- किसी संत को उसकी वेशभूषा से नहीं परखना चाहिए, संत साधना का दूसरा रूप हैं : संत पं. दुर्गा प्रसाद कटारे
संत साधना का दूसरा रूप, वेशभूषा से नहीं परखें
संत पं. दुर्गा प्रसाद कटारे ने कहा कि भगवान शिव का वर्णन शब्दों में करना संभव नहीं है। वे एक ओर भोलेनाथ के रूप में पूजे जाते हैं तो दूसरी ओर महाकाल के स्वरूप में आराध्य हैं। सदाशिव सदैव साधकों के बीच प्रिय रहे हैं। उन्होंने संत की व्याख्या करते हुए कहा कि जो मन की सीमाओं के पार है, वही संत है। संत का अर्थ परम संतुलन है और स्वयं को संतुलित रखना भी अपने आप में एक विशेष तप है। किसी संत को उसकी वेशभूषा से नहीं परखना चाहिए। संत साधना का दूसरा रूप हैं और संत वही है, जिससे मनुष्य को अपने वास्तविक स्वरूप और जीवन का पता चलता है। प्रेम सदैव बुद्धि और तर्क से परे होता है। जीवन में प्रेम, संस्कार और सेवा का भाव व्यक्ति को भीतर से समृद्ध बनाता है।
संस्कारों का अभाव वर्तमान पीढ़ी के लिए चिंता का विषय
कार्यक्रम में पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं नवज्योति संगठन के मुख्य संरक्षक हरीश अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी में संस्कारों का अभाव आज परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। कई बच्चे अपने माता-पिता की उपेक्षा करते हैं, जबकि परिवार की मजबूती आपसी सम्मान और संस्कारों से बनी रहती है। उन्होंने अपने परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि उनका परिवार वर्षों से संयुक्त रूप से सुख-समृद्धि के साथ जीवन व्यतीत कर रहा है। परिवार में छोटे से लेकर बड़े तक एक-दूसरे का सम्मान करते हैं। यही आपसी सम्मान और एकता पूरे परिवार को मजबूती प्रदान करती है। संकल्प वृद्धाश्रम के संचालक राहुल सिंह के मार्गदर्शन में चल रहे कार्यक्रम के दौरान मंचासीन संत पं. दुर्गा प्रसाद कटारे बाबा, नवज्योति संगठन के मुख्य संरक्षक हरीश अग्रवाल तथा खाती समाज के अध्यक्ष एवं पेंशनर्स एसोसिएशन के सचिव रघुनाथ सिंह वर्मा का पुष्पमाला से स्वागत किया गया। संस्कार मंच के प्रभारी मनोज दीक्षित मामा, आकाश शर्मा, अजय मीना और आयुष गुप्ता सहित अन्य सदस्यों ने अतिथियों का अभिनंदन किया।
वृद्धाश्रम के लिए 11 हजार रुपए का सहयोग
इस अवसर पर पेंशनर्स एसोसिएशन के सचिव रघुनाथ सिंह वर्मा ने अपनी ओर से संकल्प वृद्धाश्रम परिवार को 11 हजार रुपए की सहयोग राशि प्रदान की। उन्होंने कहा कि वृद्धाश्रम में करीब दो दर्जन से अधिक वृद्धजन निवास कर रहे हैं। आज के दौर में बुजुर्गों के लिए इस प्रकार की संस्था द्वारा किया जा रहा कार्य समाज के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नर सेवा ही नारायण सेवा है। इसी भावना के साथ बुजुर्गों की सेवा और जरूरतमंदों की सहायता के लिए लगातार कार्य करते रहना चाहिए।
आज होगा 'साथ खेलें, साथ सीखेंÓ कार्यक्रम
सात दिवसीय संकल्प पीढ़ी संवाद के तहत रविवार को 'साथ खेलें, साथ सीखेंÓ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें वरिष्ठ नागरिकों, बच्चों और युवाओं के बीच खेल एवं सहभागिता के माध्यम से पीढ़ियों के बीच संवाद और आपसी जुड़ाव को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य अनुभव और ऊर्जा को एक मंच पर लाकर बुजुर्गों एवं नई पीढ़ी के बीच आत्मीयता और अपनत्व की भावना को बढ़ावा देना है।

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