विशेष आलेख : देश भक्ति के साथ कान्हा रंग में रंगा ‘हिन्दुस्तान‘

पूरा देश एक तरफ जहां ‘सारे जहां से अच्छा...‘, ‘जहां डाल-डाल पर...‘, देशभक्ति गीतों के बीच तिरंगा फहरा रहा था, ‘तू दिखा जरा मटकी तोड़कर...‘, ‘गोविन्दा आला रे...‘ जैसे गीतों पर भगवान श्रीकृष्ण को मनाने में जुटा था। यह सुनहरा मौका देशवासियों को बीस साल बाद मिला है जब देशभक्ति व कान्हा भक्ति साथ-साथ दिखी। इन सब बीच के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चैथी बार लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराते हुए पाक से लेकर चीन तक को चेता दिया कि आतंरिक सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है, समंदर हो या सीमा हो, साइबर हो या स्पेस हो हमें हर प्रकार की सुरक्षा करनी आती है। भारत इसे करने में सक्षम है, देश के खिलाफ कुछ भी होने के हौसले परस्त करने में हम सक्षम हैं। सवा सौ करोड़ देशवासियों में हर कोई बराबर है, कोई भी छोटा-बड़ा नहीं है 
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आज से सत्तर साल पहले हमने गुलामी की बेडियों को तोड़ा, खुली हवा में सांस लेने का अवसर मिला। जाहिर है अवसर अद्भूत हैं। इस अद्भूत अवसर को कोई यूं नहीं जाने देना चाहता। यही वजह है कि शहर-शहर-गांव-गांव में न सिर्फ तिरंगा फहराता दिखा, बल्कि देशभक्ति गीतों के बीच गोविंदा आला रे... की गूंज पूरे वातावरण को तिरंगे की रंग में कान्हामय कर दिया। चारों तरफ कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी एवं स्वतंत्रता दिवस की धूम है। मुंबई, दिल्ली, बनारस, लखनउ, मथुरा आदि शहरों में गोविंदाओं की टोली दही हांड़ी तोड़ती दिखी तो मंदिरों में गोविंदा आला रे..., अपनी मटकी सम्‍भाल बृजबाला, की गूंज रहे थे। गली हो या मुहल्ला, हर तरफ गोविंदा की टोली नजर आई, जिनमें दही-हांडी को फोड़ने की होड़ लगी रही। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा में भी भक्तगण रासलीला में गोते लगाते रहे। तो पीएम मोदी ने लाल किले की प्रचीर से नोटबंदी, सर्जिकल स्ट्राइकल, कश्मीर समस्या, भारत-चीन विवाद, आस्था के नाम पर हिंसा, तीन तलाक और गोरखपुर में हुई बच्चों की मौत जैसे अहम मुद्दों पर अपनी बात रखने के साथ ही ‘भारत जोड़ो’ का नारा दिया। 

मोदी ने कम शब्दों में देश की आन-बान-शान हमारी तीनों सेनाओं के पौरुख को पूरी दुनिया से अवगत कराया तो सभी सुरक्षा एजेंसियों के कर्तबों की दरियादिली बताते हुए जता दिया कि बलिदान करने में ये हमारे जांबाज कभी पीछे नहीं रहे हैं। आतंकवाद हो या घुसपैठ हो हर जगह उन्होंने बखूबी अपना काम किया। जब सर्जिकल स्ट्राइक हुई तब दुनिया ने हमारी ताकत को पहचाना। देश की आतंरिक मसलों को भी उन्होंने बड़े ही सधे अंदाज में रखा। कहा, पूरे देश मे तीन तलाक के खिलाफ एक आंदोलन चल रहा है, जो मेरी बहने इसके खिलाफ लड़ रही हैं उनका अभिनंदन है। तीन साल में सवा लाख करोड़ का कालाधन ढूंढा और उसे सरेंडर करने के लिए मजबूर किया। आस्था के नाम पर हिंसा गलत, उस समय का नारा था ‘भारत छोड़ो’ अब नया नारा है ‘भारत जोड़ो’, जातिवाद और संप्रदायवाद को खत्म करना ही होगा। नोटबंदी से भ्रष्टाचार पर नकेल कसने में मदद मिली, तकनीक के जरिए भ्रष्टाचार और कालेधन से हम आगे भी लड़ेंगे। इस दौरान मोदी ने सवा सौ करोड़ देशवासियों का आह्वान किया कि ‘बदला है, बदल रहा है, बदल सकता है,‘ हम इस विश्वास और संकल्प के साथ आगे बढ़ें। कश्मीर समस्या का हल न गाली न गोली से, बल्कि गले लगाने से होगा, जिसके लिए हम प्रयासरत हैं। आतंकवाद की लड़ाई में हम अकेले नहीं है, हमारे साथ कई देश हैं। 29 करोड़ गरीबों के बैंक खाते खुलें, 2.5 करोड़ महिलाओं को रसोई गैस कनेक्शन मिले। 


