ओबीसी सूची में होगा उप वर्गीकरण, बनेगा आयोग

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नयी दिल्ली 23 अगस्त, सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग(ओबीसी) के आरक्षण के लिए क्रीमी लेयर की आय सीमा छह लाख से बढ़ाकर आठ लाख रुपए प्रति वर्ष करते हुए केंद्रीय ओबीसी सूची में जातियों के उप वर्गीकरण के वास्ते एक आयोग गठित करने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस अाशय के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। बैठक के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गेहलोत ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल जातियों का उप वर्गीकरण करने के लिए आयोग बनाने की सिफारिश संविधान के अनुच्छेद 340 के अंतर्गत राष्ट्रपति से की जाएगी। यह आयोग अपने गठन की तिथि से 12 सप्ताह के भीतर केंद्र सरकार को रिपोर्ट देगा। आयोग केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल पांच हजार से ज्यादा जातियों का उप वर्गीकरण करेगा। उन्हाेंने बताया कि बैठक में ओबीसी आरक्षण लाभ लेेने के लिए क्रीमी लेयर की सीमा छह लाख से बढ़ाकर आठ लाख रुपए करने की सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की सिफारिश स्वीकार कर ली गयी। श्री जेटली ने बताया कि इस आयोग का नाम “अन्य पिछड़ा वर्ग उप वर्गीकरण जांच आयोग’’ होगा। यह आयोग केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल जातियों को आरक्षण के लाभ के असमान वितरण की जांच करेगा और इस असमानता को दूर करने के तौर-तरीके और प्रक्रिया तय करेगा। इस अवसर पर मौजूद श्री गेहलोत ने बताया कि ओबीसी सूची में शामिल जातियों के उप वर्गीकरण की सिफारिश राष्ट्रीय ओबीसी आयोग ने 2011 में की थी। इससे पहले 1992 में उच्चतम न्यायालय भी इस संबंध व्यवस्था दे चुका है। वर्ष 2012, 2013 और 2014 में संसदीय समितियों ने भी सूची में उप वर्गीकरण करने की सिफारिश की है। उन्हाेंने बताया कि इन सिफारिशों के आधार पर आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, पुड्डुचेरी, कर्नाटक, हरियाणा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र और तमिलनाडु तथा जम्मू-कश्मीर अपनी राज्य ओबीसी सूची का उप वर्गीकरण कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि इस उप वर्गीकरण से उन जातियों को भी लाभ मिल सकेगा जो अभी तक आरक्षण के लाभ से वंचित रही है। केंद्रीय ओबीसी सूची में उप वर्गीकरण के विरोध काे खारिज करते हुए श्री गेहलोत ने कहा कि सरकार का ध्यान गरीबों के कल्याण पर है और गरीबों को अारक्षण का लाभ देने में किसी को विरोध नहीं करना चाहिए।

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