कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भाजपा प्रदेश महामंत्री गौरव रणदीवे ने कहा कि आज मैं आपके समक्ष उस महापुरुष के जीवन पर चर्चा करने के लिए उपस्थित हुआ हूँ, जिन्होंने मात्र 52 वर्ष के अल्प जीवन में शिक्षा, समाज और राजनीति—तीनों क्षेत्रों में ऐसी अमिट छाप छोड़ी कि आज लगभग सात दशक बाद भी पूरा राष्ट्र उन्हें स्मरण करता है। भारतीय जनता पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज उन्हें महान राष्ट्रवादी व्यक्तित्व के रूप में श्रद्धापूर्वक याद करता है। उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत के लिए अपने जीवन से अमिट प्रेरणा छोड़कर गए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे महान शिक्षाविद, प्रखर राष्ट्रवादी एवं भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी उन महान व्यक्तित्वों में से थे, जो केवल इतिहास का हिस्सा नहीं बने, बल्कि इतिहास रचने के लिए आए थे। कुछ लोग इतिहास में जन्म लेते हैं और कुछ लोग इतिहास बनाने आते हैं। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी दूसरी श्रेणी के ऐसे महान नेता थे, जिन्होंने इतिहास निर्माण का कार्य किया। प्रदेश महामंत्री श्री रणदीवे ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पिता स्वयं एक प्रखर शिक्षाविद थे। वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति रहे तथा उन्हें 'बंगाल का बाघ' भी कहा जाता था। अंग्रेजी शासन के उस दौर में, जब राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय अखंडता की बात करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण था, तब उनके पिता ने भी राष्ट्रहित की विचारधारा को आगे बढ़ाने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को कलकत्ता के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ। उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की, बैरिस्टर की उपाधि हासिल की तथा बंगला और अंग्रेजी सहित अनेक भाषाओं में उत्कृष्ट दक्षता प्राप्त करते हुए अपनी प्रतिभा सिद्ध की। वे चाहते तो इंग्लैंड में बैरिस्टर के रूप में सफल जीवन व्यतीत कर सकते थे, किंतु उनके जीवन का उद्देश्य राष्ट्रसेवा था। इसलिए उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा और विद्वता को राष्ट्रवाद की दिशा में समर्पित किया।
श्री रणदीवे ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। अंग्रेजी शासन के उस समय में, जब अंग्रेजी बोलना और अंग्रेजी में संवाद करना सम्मान का प्रतीक माना जाता था, तब उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय में बंगला भाषा तथा भारतीय भाषाओं को सम्मान दिलाने का कार्य किया। उन्होंने इस दिशा में प्रयास किया कि स्नातक की शिक्षा और डिग्रियाँ भारतीय भाषाओं में भी प्रदान की जाएँ। यह उस समय राष्ट्रवाद की एक साहसिक और दूरदर्शी पहल थी। ऐसे समय में जब अंग्रेजी का प्रभाव सर्वोच्च माना जाता था और अंग्रेजी शासन का दबाव भी था, तब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्रीयता और मातृभाषा के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व के अनेक प्रेरणादायी आयाम थे। उन्होंने अल्पायु में राष्ट्र के लिए जो कार्य किए, वे आज भी प्रत्येक कार्यकर्ता और नागरिक के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनके जीवन से हमें राष्ट्रहित, शिक्षा, संगठन और राष्ट्रीय स्वाभिमान के लिए समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा मिलती है। कार्यकर्ता सम्मेलन को भाजपा जिला प्रभारी विकास विरानी, भाजपा जिलाध्यक्ष नरेश मेवाड़ा एवं आष्टा विधायक गोपाल इंजीनियर ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में मंच पर जिला महामंत्री पंकज गुप्ता, जितेन्द्र गौड़, तारा कटारिया, नगरपालिका अध्यक्ष हेमकुंवर मेवाड़ा, मंडल अध्यक्ष अंजलि चौरसिया, बाबूलाल पटेल, मायाराम गौर, राजकुमार गुप्ता सहित अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी मंचासीन रहे।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें