नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को दिल्ली सरकार से राजधानी के सरकारी स्कूलों में पदोन्नति कोटे के तहत स्नातकोत्तर शिक्षक (पीजीटी) के ‘‘बड़ी संख्या’’ में खाली पदों के पीछे का कारण बताने को कहा। मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने इस मुद्दे पर अधिवक्ता राकेश कुमार सैनी की ओर से दायर जनहित याचिका पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा और राजधानी के सभी सरकारी स्कूलों में पीजीटी के रिक्त पदों की मौजूदा स्थिति रिकॉर्ड पर रखने को कहा। याचिकाकर्ता ने कहा कि केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के 2023 के उस आदेश के बावजूद कोई कदम नहीं उठाया गया, जिसमें अधिकारियों को पीजीटी के 2,000 रिक्त पद भरने का निर्देश दिया गया था तथा अब रिक्त पदों की संख्या बढ़कर 2,714 हो गई है। याचिका में कहा गया कि पीजीटी के 50 प्रतिशत पदोन्नति कोटे के तहत चार साल से कोई नियुक्ति नहीं की गई है, जिसका यहां के सरकारी स्कूलों में कक्षा 10 से 12 तक पढ़ने वाले लाखों छात्रों की शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। जनहित याचिका में अधिकारियों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पीजीटी के सभी पद तत्काल भरे जाएं तथा शिक्षा को और अधिक प्रभावित नहीं होने दिया जाए। मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी।
गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026
दिल्ली : सरकारी स्कूलों में पीजीटी के 2,714 पद खाली, उच्च न्यायालय ने सरकार से मांगा जवाब
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