साथ रहना काफी नहीं, केन्द्र से अधिक सहायता बिहार को मिले : नीतीश

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पटना 06 अगस्त, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज केन्द्र सरकार से राज्य के विभिन्न न्यायालयों में लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन के उद्देश्य से आधारभूत सुविधा बढ़ाये जाने के लिए अधिक से अधिक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराये जाने की मांग करते हुए कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के साथ उनका होना काफी नहीं है बल्कि इसका असर लोगों को भी दिखना चाहिए । श्री कुमार ने आज यहां विधि एवं न्याय मंत्रालय तथा बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से आयोजित ‘टेली लॉ : मेन स्ट्रीमिंग लीगल एड थ्रू कॉमन सर्विस सेंटर’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि केन्द्रीय विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने खुशी जाहिर की है कि यह कार्यक्रम ऐसे समय आयोजित किया जा रहा है जब ..हमलोग साथ हो गये है..। उन्होंने कहा कि सिर्फ साथ होना ही काफी नहीं है बल्कि इसका असर भी लोगों को दिखना चाहिए और इसलिए केन्द्र से बिहार की अदालतों में लंबित मामलों के निष्पादन के उद्देश्य से सुविधा विस्तार के लिए अधिक से अधिक सहायता मिलनी चाहिए । मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्रीय मंत्री श्री प्रसाद ने इसके लिए 50, 60 से 70 करोड़ रुपये की सहायता देने की बात कही है , लेकिन यह काफी नहीं है । उन्होंने कहा कि बिहार एक बड़ा राज्य है और यहां 38 जिले तथा 101 अनुमंडल हैं । उन्होंने कहा कि इतने बड़े राज्य के लिए श्री प्रसाद ने जो राशि देने का वादा किया है वह नाकाफी है । श्री कुमार ने कहा कि वह केन्द्र सरकार से पटना उच्च न्यायालय में आधारभूत सुविधा बढ़ाये जाने के लिए सहायता नहीं मांग रहे हैं बल्कि निचली अदालतों के लिए राशि की मांग कर रहे हैं । उन्होंने कहा कि पटना उच्च न्यायालय परिसर में अतिरिक्त भवनों के निर्माण और अन्य आधारभूत सुविधा उपलब्ध कराये जाने के लिए राज्य सरकार ने 169 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है । मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च न्यायालय में सुविधा विस्तार के लिए राज्य सरकार अपने संसाधन से खर्च करने में सक्षम है । उन्होंने कहा कि जब वह वर्ष 2005 में सत्ता में आये थे तब बिहार का बजट आकार 25 से 26 हजार करोड़ रुपये हुआ करता था जो अब बढ़कर एक लाख 40 हजार करोड़ रुपये हो गया है । श्री कुमार ने कहा कि यह खुशी की बात है कि बिहार में आज से पांच सौ कॉमन सर्विस सेंटर के जरिये लोगों को विधिक सहायता पहुंचाने की सेवा शुरु की गयी है । उन्होंने कहा कि इस संख्या को जल्द से जल्द और बढ़ाया जाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक लोगों को आसानी से विधिक सहायता उपलब्ध करायी जा सके । 


मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा इस कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं , यह उनके लिए खुशी की बात है क्योंकि वह जल्द ही उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बनने वाले हैं । बिहार के लिए यह गौरव की बात है कि न्यायमूर्ति श्री मिश्रा पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं । उन्होंने कहा कि बिहार के राज्यपाल रहे श्री रामनाथ कोविंद भी अब देश के राष्ट्रपति हैं , यह भी गौरव की बात है । श्री कुमार ने कहा कि लोगों को तय समय सीमा के अंदर चुनिंदा सेवा दिये जाने के उद्देश्य से वर्ष 2010 में लोक सेवा अधिकार की शुरुआत की गयी थी जिसके तहत आवासीय, जाति, चरित्र प्रमाणपत्र कराने समेत अन्य सेवाएं भी दी जा रही है । उन्होंने कहा कि इसी प्रकार लोक शिकायत निवारण अधिकार कानून भी लागू किया गया जिसके तहत निर्धारित समय सीमा के अंदर लोगों की शिकायतों का निवारण किया जा रहा है । मुख्यमंत्री ने कहा कि एक अध्ययन कराये जाने पर यह बात सामने आयी है कि शिकायत निवारण केन्द्र में करीब 60 प्रतिशत मामले भूमि विवाद से संबंधित आ रहे हैं । उन्होंने कहा कि भूमि विवाद तनाव और हिंसा का एक प्रमुख कारण है और इसे समाप्त करने का ठोस प्रयास किया जा रहा है । इसके लिए भूमि सर्वेक्षण का कार्य कराया जा रहा है जो अब अंतिम चरण में है और इसके पूरा होने पर काफी हद तक भूमि विवाद समाप्त हो जायेगा । उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पैरा लीगल वॉलंटियर की लोगों को विधिक सेवा पहुंचाने में अहम भूमिका है और उन्हें अपनी जिम्मेवारी का निर्वहन सही तरीके से करना चाहिए । उन्होंने कहा कि उनके लिए दैनिक भत्ता 250 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया गया है ताकि वे उत्साहित होकर बेहतर कार्य कर सकें । इससे पूर्व विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि केन्द्र सरकार बिहार को विभिन्न अदालतों में लंबित मामलों के निष्पादन के उद्देश्य से बेहतर आधारभूत सुविधा उपलब्ध कराये जाने के लिए 50,60 से 70 करोड़ रुपये उपलब्ध करायेगी । उन्होंने कहा कि लोगों को विधिक सेवा उपलब्ध कराने के लिए उत्तर प्रदेश में छह जून को कॉमन सर्विस सेंटर की शुरुआत की गयी थी और अब इसका शुभारंभ बिहार में किया जा रहा है । श्री प्रसाद ने कहा कि पटना उच्च न्यायालय में एक लाख 34 हजार 469 मामले लंबित हैं जिनमें आठ हजार 294 मामले दस साल पुराने हैं । इसी प्रकार बिहार की निचली अदालतों में 21 लाख 28 हजार 335 मामले लंबित हैं जिनमें दो लाख सात हजार 916 मामले दस वर्ष पुराने हैं । इस मौके पर उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी , पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश आर.एस. मेनन , न्यायमूर्ति ए.के.त्रिपाठी और रविरंजन ने भी अपने विचार व्यक्त किये । समारोह में पटना उच्च न्यायालय के कई न्यायाधीश , महाधिवक्ता ललित किशोर के अलावा अधिवक्ता वाईसी वर्मा , एसडी संजय , प्रशांत प्रताप और अंजनी शरण के अलावा कई वकील मौजूद थे ।

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