विशेष : चोटी काट लेने की घटनाओं के रहस्य से अभी तक पर्दा नहीं उठ पाने का माजरा क्या है ?

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13 अगस्त (दिन रविवार) 2017 की रात दुमका (झारखण्ड) के रामगढ़ प्रखण्ड के सिंदूरिया गाँव में 68 वर्षीय कौशल्या देवी ने अपने माथे पर कुछ बैठने का आभाष प्राप्त किया। जैसे ही उसने सर पर हाथ रखा, कुछ बाल उसके हाथ में आ गए। पति को उसने इसकी जानकारी दी। पति ने पत्नी के माथे पर हाथ रखा तो देखा एक बड़ा सा कीड़ा बैठा हुआ है। इसी प्रखंड के भालसुमर के डेलीपाथर गाँव की 55 वर्षीय जदिया मसोमात के भी बाल काट लिए गए। बाल कटने के बाद दो घंटे तक वह बेहोश रही। जामा प्रखण्ड के ग्राम मसुआचक (पंचायत पलासी) में ग्यांति देवी नाम की महिला घर के बाहर सफाई कर रही थी। इसी बीच किसी ने उसकी चोटी काट ली। चोटी कटने से चक्कर खाकर वह गिर पड़ी। परिजन दौड़ कर उसके करीब पहुँचे। महिला बेसुध पड़ी थी। महिला की कटी चोटी कुछ दूर पर पड़ी मिली। बिना देर किये परिजनों ने महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, जामा पहुँचाकर इलाज प्रारंभ करवाया। अपने दो जुड़वां बच्चों के साथ शिकारीपाड़ा (दुमका) की समाप्ति साहा 18 अगस्त 2017 की दोपहर दो मंजिले मकान की उपरी तल पर सोई हूुई थी। घर के अन्य सदस्य मिठाई दूकान में थे। जुड़वां बच्चों के दादा बनमाली साहा स्कूल से अपने बड़े पोते को लेकर घर लौटे तो बड़े भाई ने अपने दोनों जुड़वां भाईयों रिबू साहा व ऋषि साहा की खोजबीन शुरु कर दी। बिस्तर पर पड़ी माँ को भी उसने उठाने का प्रयास किया, माँ नहीं उठी तो बेटे ने शोर मचाकर घर के अन्य सदस्यों को बुलाया। सारे सदस्य हांफते हुए छत पर पहुँचे। बिस्तर पर महिला बेहोश पड़ी थी। उसके दोनों बच्चे सामने से गायब थे। महिला के बाल भी कटे थे। परिवार के सदस्यों ने जुड़वां बच्चों की तलाश शुरु कर दी। घरवालों ने कुँए में गिरे बच्चों को देखा। दिल से कलेजा ही निकल गया। आनन-फानन मंें बच्चों को सामुदायिक अस्पताल पहुँचाया गया। दोनों बच्चे मृत पाए गए। यह दिगर बात है कि महिला की चोटी भी कटी पायी गई। महिला समाप्ति साहा का इलाज करवाया गया। जुड़वां बच्चों की हत्या की शंका पर जब पुलिस ने तफसीस से महिला से पूछताछ प्रारंभ की तो सारी बातें उसने स्वीकार करते हुए खुद को दोषी ठहराया। उसने कहा उसी ने बच्चों को कुँए में डाल कर उनकी हत्या की। जुड़वा बच्चों के अपशकुन की बात पर कुछ गलत संगत में वह पड़ चुकी थी। विकृत मनोदशा वाली माँ ने एक ही साथ दो जुड़वां बच्चों की इहलीला समाप्त कर डाली। महिला ने यह भी स्वीकार किया कि अपनी चोटी उसने खुद ही काट रखी थी जिसे एक थैले में डालकर उसे एक कोने में छुपाकर रख दिया था। इससे चोटीकटवा गिरोह की शंका पर वह गिरफतार होने से वह बच जाएगी। इसी दिन जरमुण्डी प्रखण्ड (पंचायत कुशमाहा चिकनिया) के मझडीहा ग्राम में 40 वर्षीय रेखा देवी शाम के वक्त बकरी को पानी पिला रही थी। इसी क्रम में अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। किसी तरह घर पहुँचने के बाद खाट पर लेटते ही वह बेहोश हो गई। पति गोविन्द राय के अनुसार पत्नी रेखा देवी के सर, पीठ व हाथ-पैरों में जब अन्य के साथ उसने तेल मालिश शुरु की तो  उसके माथे से कुछ बाल कटे हुए मिले। बेहोश महिला को आनन-फानन में जरमुण्डी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में इलाज के लिये उसे ले जाया गया। दिन शनिवार (19 अगस्त 2017) की सुबह 6-6ः30 बजे के आसपास दुधानी (दुमका) की 45 वर्षीय महिला मीना देवी की चोटी काट ली गई। सुबह-सुबह वह अपने घर के आंगन में थी कि तभी अचानक बेसुध हो गई। इसी दरम्यान उसकी चोटी काट ली गई। इससे पहले गोड्डा में भी इसी तरह की एक घटना घटी। चोटी काटने की छः वारदातें अब तक दुमका में घट चुकी हैं। पुलिस इंस्पेक्टर सह थाना प्रभारी, दुमका टाउन मनोज कुमार ठाकुर ने कहा विकृत मानसिकता वाली महिलाओं द्वारा ही ऐसे कार्य किये जाते हैं। शिकारीपाड़ा की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा सात माह के दो जुड़वा बच्चों को कुँए में डूबोकर मारने के बाद महिला द्वारा अपनी चोटी खुद ही काट कर व उसे एक थैले में छुपाकर रख दिया जाना यह दर्शाता है कि अपराध करने के बाद चोटीकटवा के रहस्यों में उलझ कर पुलिस वास्तविक कांड के अनुसंधान से डायवर्ट हो जाएगी। कई मनोचिकित्सकों ने ऐसी घटनाओं के पीछे महिलाओं की खुद की साजिश को ही आधार बनाया है। 


राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित यूपी, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, बिहार और अब झारखंड में ऐसी घटनाएँ आम हो चुकी हैं। अब तक यह ज्ञात नहीं हो पाया है कि इन घटनाओं के पीछे कौन सा रहस्य काम कर रहा है। किसी आपराधिक गिरोह हाथ है या फिर अंधविश्वास के वशीभूत हो खुद महिलाएँ ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रही हैं। छोटी-छोटी बच्चियों, स्कूली छात्राओं, शादीशुदा महिलाओं व वृद्ध माताओं की चोटियों के कटने की घटनाओं से पूरा देश इन दिनांे भयाक्रान्त है। देश के अलग-अलग प्रांतों में प्रतिदिन किसी न किसी क्षेत्र से महिलाओं, बच्चियों की चोटी कटने की घटनाएँ सामने आ रही हैं। चोटी काटने वाला कब, कहाँ और किस रुप में चोटी काट डालेगा कहना मुश्किल है। किसकी चोटी दिन में काटी जाऐगी, किसकी रात में इसका भी कोई आभाष नहीं। चोटी कटवा गिरोह मंे पुरुष हंै या फिर महिलायें, इसका जबाव किसी के पास नहीं। रात में खाना पकाते वक्त किसी की चोटी काट ली जाती है तो कभी गहरी नींद में सोई अवस्था में। घर की साफ-सफाई के वक्त किसी की चोटी कटी पायी जाती है तो किसी की चोटी पालतु जानवरों को चारा-पानी देते वक्त। माॅर्निंग वाक की तैयारी के समय कहीं चोटी काट लेने की घटना घटती है तो तो कहीं दोपहर में आराम करते वक्त। महानगरों से लेकर कस्बाई क्षेत्रों तक यह घटना इतनी तेजी से फैल चुकी है कि प्रत्येक घरों में बुजुर्ग महिलाएँ, बहु-बेटियाँ खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। चोटी कटने के पीछे तमाम जगहों से एक सामान्य बात यह सामने आ रही है कि चोटी कटते वक्त या चोटी कटने के तुरंत बाद महिलाएँ घंटा-दो घंटा तक बेसुध पड़ी रहती हैं। उन्हें होश नहीं रहता। वे यह नहीं समझ पा रहीं कि उनकी चोटी कौन काट जाता है ? कुछ महिलाओं ने आपबीती में यह जरुर जिक्र किया है कि तेजी से कोई साया उनके पीछे से गुजरता है। इसके बाद उनकी चोटी कटी मिलती है। यह किसी चोटीकटवा गिरोह का हाथ है या फिर अपराधी प्रवृत्ति के लोगांे का ? माथे पर किसी कीड़े बैठने से इस तरह की धटनाएँ सामने आ रही हैं या फिर अंधविश्वास में महिलाएँ खुद अपनी चोटी काट जाती हैं, वर्तमान परिप्रेक्ष्य में यह एक यक्ष प्रश्न बनकर रह गया है। हालाॅकि पुलिस व प्रशासन के लोग एक साजिश के तहत किया जा रहा अपराध इसे मानते हैं। वास्तविकता यह है कि लोग अभी तक इसकी तह तक पहुँचने में असफल रहे हैं। इस संबंध में किसी को कोई स्पष्ट जानकारी नहीं। ऐसी घटनाओं से महिलाओं के बीच दहशत का माहौल तो व्याप्त है ही, घर के पुरुषों की रात की नींदें भी उड़ चुकी हैं। दिल्ली के बाटला हाउस में एक 17 वर्षीय लड़की की चोटी काट डाली गईं। 

