सीहोर : भागवत कथा में लगाया छप्पन भोग, गोवर्धन पूजन का किया वर्णन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026

सीहोर : भागवत कथा में लगाया छप्पन भोग, गोवर्धन पूजन का किया वर्णन

  • भगवान की भक्ति के लिए भक्तों में शरणागत भाव होना आवश्यक : भागवत भूषण पंडित अरविंद व्यास

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सीहोर। भगवान की भक्ति के लिए भक्तों के अंदर शरणागत भाव होना आवश्यक है। जब भक्त पूर्ण श्रद्धा और समर्पण के साथ भगवान की शरण में जाता है, तभी उसे प्रभु के श्रीचरणों में स्थान प्राप्त होता है। जीवन की सफलता का मुख्य उद्देश्य भी भगवान की भक्ति और उनके चरणों में समर्पण ही होना चाहिए। उक्त विचार शहर के बस स्टैंड स्थित गीता मानस भवन में जारी सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दौरान भागवत भूषण पंडित अरविंद व्यास ने व्यक्त किए। कथा के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं के साथ गोवर्धन लीला का विस्तार से वर्णन किया गया। इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गिरिराज गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर धारण करने की मनोहारी झांकी सजाई गई। झांकी के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो गए और कथा के दौरान प्रस्तुत भजनों पर देर तक नृत्य करते रहे।


इंद्र का अहंकार दूर करने भगवान ने कराई गोवर्धन पूजा

भागवत भूषण पं. अरविंद व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी लीलाओं के माध्यम से जहां कंस द्वारा भेजे गए विभिन्न राक्षसों का संहार किया, वहीं ब्रजवासियों को आनंद प्रदान किया। इंद्र को अपनी सत्ता और शक्ति पर अहंकार हो गया था। उसका गर्व दूर करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज मंडल में इंद्र की पूजा के स्थान पर गोवर्धन पूजा प्रारंभ कराई। इससे क्रोधित होकर इंद्र ने ब्रज मंडल में भारी वर्षा कराई। ब्रजवासियों को इससे बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और सात दिनों तक ब्रजवासियों की रक्षा की। सात दिन बाद इंद्र को अपनी भूल का एहसास हुआ और उनका अहंकार समाप्त हुआ।


पूतना वध सहित भगवान की बाल लीलाओं का वर्णन

कथा के पांचवें दिवस पंडित अरविंद व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में पूतना वध के प्रसंग का भी विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने बाल रूप में ही अनेक असुरों का संहार कर ब्रजवासियों को भयमुक्त किया। कथा के माध्यम से भगवान की विभिन्न लीलाओं और उनके आध्यात्मिक महत्व को श्रद्धालुओं के सामने रखा गया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं मनुष्य को जीवन में धर्म, भक्ति, विश्वास और समर्पण का संदेश देती हैं। भक्त को अपनी व्यस्त दिनचर्या में से समय निकालकर भगवान की आराधना और भजन करना चाहिए तथा प्रभु की भक्ति में कंजूसी नहीं करनी चाहिए।


बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किया कथा का श्रवण

कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु गीता मानस भवन पहुंचे और भगवान की कथा का श्रवण किया। यजमान केएन आचार्य, ईश्वर जोशी एवं देवेंद्र जोशी के परिवार ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिवस भगवान को छप्पन भोग अर्पित किया गया तथा श्रद्धालुओं को प्रसादी का वितरण किया गया। उन्होंने बताया कि आज भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी का विवाह महोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह की मनोहारी झांकी भी सजाई जाएगी। सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक बस स्टैंड के समीप स्थित गीता मानस भवन में किया जा रहा है।

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