डोकलाम में भारत के 40 सैनिक एक बुलडोज़र मौजूद : चीन

one-buiidozer-and-40-indian-soldiers-are-present-in-doklam-china
नयी दिल्ली 02 अगस्त, चीन ने डोकलाम विवाद पर आज कहा कि इस क्षेत्र में भारत के 40 सैनिक एवं एक बुलडोज़र मौजूद है जिन्हें भारत को तुरंत हटा लेना चाहिए, चीनी दूतावास ने आज यहां एक विस्तृत बयान में कहा कि इस तथ्य से कोई भी इन्कार नहीं कर सकता कि भारतीय सेना ने सीमा पार करके चीनी क्षेत्र में अवैध रूप से प्रवेश किया है और इसे लेकर भारत ने जो भी तर्क दिये हैं उनमें कोई तथ्य या वैधानिकता नहीं है, उधर भारत ने दोहराया है कि वह अपने पुराने रुख पर कायम है कि चीन ने भारत भूटान चीन ट्राइजंक्शन क्षेत्र में यथास्थिति को बदलने का प्रयास किया है और वह इस मामले को बातचीत से सुलझाना चाहता है जिसे लेकर भारत चीन के साथ कूटनीतिक संपर्क में है। भारत का कहना है कि चीन के डोकलाम क्षेत्र में सड़क निर्माण से उसके सामरिक हित गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं। भारत ने चीन को याद दिलाया है कि सीमा मसले के समाधान को लेकर समझौते में भारत चीन एवं किसी तीसरे देश की सीमा को लेकर कोई भी देश एकतरफा कदम नहीं उठायेगा। चीनी विदेश मंत्रालय द्वारा तैयार बयान में दावा किया गया है कि चीन ने डोकलाम क्षेत्र में सड़क निर्माण के पहले भारत को सद्भावना के तौर पर पहले सूचना दे दी थी। लेकिन 16 जून को 270 भारतीय सैनिक हथियारों एवं दो बुलडोजर के साथ सीमा पार करके 100 मीटर अंदर आ गये और सड़क निर्माण रोक लिया। बाद में उनकी संख्या 400 हो गयी। उन्होंने चीनी सीमा के 180 मीटर अंदर आकर तीन तंबू लगा लिये। जुलाई के अंत में वहां एक बुलडोजर के साथ 40 भारतीय सैनिक मौजूद थे। चीन के इस बयान के बाद भारतीय सेना ने चीन के इस दावे का कड़े शब्दों में खंडन किया कि उसने डोकलाम क्षेत्र में तैनात अपने सैनिकों की संख्या में भारी कमी कर दी है। सेना के सूत्रों ने साफ शब्दों में कहा है कि डोकलाम में यथास्थिति बनी हुई है। भारतीय सैनिक जिस जगह पर और जितनी संख्या में तैनात थे उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी दोहराया है कि भारतीय सेना चीन की ज़मीन पर नहीं है बल्कि भूटान की ज़मीन पर है। चीनी बयान में कहा गया है कि भारतीय सेना के अतिक्रमण पर 19 जून को भारत को कड़ा प्रतिरोध जताया गया था। विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और चीनी दूतावास ने कई बार संदेश देकर कहा है कि भारत उसकी प्रादेशिक अखंडता का सम्मान करे। चीन ने यह दावा भी किया कि 1890 की ग्रेट ब्रिटेन आैर तिब्बत के बीच संधि में सिक्किम एवं तिब्बत के बीच की सीमा स्पष्ट कर दी गयी थी जिसे भारत की स्वतंत्रता के बाद भारत एवं चीन दोनों ने स्वीकार किया था। 18 जून की घटना ना केवल इस संधि का बल्कि संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र का उल्लंघन है। बयान में कहा गया कि भारत ने अपने सैनिकाें की इस कार्रवाई के पक्ष में जो भी तर्क दिये हैं वे संयुक्त राष्ट्र महासभा के 14 दिसंबर 1974 के प्रस्ताव संख्या 3314 के अनुरूप नहीं है और इसे किसी देश केे सैन्य बलों द्वारा किसी अन्य देश की ज़मीन से आक्रमण माना जा सकता है। चीन ने कहा है कि दोनों देशों विश्व के सबसे बड़े विकासशील देश हैं। चीन सरकार भारत के साथ अपने मैत्रीपूर्ण संबंधों का सम्मान करती है और उससे अनुरोध करती है कि उसे अपनी सेना वहां से हटा लेनी चाहिये।

Share on Google Plus

About आर्यावर्त डेस्क

एक टिप्पणी भेजें
loading...