पटेल के पक्ष में दिग्गी की वाघेला से वोट डालने की अपील नाकाम रही

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नयी दिल्ली, 08 अगस्त, कांग्रेस के महासचिव और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की गुजरात में पार्टी के बगावती नेता शंकर सिंह वाघेला से “ राजपूत भाई ” की अपील कर राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार अहमद पटेल को वोट देने की अपील काम नहीं आई। वाघेला ने मतदान करने के बाद कहा कि उन्होंने श्री पटेल को वोट नहीं दिया है। श्री सिंह ने राज्यसभा की गुजरात से तीन सीटों के लिये होने वाले मतदान से ठीक पहले आज सुबह तीन ट्वीट किये। उन्होंने वाघेला से पार्टी और भाईचारे की लाइन से आगे जाकर भी जाति की लाइन पर अपना वोट श्री पटेल को देने की अपील की थी। श्री सिंह ने ट्वीट में कहा कि मेरी आप से एक व्यक्ति और भाई के तौर पर अपील है। उन्होंने इस ट्वीट में श्री वाघेला से खजुराहो की कोई घटना भी याद दिलाने की बात कही है। श्री सिंह स्वयं राजपूत है और उन्होंने श्री पटेल के पक्ष में मतदान करने के लिये श्री वाघेला को उनकी जाति (राजपूत) का भी स्मरण कराया। दूसरे ट्वीट में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने लिखा “ यह मत भूलिये कि कांग्रेस ने आपके लिये क्या किया है, आप राजपूत हैं, कृपया अहमद भाई की जीत सुनिश्चित करें, वह हमारे मित्र और समर्थक रहे हैं। ” तीसरे ट्वीट में श्री सिंह ने श्री वाघेला को उनके पुराने शिष्य की भी याद दिलायी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने लिखा है कि कांग्रेस के साथ श्री वाघेला जी आपके जो भी मुद्दे है उनका समाधान पार्टी के अंदर कर लिया जायेगा। धोखा मत दीजिये और ना ही अपने पुराने चेला को सपोर्ट कीजिये जो पूरे देश को अपने हिसाब से हांके जा रहा है। तीसरे ट्वीट में श्री सिंह का इशारा संभवत: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरफ है। कांग्रेस महासचिव की इस अपील के बावजूद श्री वाघेला ने वोट डालने के बाद कहा कि उन्होंने श्री पटेल को वोट नहीं दिया है। श्री वाघेला ने कहा कि कांग्रेस को विश्वास नहीं था। अहमद पटेल की साख से पार्टी को मजाक नहीं करना चाहिये था। राज्यसभा की गुजरात से तीन सीटों के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष अमित शाह, सूचना और प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी और कांग्रेस छोड़ने वाले विधायक बलवंत सिंह राजपूत उम्मीदवार हैं। चुनाव से पहले कांग्रेस में खासी उठापटक हुई है। श्री वाघेला ने विपक्ष के नेता पद से इस्तीफा दे दिया। इसके अलावा पार्टी के छह और विधायकों ने इस्तीफा दिया। पार्टी में और टूट से बचने के लिये कांग्रेस अपने 44 विधायकों को बेंगलुरू के रिसार्ट में ले गयी थी और रविवार को ही उन्हें वापस गुजरात लाया गया था। 

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