बरखा शुक्ला सिंह दिल्ली कांग्रेस से छह साल के लिए निष्कासित

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नयी दिल्ली, 21 अप्रैल, दिल्ली महिला कांग्रेस की अध्यक्ष बरखा शुक्ला सिंह को दल विरोधी गतिविधियों के चलते पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है। बरखा शुक्ला सिंह ने कल प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन पर दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, उन्होंने कहा था कि वह पार्टी में बनी रहेंगी। उन्होंने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर भी कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुनने के आरोप लगाए थे। दिल्ली के तीनों निगमों के 23 अप्रैल को होने वाले चुनाव से पहले सुश्री सिंह के इस बयान को पार्टी विरोधी गतिविधि मानते हुए आज छह साल के लिए दल से निष्कासित कर दिया गया। दिल्ली कांग्रेस की चार सदस्यीय अनुशासन समिति की सुबह हुई बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करके सुश्री सिंह को निष्कासित करने का फैसला लिया गया। समिति में दिल्ली के पूर्व मंत्री नरेन्द्र नाथ, पूर्व प्रदेश महिला अध्यक्ष आभा चौधरी, महमूद जिया और सुरेन्द्र कुमार शामिल हैं। दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रहीं सुश्री सिंह ने कहा कि कांग्रेस की कथनी और करनी में अब बहुत फर्क है। एक साल से वह श्री गांधी से मिलने का प्रयास कर रही हैं लेकिन आज तक मुलाकात का समय नहीं मिला। कांग्रेस को अलग विचारधारा की पार्टी बताते हुए सुश्री सिंह ने कहा कि इसलिये वह कांग्रेस नहीं छोड़ेंगी। कांग्रेस नेतृत्व कमजोर है, इस बात को पार्टी का हर छोटा बड़ा नेता कहता है पर किसी की सामने आकर बोलने की हिम्मत नहीं है। गौरतलब है कि दिल्ली कांग्रेस के कद्दावर नेता और शीला सरकार में मंत्री रहे अरविंदर सिंह लवली ने भी मंगलवार को कांग्र्रेस नेतृत्व पर नगर निगम चुनावों में टिकटों की बिक्री का आरोप लगाते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया था और भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) में शामिल हो गये थे। सुश्री सिंह ने आरोप लगाया कि दिल्ली नगर निगम चुनावों के लिये महिलाओं को पर्याप्त संख्या में टिकट नहीं दिये गये। इसकी शिकायत श्री गांधी से भी की गयी थी लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गयी । उन्होंने कहा, “ बहुत दु:खी होकर मुझे यह कहना पड़ रहा है कि श्री गांधी और श्री माकन की अगुवाई में महिलाओं के अधिकार और सुरक्षा के मसले पर केवल वोट बटोरने के लिये बात की जाती है। श्री माकन ने न केवल मेरे साथ दुर्व्यवहार किया बल्कि महिला कांग्रेस की कई अन्य पदाधिकारियों के साथ भी ऐसा बर्ताव किया। यह बात जब श्री गांधी के संज्ञान में लायी गयी तो उन्होंने अनदेखी कर दी।”

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