- राज्य के युवा किसानों को मौसम पूर्वानुमान, डिजिटल उपकरणों एवं जलवायु-सहिष्णु कृषि तकनीकों का दिया गया प्रशिक्षण
भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभाग के प्रमुख डॉ. आशुतोष उपाध्याय ने मौसम आधारित कृषि नियोजन, जल संसाधनों के कुशल उपयोग तथा डिजिटल तकनीकों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए किसानों को मौसम संबंधी मोबाइल ऐप एवं वेबसाइटों का नियमित उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को भारत मौसम विज्ञान विभाग की पूर्वानुमान एवं चेतावनी सेवाओं, कृषि मौसम परामर्श, समेकित कृषि प्रणाली, फसलों एवं कीट-रोगों पर मौसम के प्रभाव, मौसम आधारित फसल बीमा, जलवायु-अनुकूल सब्जी उत्पादन और पशुधन प्रबंधन सहित विभिन्न विषयों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम के अंतर्गत मोबाइल ऐप एवं वेबसाइटों के माध्यम से मौसम पूर्वानुमान, वर्षा की संभावना, तापमान में बदलाव और प्रतिकूल मौसम की चेतावनियां प्राप्त करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। किसानों को मौसम संबंधी जानकारी के आधार पर बुवाई, सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन एवं फसल कटाई की योजना बनाने के तरीके भी समझाए गए। प्रतिभागियों ने संस्थान के अनुसंधान प्रक्षेत्र का भ्रमण कर सौर ऊर्जा आधारित जल प्रबंधन, मौसम-स्मार्ट सिंचाई तकनीकों तथा प्रतिकूल मौसम में मत्स्य पालन प्रबंधन की जानकारी प्राप्त की। किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए प्रशिक्षण को उपयोगी बताया और कहा कि मौसम पूर्वानुमान के अनुरूप कृषि कार्यों की योजना बनाने से उन्हें बेहतर निर्णय लेने में सहायता मिलेगी। कार्यक्रम का संचालन पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. संजीव कुमार, प्रभागाध्यक्ष, फसल अनुसंधान, तथा डॉ. मनीषा टम्टा, वैज्ञानिक (कृषि मौसम विज्ञान) ने किया। पाठ्यक्रम के सह-निदेशक डॉ. अनिर्बान मुखर्जी, डॉ. ए.के. दूबे, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. पी.के. सुंदरम एवं डॉ. आर.के. रमण ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

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