दिल्ली के द्वारका पुलिस काॅलोनी में पुलिस इन्स्पेक्टर जयनारायण की पत्नी अनिता की चोटी काट डाली गई। बेगमपुर (रोहिणी) दिल्ली की अनिता यादव व गुड्डी इसी घटना की शिकार हुई। रसोई घर मंे सुनीता रात को दूध गर्म कर रही थी कि अचानक वह बेसुध हो गिर पड़ी। होश आया तो उसकी चोटी कटी पायी गई। तलवंडी साबोर (भटिंडा) पंजाब में करमजीत कौर की चोटी काट ली गई। यूपी के बरेली मंडल के चार अलग-अलग जिलों में महिलाओं की चोटी काट लेने की घटनाएँ तेजी से फैली। शाहजहाँपुर (यूपी) में एक लड़की की चोटी पढ़ते वक्त काट ली गई। यूपी के शामली में 12 वर्षीय लड़की चाँदनी की मध्यरात्रि चोटी काट डाली गई। डुमराव (बक्सर) बिहार में ज्ञानचन्द राय की बेटी सिमरन (आठवीं वर्ग की छात्रा) की चोटी कटी पायी गईं। इसी तरह बूंदी (राजस्थान) के अरवेड गाँव में तथा ग्वालियर (मध्यप्रदेश) के चकरायपुर ग्राम में रीता खान की महिला की चोटी काट लेने के समाचार प्राप्त हुए। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिये गाँव-कस्बों में बड़े-बुजुर्गों, नौजवानों द्वारा रात-रात भर पहरा देकर घरों की महिलाओं-बच्चियों की सुरक्षा की जा रही है। पता नहीं चोटी काटने वालों का प्रवेश कब किसके घरो में हो जाए और बिना किसी आहट के वे महिलाओं की चोटियों को काट डालें ? यूँ तो, चोटी काटने की घटनाओं से सर्वाधिक प्रभावित व पीड़ीत राज्य दिल्ली रहा है, किन्तु दूसरे राज्यों में भी इस तरह की घटनाएँ तेजी से बढ़ रही हैं। चोटी कटने की घटना पर यूपी के सुलखान सिंह का एक बयान आया था। उन्होंने कहा यह पूरी तरह अफवाह है। सहुलियत के साथ सरकारी अनुदान मिलने की प्रत्याशा में महिलाएँ अपनी चोटी खुद काट कर इस तरह की घटना को अंजाम दे रही हैं। डीसीपी दिल्ली एम एन तिवारी ने ऐसी घटना के पीछे अंधविश्वास फैलाने वाली बात कही। 


स्थिति यह हो गई है कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएँ के लिये घरों से बाहर निकलना तक दूभर हो गया है। हल्दी, नीम, निम्बू, मिरचाई, मंेहदी इत्यादि चीजों को एक साथ अपने-अपने घरों के बाहर लोग टांगने पर मजबूर हो गए हैं। घर के बाहर की दीवारों पर पूरी हथेली की छाप भी उकेरी पायी जा रही है। ओझा-गुनी, झाड़-फूँक, जादूटोना, पर विश्वास करने वाले लोग मानते हैं कि ऐसा करने से दुष्ट प्रवृत्त्यिों का प्रवेश वंचित हो जाता है। अपने-अपने जूड़े में महिलाएँ नीम की पत्तियाँ तक खोंसकर रहने लगीं। सवा सौ करोड़ की आबादी वाले इस मूल्क में अब तक यह ज्ञात नहीं हो पाया है कि इस चोटी कटने अथवा काट लेने की घटनाओं के पीछे किन-किन लोगों व किस-किस शक्ति का हाथ है। इस घटना की पूरी तहकीकात के बाद भी अधिकांश स्थानों पर यह पता नहीं लगाया जा सका है कि इस तरह की घटनाएँ घट क्यों रही हैं ? मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि यह एक डिजिज है। मनोविज्ञान के पूर्व शिक्षक मो0 इब्राहिम अंसारी के अनुसार ऐसी घटनाओं के पीछे महिलाओं की संकीर्ण मानसिकता काम करती है। जो भी हो, पूरे देश में ऐसी घटनाओं पर लम्बी बहस जारी है। बावजूद निष्कर्ष पर नहीं पहुँचा जा सका है कि माजरा क्या है। 






--अमरेन्द्र सुमन--
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