- गंभीर अनीमिया के 5,632, मध्यम अनीमिया के 3.34 लाख से अधिक तथा अल्प अनीमिया के 14.22 लाख से अधिक मामले चिन्हित
- अनीमिया की समय पर पहचान और उपचार सरकार की प्राथमिकता : स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत
1.20 करोड़ से अधिक लाभार्थियों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य
अभियान के तहत राज्य में अनीमिया की जांच एवं आवश्यक उपचार के लिए 1,20,82,500 लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 28 सितंबर तक 94,71,377 लोगों की जांच पूरी की जा चुकी है।
स्वास्थ्य संस्थानों से लेकर विद्यालयों तक स्क्रीनिंग
अभियान के तहत अनीमिया की जांच के लिए जिला अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल, रेफरल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, आयुष्मान आरोग्य मंदिर एवं स्वास्थ्य उप-केंद्रों पर व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण दिवस (VHSND), प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) सत्र एवं अन्य सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में भी स्क्रीनिंग चलंत चिकित्सा दल द्वारा की जा रही है। जांच के लिए डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर, टेस्ट स्ट्रिप्स, क्यूबिट, लैंसेट, अल्कोहल स्वाब एवं डिस्पोजेबल दस्ताने जैसी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। उपचार के लिए आवश्यकतानुसार आयरन-फोलिक एसिड सिरप एवं आयरन-फोलिक एसिड की निर्धारित खुराक वाली गोलियां निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही, एनीमिया से ग्रसित गर्भवती महिलाओं को आवश्यकता के अनुसार FCM (Ferric Carboxymaltose) थेरेपी की सुविधा भी प्रदान की जा रही है।
गंभीर एवं मध्यम अनीमिया वाले मरीजों के उपचार और फॉलो-अप पर विशेष ध्यान
अभियान के दौरान मध्यम एवं गंभीर अनीमिया से ग्रसित पाए जाने वाले लाभार्थियों के लिए उचित उपचार, आवश्यकता के अनुसार उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफरल, निरंतर परामर्श एवं फॉलो-अप की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। इसके तहत लाभार्थियों को आई. वी. सुक्रोज़ / एफ. सी. एम. इंजेक्शन भी उपलब्ध कराई जा रही है।जांच के बाद लाभार्थियों का डेटा “अनीमिया मुक्त भारत अभियान एप्लीकेशन” पर डिजिटल रूप से दर्ज किया जा रहा है, जिससे लाभार्थियों की पहचान, उपचार एवं फॉलो-अप की निगरानी को बेहतर बनाया जा सके।
पोषण संबंधी परामर्श भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा
अनीमिया की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए केवल दवा ही नहीं, बल्कि पोषण संबंधी जागरूकता पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। जांच कराने वाले लाभार्थियों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध आयरन युक्त खाद्य पदार्थों, संतुलित आहार, सही खान-पान, मोटापा नियंत्रण एवं अन्य पोषण संबंधी विषयों पर परामर्श दिया जा रहा है। इस कार्य में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO), एएनएम तथा आरएमएनसीएचए काउंसलर्स सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
बांका, सीतामढ़ी और पश्चिमी चंपारण सहित कई जिलों में बेहतर प्रगति
28 सितंबर 2026 तक की उपलब्धि के आधार पर बांका, सीतामढ़ी, पश्चिमी चंपारण,सारण एवं मधेपुरा अग्रणी जिलों में शामिल हैं। साथ ही अन्य जिलों की प्रगति अपने निर्धारित लक्ष्य से उपर है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी जिलों में अभियान की निरंतर समीक्षा की जा रही है तथा स्क्रीनिंग, उपचार एवं फॉलो-अप की गति को और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश समय-समय पर दिए जा रहे हैं।

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