पटना : मिथिला में गरीबी- कारण और निवारण के सेमीनार में वक्ताओं ने उठाया पृथक मिथिला राज्य की माँग - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 27 जुलाई 2026

पटना : मिथिला में गरीबी- कारण और निवारण के सेमीनार में वक्ताओं ने उठाया पृथक मिथिला राज्य की माँग

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पटना (संवाददाता) :- संगीतायन फांउडेशन,  के तत्वाधान में विद्यापति भवन ,चेतना समिति के सभागार में " मिथिला में गरीबी-कारण और निवारण " विषय पर सेमीनार हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता दूरसंचार विभाग के पूर्व निदेशक एवं राष्ट्रपति -प्रधानमंत्री से सम्मानित डा० एन० पी० सेन ने की।मंच संचालन चेतना समिति के सचिव  श्री जयदेव मिश्र ने की। आने वाले अतिथि ने अपने विचार रखे।  मिथिला से गरीबी दूर करने और उसपर हो रहे प्रयासों पर अपने सुझाव दिये। जिसमें डा० एन पी सेन, चेतना समिति के अध्यक्ष श्री विवेकानंद झा,भूतपूर्व आईएस विजय प्रकाश, डा० रत्नेश्वर मिश्र, भूतपूर्व मंत्री विनोद नारायण झा,भूतपूर्व मंत्री राजकुमार पूर्वे, भूतपूर्व मंत्री समीर कु महासेठ, भूतपूर्व मंत्री डा० मदन मोहन झा प्रमुख थे।


रोहित कुमार और डा० दीप्ती कुमारी ने मिथिला मे गरीबी और पिछङेपन पर अपने तथ्य और आंकङें प्रस्तुत किये। संगीतायन फांउडेशन के महासचिव श्री अवनिन्द्र ठाकुर ने आनेवाले अतिथियों, वक्ताओं और श्रोताओं का धन्यवाद ज्ञापन किया और सेमीनार के उदे्श्य पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के संयोजक अंशुमन सिंह ने आधुनिक विकास मोडल पर ध्यान खींचा। विशिष्ट वक्ताओं मे अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी ईंजीनीयर शिशिर कुमार झा, डा० अशोक अविचल,  डा० प्रेम कांत चौधरी , श्री मदन कुमार झा प्रमुख थे। सभी वक्ताओं ने पृथक मिथिला राज्य की माँग उठाई। ईंजीनीयर झा ने कहा आजादी के 79 साल में सभी राजनीतिक दल ने बिहार पर शासन किया, लेकिन मिथिला की सुधी नहीं ली। उत्तर भारत का एकमात्र संवैधानिक भाषा मैथिली को समुचित अधिकार नहीं मिला। मिथिला के उद्धार के लिये मैथिलों द्वारा मैथिलों के लिये मैथिलों का सरकार हीं एकमात्र समाधान है। पृथक मिथिला राज्य हीं मगही शासन से मुक्ति का एकमात्र विकल्प है।

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