उन लोगों को भी आड़े लिया जो नफरत की राजनीति करते हैं। देश शांति, एकता और सद्भावना से चलता है। सबको साथ लेकर चलना हमारी सभ्यता एवं संस्कृति है। तब भारत छोड़ो का नारा था, आज भारत जोड़ो का नारा है। उनकी सरकार में कोई छोटा नहीं कोई बड़ा नहीं, सब बराबर है। सवा सौ करोड़ लोगों की सामूहिक शक्ति और नए संकल्प के साथ हम एक न्यू इंडिया के निर्माण की दिशा में आगे बढ रहे हैं। ये काम हम खुद करेंगे। 2022 में भव्य और दिव्य हिंदुस्तान देखेंगे। हम ऐसा भारत बनाएंगे जहां बिजली हो, पानी हो, घर हो। उस भारत में देश चिंता में नहीं चैन से सोएगा। हम ऐसा हिंदुस्तान बनाएंगे जहां युवाओं और महिलाओं को को सपने पूरा करने के लिए पूरा अवसर उपलब्ध होगा। ऐसा भारत बनाएंगे जो आतंकवाद, जातिवाद से मुक्त होगा। हम सब मिलकर ऐसा भारत बनाएंग जो स्वच्छ होगा, स्वस्थ होगा और स्वराज के सपने को पूरा करेगा। नोटबंदी के बाद डाटा माइनिंग किया गया तो पता चला कि तीन लाख ऐसी कंपनिया हैं जो काल धंधा और हवाला का कारोबार कर रही हैं। हमने पौने दो लाख कंपनियों पर ताले लगा दिए। अब देश लूटने वालों को जवाब देना पड़ेगा। हमने वो काम कर दिया। इनमें कुछ तो ऐसी भी हैं कि एक ही एड्रेस पर 400 कंपनिया चल रही हैं। सारी मिली भगत चल रही थी कोई देखने वाला नहीं था। नोटबंदी के बाद तीन लाख करोड़ रूपए आए हैं। बैंको में जमा किए राशि में पौने दो लाख करोड़ से ज्यादा शक के घेरे में है। 18 लाख से ज्यादा ऐसे लोगों को पहचान लिया गया है जिनकी आय उनकी हिसाब किताब से ज्यादा है। एक लाख ऐसे लोग हैं जिन्होंने जिंदगी में कभी इनकम टैक्स का नाम नहीं सोचा था। 

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किसान को ताकत मिले तो वो मिट्टी से सोना उगा सकता है। हमने 99 में से 21 योजनाएं शुरु कर दी है, बाकि शुरु होने वाली हैं। बीज से बाजार तक जब तक हम किसान को सुविधा नहीं देते हैं तबतक बदलाव नहीं होगा। ‘चलता है’ वाला स्वभाव हमें छोड़ना पड़ेगा। ‘बदल सकता है’ के बारे में सोचना पड़ेगा तभी हम देश का विकास कर सकते हैं। इतने कम समय में 800 करोड़ से ज्यादा की बेनामी संपत्ति सरकार ने जब्त कर ली है। हमने ‘वन रैंक वन पेंशन’ बढ़ाया जिससे सुरक्षाबलों का हौसला और बढ़ा। जीएसटी हमारी सबसे बड़ी सफलता है। गरीबों को लूटकर तिजोरी भरने वाले लोग अब चैन की नींद नहीं सोकेंगे। इससे ईमानदार लोगों का भरोसा बढ़ा है। आज ईमानदारी का उत्सव मनाया जा रहा है और बेईमानों के लिए सिर छुपाने की जगह नहीं है। ये वर्ष आजाद भारत के युवाओं के लिए विशेष है। जिन लोगों ने 21वीं शताब्दी में जन्म लिया है उनके लिए आने वाला 2018 खास है। ये उनके जीवन का निर्णायक वर्ष है। मैं सभी नौजवानों का अभिनंदन करता हूं। मैं इन सभी नौजवानों से कहना चाहूंगा कि आइए देश के निर्माण में अपनी भूमिका निभाइए। अंत में उन्होंने कहा, देश के गौरव के लिए जिन लोगों ने बलिदान दिया है, उन सभी महानुभावों को मैं लाल किले की प्राचीर से सवा सौ करोड़ देशवासियों की तरफ से शत-शत नमन करता हूं।”

प्राकृतिक आपदाएं कभी-कभी बहुत बड़ी चुनौती बन जाती है, अच्छी वर्षा देश को फलने-फूलने में बहुत योगदान देती हैं। लेकिन जलवायु परिवर्तन का नतीजा है कि कभी इन आपदाओं से संकट भी पैदा होता है। पिछले दिनों अस्पताल में मासूम बच्चों की मौत हुई, इस संकट की घड़ी में सभी देशवासी एक साथ हैं। मैं देशवासियों को विश्वास दिलाता हूं कि ऐसे संकट के समय पूर्ण संवेदनाओं के साथ हम जनसुरक्षा के साथ कुछ भी करने में कमी नहीं रहने देंगे। ये वर्ष लोकमान्य तिलक का के जज्बे का 125 वां वर्ष है। हम आजादी का 70वां वर्ष और 2022 में आजादी के 75 साल, 1942 से 1947 से देश ने सामूहिक शक्ति का प्रदर्शन किया अंग्रेजों को भारत छोड़ कर जाना पड़ा। हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता से ही 2022 में भारत का सपना न्यू इंडिया पूरा हो पाएगा। हम जानते हैं कि सामूहिकता की शक्ति क्या होती है, भगवान कृष्ण ने सामूहिक शक्ति से गोवर्धन पर्वत उठाया, जब प्रभु राम को लंका जाना था तब सामूहिकता से ही सेतु बनाकर लंका पहुंच गए, महात्मा गांधी ने सामूहिक ताकत से देश को आजाद करवाया। आज भारत सरकार ऐसी वेबसाइट लॉन्च कर रही है, जहां पर गैलेंटरी अवॉर्ड प्राप्त करने वाले लोगों की जानकारी मिलेगी। टेक्नोलॉजी की मदद से हम लोग देश में ईमानदारी को बल देंगे, काले धन-भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी। आधार के जरिए हमने इस काम को आगे बढ़ाया है। 




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(सुरेश गांधी)
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