नई पहल India Zero Emission Freight Alliance (India ZEFA) का मकसद भी यही है। यह एक ऐसा राष्ट्रीय मंच है, जिसमें सरकार, लॉजिस्टिक्स कंपनियां, वाहन निर्माता, ऊर्जा कंपनियां, चार्जिंग सेवा प्रदाता, वित्तीय संस्थान और विकास साझेदार मिलकर भारत में शून्य-उत्सर्जन माल परिवहन को बढ़ावा देंगे। इसका उद्देश्य सिर्फ़ इलेक्ट्रिक ट्रकों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि पूरे सड़क माल परिवहन तंत्र में मौजूद बाधाओं को मिलकर दूर करना है। इस मंच के शुभारंभ के दौरान डीपीआईआईटी (DPIIT) के अतिरिक्त सचिव अतीश कुमार सिंह, भारत में नीदरलैंड्स के उप राजदूत हुइब माइनारेंड्स, डीपीआईआईटी के उप सचिव प्रवीण कुमार साहुकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और विभिन्न संस्थाओं के अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में भारत के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी, स्वच्छ और भविष्य के लिए तैयार बनाने पर ज़ोर दिया गया। Smart Freight Centre के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. डॉ. इंग. क्रिस्टोफ़ वोल्फ़ ने कहा कि भारत के पास दुनिया की सबसे प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ माल परिवहन व्यवस्था बनाने का अवसर है। उनके मुताबिक यह बदलाव सिर्फ़ नई तकनीक का नहीं, बल्कि उन लाखों ड्राइवरों का भी है जो भारत की सप्लाई चेन की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा कि सही वित्तीय मॉडल, भरोसेमंद बुनियादी ढांचा और सभी पक्षों के बीच सहयोग से ऐसा माल परिवहन तंत्र बनाया जा सकता है जो स्वच्छ होने के साथ-साथ लोगों की आजीविका भी बेहतर बनाए।
Shell Foundation के वरिष्ठ सलाहकार डारा ओवोयेमी ने कहा कि इलेक्ट्रिक माल परिवहन का मतलब सिर्फ़ नई तकनीक अपनाना नहीं है। यह उन लोगों की ज़िंदगी बेहतर बनाने का भी अवसर है जो हर दिन देश की सप्लाई चेन को चलाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि सस्ती वित्तीय सुविधा, स्थिर मांग और वाहन स्वामित्व के अवसर उपलब्ध कराए जाएं, तो इलेक्ट्रिक वाहन ड्राइवरों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पूरे माल परिवहन क्षेत्र को अधिक समावेशी बना सकते हैं। रिपोर्ट यह भी कहती है कि भारत में सड़क मार्ग से माल ढुलाई लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यदि यह क्षेत्र धीरे-धीरे शून्य-उत्सर्जन वाहनों की ओर बढ़ता है, तो इससे एक तरफ़ ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम होगा और दूसरी तरफ़ ड्राइवरों की आय तथा आर्थिक सुरक्षा भी बेहतर हो सकती है। लेकिन इसके लिए सिर्फ़ वाहन बदलना पर्याप्त नहीं होगा। वित्त, चार्जिंग ढांचा, कारोबार के मॉडल, नीतियां और बुनियादी ढांचा, इन सभी को साथ लेकर चलना होगा। भारत का एनर्जी ट्रांजिशन सिर्फ़ बिजली बनाने या ईंधन बदलने की कहानी नहीं है। यह उन लाखों लोगों की भी कहानी है जिनकी रोज़ी-रोटी सड़कों पर चलने वाले मालवाहक वाहनों से जुड़ी है। नई रिपोर्ट का संदेश साफ़ है कि अगर जलवायु के लिए किए जा रहे बदलाव लोगों की आय और जीवन को भी बेहतर बनाएं, तभी यह बदलाव लंबे समय तक टिकाऊ साबित होगा।

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