बिहार में शिक्षा की बदहाल स्थिति के लिए राज्य सरकार जिम्मेवार

  • छोटी मछलियों को निशाना बंद करे नीतीश सरकार.

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माले राज्य सचिव ने कहा कि बिहार में शिक्षा की बदहाल स्थिति के लिए पूरी तरह राज्य सरकार की गलत नीतियां जिम्मेवार है, लेकिन इस बदहाली के लिए वह छोटी मछलियों को दोषी बनाकर अपनी जिम्मेवारी से पल्ला झाड़ लेना चाहती है.  पहले टाॅपर्स और अब इंटर परीक्षा में हुई धांधली की मुख्य वजह शिक्षा के क्षेत्र में निजी पूंजी और वित्तरहित शिक्षा नीति को बढ़ावा देना है. वित्तरहित शिक्षा नीति को जारी रखते हुए नंबर के ंआधार पर जब से नीतीश सरकार ने वित्तरहित काॅलेजों व स्कूलों को सरकारी सहायता देने का कार्य आरंभ किया, तब से यह भ्रष्टाचार और संस्थागत हो गया है. ज्यादा सरकारी अनुदान के लालच में वित्तरहित काॅलेज गलत तरीके से टाॅपर बनाने का खेल खेलने लगे हैं. इसमें बड़े शिक्षा माफिया शामिल हैं और भाजपा, जदयू, राजद, कांग्रेस जैसी तमाम पार्टियों के बड़े नेताओं का उन्हें संरक्षण हासिल है. हमने हर बार मांग की है कि सरकार यदि बिहार में शिक्षा की स्थिति में सुधार चाहती है, तो उसे इन नीतियों को वापस लेना होगा और शिक्षा माफियाओं के राजनीतिक संरक्षकों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए. लेकिन व्यवहार में सरकार शिक्षकों को देाषी बनाकर अपनी जिम्मेवारी से मुक्त हो जाना चाहती है. कौन नहीं जानता, बिहार में जो हाल-फिलहाल में शिक्षकों की बहाली हुई है, उसमें घोर अनियमिता व भ्रष्टाचार रहा है. शिक्षकों से गैरशैक्षणिक कार्य ही ज्यादा कराए जाते हैं. उन्हें न तो सम्मानजक वेतन दिया जाता है और न ही उन्हें ठीक से ट्रेंड किया जाता है. ऐसी स्थिति में बिहार में शिक्षा सुधार की हर बात बेमानी है. उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि सरकार अपने ही द्वारा गठित मुचकूंद दूबे आयोग की सिफारिशों को लागू करे और स्कूलों में शिक्षक व छात्र के अनुपात को ठीक करे. बिहार के किसी भी विद्यालय में तय मानकों के अनुसार शिक्षक व छात्र का अनुपात काम नहीं कर रहा है. साथ ही, सामाजिक न्याय, बराबरी तथा सब के लिए समान अवसर पैदा करने के लिए निजी विद्यालयों व शिक्षा में निजी पूंजी पर कठोर रोक लगाते हुए समान स्कूल प्रणाली सिस्टम को लागू करने का कार्य करे.

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