बिहार : विधानसभा में सृजन घोटाले को लेकर विपक्ष का हंगामा

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पटना 25 अगस्त, बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के आखिरी दिन भी आज विपक्ष के तेवर में कोई नरमी नहीं आयी और सृजन घोटाले को लेकर जोरदार हंगामे के कारण सभा की कार्यवाही भोजनावकाश से पूर्व मात्र 14 मिनट ही चल सकी । विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही राष्ट्रीय जनता दल(राजद) के ललित यादव और कांग्रेस के अब्दुर्र रहमान ने सृजन घोटाला के मामले में कुछ कहने की कोशिश की लेकिन सभाध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी । इसी दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी कुछ कहने के लिए खड़े हो गये । सभाध्यक्ष की इजाजत मिलने के बाद श्री यादव ने कहा कि सृजन घोटाला मध्यप्रदेश के व्यापम घोटाले से भी बड़ा घोटाला दिख रहा है । इस घोटाले से जुड़े आरोपियों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है । श्री यादव ने कहा कि आरोपी महेश मंडल की मौत के बाद एक अन्य मुख्य आरोपी नवीन की भी मौत हो गयी है जो सृजन की संस्थापिका मनोरमा देवी का बेहद करीबी था। उन्होंने कहा कि सदन में इस मामले पर तुरंत चर्चा होनी चाहिए इसलिए इस संबंध में दिये गये कार्यस्थगन प्रस्ताव को मंजूर किया गया । इसपर सभाध्यक्ष श्री चौधरी ने कहा कि इस विषय को सही समय पर उठायें और अभी प्रश्नकाल होने दें । सभाध्यक्ष के इस आग्रह का विपक्ष पर कोई असर नहीं हुआ और विपक्षी सदस्य शोरगुल तथा नारेबाजी करते हुए सदन के बीच में आ गये । हंगामे के बीच संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि सृजन घोटाले का मामला 2003 का हीं है और जब सरकार को इसकी जानकारी मिली तुरंत ही मामले की केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की सिफारिश कर दी गयी । श्री कुमार ने कहा कि किसी भी विषय को कार्य संचालन नियमावली के तहत ही सदन में उठाया जा सकता है। सरकार हर मुद्दे पर सदन में चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में जब सरकार इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार थी तब विपक्ष इसके लिए तैयार नहीं हुआ। विपक्ष का मकसद सिर्फ हंगामा खड़ा करना है चर्चा नहीं। इसके बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी नोंक-झोंक हुई । सभाध्यक्ष ने सदस्यों से शांत होकर अपनी सीट पर आने का आग्रह किया लेकिन सदस्य नहीं मानें। सदन को अव्यवस्थित देख सभाध्यक्ष ने सभा की कार्यवाही करीब चार मिनट बाद ही 12 बजे दिन तक के लिए स्थगित कर दी। 


सभा की कार्यवाही जब दोबारा 12 बजे शुरू हुई तब एक बार फिर कांग्रेस के विजय शंकर दूबे और अब्दुर्र रहमान फिर से खड़े हो गये । इसपर सभाध्यक्ष ने उन्हें शांत कराकर बैठाया और उसके बाद श्री अब्दुलबारी सिद्दिकी, ललित यादव, कांग्रेस के मोहम्मद जावेद और भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी लेनिनवादी के महबूब आलम की ओर से दिये गये कार्यस्थगन प्रस्ताव को नियमानुकूल नहीं होने के कारण अमान्य कर दिया । इसके बाद एक बार फिर कांग्रेस के विजय शंकर दूबे कुछ कहने के लिए खड़े हुए तब संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार ने इसपर आपत्ति जताते हुए कहा कि कार्यस्थगन प्रस्ताव पर उनका हस्ताक्षर भी नहीं है । नियमानुकूल तरीके से किसी भी विषय को सदन में उठायें सरकार उसका जवाब देगी । इसी दौरान सत्तापक्ष के सदस्य अपनी सीट से ‘चोर मचाये शोर’ तथा विपक्ष के सदस्य ‘खजाना चोर गद्दी छोड़’ के नारे लगाने लगे । शोरगुल के बीच ही राजद के श्री सिद्दिकी ने कहा कि विपक्ष की ओर से कोशिश है कि सदन सामान्य ढंग से चले लेकिन सत्तापक्ष का व्यवहार इसी तरीके का रहा तो एक भी मंत्री सदन में नहीं बोल पायेंगे। संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार ने इसपर आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल नहीं करें । सदन धमकी से नहीं बल्कि नियमावली से चलेगा । इसके बाद विपक्ष के सदस्य फिर से सदन के बीच में आ गये और शोरगुल तथा नारेबाजी करने लगे । शोरगुल के बीच ही वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने वित्तीय वर्ष 2016-17 का उपलब्धि प्रतिवेदन तथा वित्तीय वर्ष 2016-17 के बजट प्राक्कलन के संदर्भ में चतुर्थ तिमाही के प्राप्ति एवं व्यय का रूझान संबंधी परिणाम प्रतिवेदन की प्रति सदन पटल पर रखा । इसके साथ ही कुछ अन्य विधायी कार्य निपटाये गये । इसी दौरान विपक्ष के सदस्य नारेबाजी करते हुए सदन से बहिर्गमन कर गये । बाद में श्री मोदी ने कहा कि विपक्ष के सदस्यों ने सदन में मुख्यमंत्री और उन्हें गालियां दी है उसे कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए । इसपर सभाध्यक्ष ने कहा कि सदन में पहले भी यदि किसी तरह की अपमानजनक या असंसदीय टिप्पणी किसी ने की है तो उसे कार्यवाही से निकाल दिया जाता है । यह एक सामान्य शिष्टाचार है। 

श्री मोदी ने कहा कि यहां चोर मचाये शोर वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। जो लोग भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हैं वही उनपर आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सृजन महिला विकास सहयोग समिति को संरक्षण और प्रश्रय 2000 से ही दिया जा रहा है। इस संस्था को कार्यालय के लिए वर्ष 2000 में हीं ट्राइसेम भवन 30 साल के लिए लीज पर दिया गया । इतना ही नहीं सरकारी राशि को उसके खाते में जमा करने का आदेश भी वर्ष 2000 और वर्ष 2004 के बीच दिया गया । उस समय राज्य में किसकी सरकार थी यह बताने की जरूरत नहीं है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जैसे ही घोटाले की जानकारी मिली उन्होंने तुरंत हेलीकॉप्टर से आर्थिक अपराध ईकाई की टीम को जांच के लिए भागलपुर भेजा । विपक्ष ने मामले की केन्द्रीय जांच ब्यूरो से जांच कराने की मांग की तब मुख्यमंत्री ने तुरंत मामले को सीबीआई को सौंपने का आदेश दे दिया । उन्होंने कहा कि अब मामले की जांच सीबीआई करेगी और यदि किसी के पास कोई सबूत है तो वह उसे सीबीआई को दे । श्री मोदी ने कहा कि दुख की बात है कि विपक्ष ने बाढ़ के मामले को लेकर सदन में चर्चा होने दिया । कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में जब सृजन मामले पर चर्चा कराने के लिए सरकार तैयार थी तब विपक्ष बहस से भाग गया। उन्होंने कहा कि विपक्ष किसी भी मुद्दे पर चर्चा नहीं सिर्फ हंगामा करना चाहता है। इसके बाद सभाध्यक्ष ने 12 बजकर 10 मिनट पर सभा की कार्यवाही भोजनावकाश के लिए दो बजे दिन तक स्थगित कर दी। 

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