दुमका : करोड़पति हों या निर्धन, भुट्टा खाए बिना बाबा की नगरी से आगे नहीं बढ़ते बम

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दुमका (अमरेन्द्र सुमन) पवित्र श्रावणी मास में जहाँ एक ओर केसरिया रंग से पूरा बासुकीनाथ धाम पटा हुआ है, उत्साह व उमंग से प्रतिदिन हजारों डाकबम सहित बोलबम श्रद्धालु फौजदारी बाबा वासुकिनाथ के दरबार में जलार्पण कर दण्डवत अपनी आस्था की झोली में कुछ पाने की इच्छा रख रहे हैं वहीं दूसरी ओर दूर-दूर से थके-मांदे कांवरियों को विश्राम की अवस्था में भुट्टों का सेवन करते हुए देखा जा रहा है। चाहे करोड़पति हो या फिर खाकपति बाबा की नगरी में सब एक बराबर हैं। भीषण गर्मी व  उमस चरम पर होेने के बाद भी आस्था की नगरी में हर एक का चेहरा खिला हुआ दिखाई पड़ता है। कोई असम से बाबा की नगरी में पहुँचा हुआ है तो कोई महाराष्ट्र, गुजरात से। कोई यूपी से है तो कोई बिहार, झारखण्ड, बंगाल से। विभिन्न राज्यों से लोगों का जनसैलाव तो मौजूद है ही, नेपाल, भूटान, श्रीलंका व अन्य देशों से भी श्रद्धालु कांवरियों को छिटपुट रुपों में देखा जा रहा है। दीवानी अदालत से लोग सीधे फौजदारी बाबा के दरबार में शरण ले रहे हैं। गजब की भक्ति है, भक्ति में शक्ति है और फिर इसी दरबार में मुक्ति भी है। जिसे जो चाहिए सब मिल जाऐगा, आपकी आस्था आपको परिणाम दिलाऐगी। असीम श्रद्धा की मिसाल देखने को मिल रही है  बाबा बासुकीनाथ की नगरी में। 107 किमी की लम्बी यात्रा के बाद लोग फौजदारी बाबा के दरबार में पहुँच रहे हैं। बाबा पर जलार्पण के बाद ही श्रद्धालुओं को भूख-प्यास का अहसास होता है, इससे पहले इनमें एक जुनून होता है जलार्पण का। सड़क किनारे फूटपाथ पर तपती दुपहरी में भी स्थानीय महिलाएं शिवभक्तों को ताजा भुट्टा (मकई का बाली) खिलाने के लिए तत्पर दिखती हैं। तीखी धूप में सूर्य की किरणें झेलती  महिलाएँ हाथ पंखे से भुट्टों को सेंकती ताजा मकई खिलाने से नहीं चूक रहीं। 10 रुपये प्रति एक मकई से जितनी आमदनी इन्हें होनी चाहिए भले ही वैसा कुछ भी न हो तथापि भुट्टों को खिलाकर इनका अपना मन काफी आहलादित होता है। इनकी धीरता व सहनशक्ति तारीफे-काबिल है। लगातार 8-8 घंटे तक भीषण गर्मी को झेलती कोयले की तपती आंच में भुट्टा पका कर खिलाने का काम, कहीं से व्यवसाय का अंग नहीं प्रतीत होता बल्कि महिलाओं की ओर से श्रद्धालुओं को सप्रेम भेंट की तरह यह सेवा प्रतीत होता है। बासुकीनाथ प्रखण्ड के हटिया परिसर में रहनेवाली सुगनी देवी बताती हैं कि 55 वर्ष की आयु में भी उन्हें यह काम करने में आनंद आता है। सावन के महीने में जो श्रद्धालुओं की उपस्थिति से बासुकीनाथ धाम भगवा रंग में रंग जाता है तो उनके अंदर भी असीम ऊर्जा का संचार होता है। यही वजह है कि उमस भरी गर्मी को धता बताते हुए ये महिलाएँ बाबा के भक्तों की सेवा में लगी रहती हैं। कुशीनगर, देवरिया उत्तर प्रदेश के राजेश बम गर्मी में खिच्चा भुट्टा खाकर तृप्त थे। उनका कहना था कया लाजबाव भुटटा खिलाया है। इसी तरह अन्य प्रदेशों के लोग बाबा के इस प्रांगन में बिना भुट्टा खाए आगे नहीं बढ़ते। भुट्टा बेचनेवाली महिलाओं को शुभकामना देते हुए बोलबम का नारा लगाते हुए बम आगे बढ़ते रहते हैं। यही है बाबा की नगरी। बाबा के प्रति भक्तों की असीम श्रद्धा। आमोद-प्रमोद का वातावरण। 

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