न्यायाधीश ने कहा कि भारत का निवासी और नागरिक होने के नाते उनका घर-परिवार और व्यवसाय वहीं था तथा ब्रिटेन में उनका कोई "सामुदायिक संबंध" नहीं था, जबकि लंदन में पीए की जरूरत के लिए कोई "ठोस आधार" न होने के बावजूद, उन्होंने लोगों को काम पर रखने के लिए इस देश (ब्रिटेन) की काफी यात्राएं की थीं। इस बीच, उनकी सहायक मनप्रीत कौर को यौन हमले को इरादतन बढ़ावा देने या उसमें मदद करने को लेकर आरोपित किया गया। उन्हें पूर्व की एक सुनवाई के दौरान जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। वह जेल से वीडियो लिंक के जरिये पेश होने वाली थीं। एक प्रशासनिक गलती की वजह से बुधवार को उन्हें पेश नहीं किया जा सका, जिसके कारण लोक अभियोजक द्वारा लगाए गए 13 आरोपों पर दोनों आरोपियों को औपचारिक रूप से पेश करने की प्रक्रिया अगले महीने तक टल गई। अग्रवाल की बैरिस्टर साशा वास ने अपने मुवक्किल को ‘‘अच्छे चरित्र’’ वाला व्यक्ति बताया, जिन्हें दक्षिण-पश्चिम लंदन की वंड्सवर्थ जेल में एक महीने से अधिक समय से रखा गया है। अग्रवाल (57) और कौर (41) को 26 मई और नौ अगस्त को हुए कथित यौन अपराधों के मामले में 11 अगस्त को लंदन के पॉश मेफेयर इलाके में ब्रिक स्ट्रीट स्थित एक इमारत से गिरफ्तार किया गया था। अग्रवाल पर ‘‘यौन उत्पीड़न के चार आरोप हैं।’’ वहीं, कौर पर ‘‘यौन उत्पीड़न जैसे अपराध को इरादतन बढ़ावा देने या उसमें मदद करने के दो आरोप’’ हैं।
ब्रिटेन की एक अदालत ने पिछले महीने लंदन में यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार किये गए फौजदारी मामलों के वकील विजय अग्रवाल की जमानत याचिका आरोपों की गंभीरता के कारण बुधवार को खारिज कर दी। अग्रवाल ने धोखाधड़ी और धनशोधन के मामलों में भगोड़े कारोबारी मेहुल चोकसी का प्रतिनिधित्व किया है। अग्रवाल, साउथवार्क क्राउन कोर्ट में न्यायमूर्ति जॉन मिल्ने के समक्ष पेश हुए। उनपर ब्रिटेन के गंभीर अपराध अधिनियम और आधुनिक दासता अधिनियम के तहत 13 आरोप हैं। अदालत में मिली जानकारी के मुताबिक, दिल्ली के 57-वर्षीय वकील पर एक महिला को बिना उसकी सहमति के ‘‘अश्लील तरीके से छूने" और महिलाओं को ‘‘शोषण के मकसद’’ से यात्रा कराने का आरोप है। इन आरोपों को न्यायाधीश ने ‘‘बेहद परेशान करने वाला’’ बताया है। न्यायाधीश ने कहा, ‘‘ये बहुत गंभीर आरोप हैं और इस बात की पूरी आशंका है कि (यदि जमानत मिल जाती है) तो (आरोपी) मुकदमे की सुनवाई में शामिल नहीं होगा।’’ न्यायाधीश ने अग्रवाल के उस ‘‘सुनियोजित और नापाक इरादे वाले भर्ती अभियान’’ की ओर इशारा किया, जिसके जरिये वह ‘‘यौन संबंधों के लिए आसानी से राजी होने वाली’’ युवतियों की तलाश में निजी सहायक (पीए) के ‘‘फर्जी’’ पद के लिए आवेदन करवाता था। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि आरोपी अपने निजी स्वार्थ के लिए ‘‘अपनी वरिष्ठता का गलत इस्तेमाल करने को आमादा था।’’

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