन चुकी है। "छात्रों की गूंज" अभियान के अंतर्गत वर्तमान में देश के 28 प्रमुख शहरों में कॉलेज परिसरों, छात्रावासों, पुस्तकालयों, छात्र संवाद कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। अब इसे 100 शहरों तक विस्तारित किया जा रहा है, ताकि छात्रों और युवाओं के साथ राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक संवाद स्थापित किया जा सके। "छात्रों की गूंज" भारत के छात्रों की आवाज़ है। कांग्रेस पार्टी इस आवाज़ को देश के हर शहर की सड़कों से लेकर संसद तक मजबूती के साथ उठाती रहेगी। संवाददाता सम्मेलन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम, मीडिया चेयरमैन राजेश राठौड़ एवं ब्रजेश प्रसाद मुनन मौजूद थे।

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