चुनाव रद्द करने के पक्ष में है कांग्रेस, भाजपा चाहती है स्पष्टीकरण

  • मतदाताओं को रिश्वत दिए जाने की स्थिति में चुनाव रद्द करने के लिए आयोग को शक्ति दिए जाने के पक्ष में है कांग्रेस, भाजपा चाहती है स्पष्टीकरण

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नयी दिल्ली, 14 मई, वोट के बदले में रिश्वत देने के मामले में चुनाव रद्द करने की वैघानिक शक्ति दिए जाने के चुनाव आयोग के एक प्रस्ताव को विपक्षी कांग्रेस का समर्थन मिला है, लेकिन सत्तारूढ़ भाजपा ने कहा कि पहले सभी कानूनों में रिश्वत की एक समान परिभाषा की जरूरत है। गत शुक्रवार को यहां हुई सर्वदलीय बैठक में चुनाव आयोग ने अपने प्रस्ताव पर सभी पार्टियों से राय मांगी थी। इस प्रस्ताव के तहत चुनाव आयोग ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम में विशेष प्रावधान डालने की मांग की है ताकि मतदाताओं को रिश्वत देने की स्थिति में चुनाव आयोग को चुनाव रद्द करने समेत उचित कार्रवाई करने की शक्ति दी जा सके। संसद में मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने कहा कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने के पक्ष में है।


पार्टी नेता विवेक तन्खा ने कहा, ‘‘कांग्रेस लोकतंत्र की संस्थाओं को मजबूत बनाने के पक्ष में है। वैसे सभी कदम जो धन बल की समस्या से लड़ेंगे और उसे कम करेंगे, पार्टी उसका समर्थन करेगी।’’ पूर्व अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल तन्खा ने सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किया था। भाजपा महासचिव भूपेंद्र यादव ने कहा कि उनकी पार्टी एजेंडा सामग्री पर चुनाव आयोग को विस्तार से अपने रख की जानकारी देगी। उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, रिश्वत शब्द की परिभाषा सभी कानूनोंे में एकसमान होनी चाहिए। संसद पहले ही भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम में संशोधन के रूप में इस विषय पर विचार कर रही है।’’ यादव ने बैठक में भाजपा का प्रतिनिधित्व किया था। आयोग ने सरकार से जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में धारा 58 ए की तर्ज पर नयी धारा 58 बी जोड़ने को कहा है। धारा 58 ए चुनाव आयोग को मतदान केंद्र पर कब्जा किए जाने के आधार पर चुनाव को स्थगित करने या रद्द करने की शक्ति देती है। फिलहाल चुनाव आयोग मतदाताओं को बड़े पैमाने पर रिश्वत दिए जाने की स्थिति में चुनाव रद्द करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करता है। तमिलनाडु में आर के नगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव को हाल में इसी आधार पर रद्द किया गया था।
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