ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत सरकार को स्वीकार नहीं

  • पेश कर दी गंदगी और पानी को खलनायक के रूप में
  • मुख्य सचिव के नेतृत्व में उच्चस्तरीय जांच कमिटी गठित

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गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के सीएम है आदित्यनाथ योगी. इनका संसदीय क्षेत्र है गोरखपुर.सीएम बन जाने के बाद भी संसदीय क्षेत्र का विशेष ख्याल रख रहे हैं. 9 अगस्त को बाबा रामदास मेडिकल कॉलेज गये थे. बच्चों के वार्ड में भी गये थे. इंसेफेलाइटिस विभाग के विगाध्यक्ष से मिले थेे. मौके पर किसी ने किसी तरह की शिकायत दर्ज नहीं किये. इस  बीच पता चला कि किसी को जानकारी दिये ही बीआरडी कॉलेज के प्रिंसिपल चले गये. उसी समय प्रिंसिपल को निलम्बित कर विभागीय कार्यवाही शुरू कर दी गयी. गोरखपुर कांड का ठीकरा बीआरडी के प्रिंसिपल राजीव मिश्रा पर फोड़ दिया गया. उनका कहना है कि नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे दिया है. इस बीच उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ साथ सिंह ने गोरखपुर कांड पर सफाई देते हुए कहा कि बाबा रामदास मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमीं की वजह से 63 बच्चों की मौत नहीं हुई है बल्कि हर साल अगस्त महीनें में इस अस्पताल में इंसेफेलाइटिस बीमारी की वजह से 500-600 बच्चों की मौत होती हैं ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें बहुत गंभीर हालत में लाया जाता है.


उन्होंने बताया कि इंसेफेलाइटिस बीमारी की वजह से इस मेडिकल कॉलेज में उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार और नेपाल के भी बच्चे आते हैं और सभी लास्ट स्टेज पर आते हैं. उन्होंने बताया कि जब 10 अगस्त को लिक्विड ऑक्सीजन कम हो गयी तो ऑक्सीजन सिलेंडर लगाकर काम चलाया गया और अभी भी ऐसे ही काम चलाया जा रहा है. उन्होंने बताया कि हर वर्ष अगस्त महीनें में अधिक बच्चों की मौत होती है, अगस्त 2014 में 587 बच्चों की मौत हुई, अगस्त 2015 में 680 बच्चों की मौत हुई, अगस्त 2016 में 587 बच्चों की मौत हुई. यह मौतें गंभीर हालत की वजह से हुई हैं, ऑक्सीजन की कमीं की वजह से एक भी मौत नहीं हुई. उन्होंने बताया कि हॉस्पिटल में हर दिन करीब 17-18 मौतें होती हैं क्योंकि लोग लास्ट स्टेज पर अपने बच्चों को लाते हैं.

बता दें कि 7 अगस्त को 9 बच्चों की मौत हुई, 8 अगस्त को 12 बच्चों की मौत हुई, 9 अगस्त को 9 बच्चों की मौत हुई और 10 अगस्त को 23 बच्चों की मौत हुई. मीडिया ने 7, 8, 9 अगस्त को बच्चों की मौत के बारे में कोई खबर नहीं छापी लेकिन 10 अगस्त को उन्होंने सभी मौतों को जोड़कर बड़ी खबर बना दी जिसकी वजह से देश के लोगों का इस पर ध्यान चला गया और योगी सरकार को बदनाम करने की कोशिश की गयी. मीडिया का एक तबका पैसे के लिए कुछ भी करने को तैयार है. इन्हें सिर्फ बड़ी खबर चाहिए.अखिलेश के समय में अगस्त में ही 600-700 मौतें होती थीं , अगर रोजाना का औसत निकालें तो 20 मौतें रोज होती थीं लेकिन मीडिया ने कभी भी बड़ी खबर नहीं बनाई  लेकिन योगी सरकार में एक दिन में 23 मौतें हुईं तो चार दिन की मौतों को एक साथ जोड़कर बड़ी संख्या दिखाकर बड़ी खबर बना दी गयी ताकि विपक्ष को योगी सरकार के खिलाफ मुद्दा मिल जाए.

स्वास्थ्य मंत्री ने यहां तक कह दिये कि मीडिया सच में इतना गया गुजरा है कि मौत को भी बेचता है अपनी टी आर पी जो बढ़ानी है इतने सेन्सटिव मुख्य मंत्री को भी एंकर कितना भला बुरा कहने से बाज नहीं आते, क्योकि अच्छे आदमी देखर मिर्चे जो लग जाती है। बानगी देखिये कोई 59 लाख, कोई 70 लाख,कोई 64 लाख बकाया बता रहा है ऑक्सीजन सप्लायर के। जैसे मिडिया वसूल करवाएगा।लगता है स्पायर ने ही खबर बनवाई है। ऑक्सीजन ऑक्सीजन चिल्लाने लगे एंकर अपनी सीमा भूल कर कुछ भी भोकने लगे जैसे मानक गुप्ता रुबिका इटियादि । ऑक्सीजन खाली सहायक होती है साँस लेने में, दवा नहीं वरना अब तो ऑक्सीजन है अब क्यों मर रहे बच्चे और बड़े, जरा देखो रोज हजारो मरते है अस्पतालों इस 103 करोड़ के देश में। वे एंकर या चैनल देश के दुश्मन है जो खबर को अति रंजित रूप में दिखाते है क्योंकि सामान्य आदमी इस झूठ को पकड़ नहीं पाता और देश में आग लग जाती है।


यहां के लोगों का कहना है कि हमलोगों ने खबर कर दी थी कि केवल 10 अगस्त तक ही ऑक्सीजन है. मीनू वालिया ने कहा कि पुष्पा सेल्स ऑक्सीजन के बकायी राशि नहीं दी जा रही थी.ऑक्सीजन देना बंद कर दिया गया.छोटे से लेकर चिकित्सकों को मालूम था. इस आफत को देखकर डा. क़फील खान ने पॉकेट से नोट निकालकर चालक को देकर ऑक्सीजन मंगवाया.उसी तरह पहले ऑक्सीजन आपूर्ति करने वाले प्रवीण मोदी को जानकारी मिली तो मरते बच्चों के लिये ऑक्सीजन भिजवा दिये. इस बीच कैंडल मार्च किया गया. प्ले कार्ड में लिखा कि यूपी में केवल गाय सुरक्षित है.
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