सीहोर : श्री नृसिंह लक्ष्मी महादेव मंदिर में नमक-चमक सहस्त्रधारा महा रुद्राभिषेक - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 24 अगस्त 2026

सीहोर : श्री नृसिंह लक्ष्मी महादेव मंदिर में नमक-चमक सहस्त्रधारा महा रुद्राभिषेक

Rudrabhishek-sehore
सीहोर। शहर के कोलीपुरा स्थित प्राचीन सिद्धपीठ स्थित श्री नृसिंह लक्ष्मी महादेव मंदिर में सोमवार के पावन पर्व पर विद्वान पंडितों के द्वारा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों ने नमक-चमक सहस्त्रधारा रुद्राभिषेक किया गया। मंदिर के संत माधवदास महाराज के मार्गदर्शन में आधा दर्जन विद्वान पंडितों के द्वारा सुबह छह बजे पंचामृत से भगवान शिव का अभिषेक किया गया था, वहीं शाम को हवन पूजन और महा आरती का आयोजन किया गया। इस मौके पर पंडित कुणाल व्यास ने बताया कि जब चंद्र प्रधान दूध, दही इत्यादि से भगवान शिव को स्नान कराया जाता है तो व्यक्ति के मन की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है तथा साथ-ही-साथ उसके मन का चंचल स्वभाव भी समाप्त हो जाता है।


संस्कार मंच के प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि रुद्राभिषेक का विशेष महत्व है। मन निर्मल हो जाने पर भगवान शिव की कृपा भक्तों पर होती है यदि कोई भक्त इस पवित्र माह में सच्चे मन से शिव की उपासना करता है तो उसे उस भक्ति का लाभ अवश्य ही मिलता है। सावन का अंतिम सोमवार था इसलिए मंदिर में पूजा अर्चना और प्रवचन का आयोजन किया गया था। उन्होंने कहा कि मनुष्य की रचना पांच तत्वों से मिलकर हुई है जो इस प्रकार हैं। पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु तथा आकाश। इनके अलावा पांच ज्ञानेन्द्रियां तथा पांच कर्मेन्द्रियां भी उसमें समावेशित हैं। इन सब  में सर्वाधिक शक्तिशाली मन को माना गया है जिसकी गति अत्यधिक तीव्र होती है मन की इसी चंचलता के कारण मात्र मनुष्यों को ही नहीं अपितु देवताओं के साथ-साथ दैत्यों को भी दु:ख झेलने पड़े थे। इसी क्रम में मन के पांच विकार बताये गये हैं। काम, क्रोध, लोभ, मोह तथा अहंकार इन पांचों के कारण ही मनुष्य सदा ही दुख पाता है। प्राचीन काल में भी ऋषि विश्वामित्र, ऋ़षि दुर्वासा तथा इन्द्रादि देवताओं को भी इन विकारों के हाथों पराजित होना पड़ा था। कोई भी अनुष्ठान हो अथवा पूजा-अर्चना हो वह केवल तभी सफल होती है जब मन के इन विकारों से व्यक्ति मुक्त हो जाए और निर्मल मन से ईश्वर की आराधना करे। 

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