पटना में वाहन ईंधन के लिए शीघ्र शुरू होगा सीएनजी का इस्तेमाल

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पटना 07 सितंबर, बिहार सरकार वायु प्रदूषण के बढ़ते खतरे को देखते हुये राजधानी पटना में वाहन ईंधन के रूप में सीएनजी (संपीड़ित प्राकृतिक गैस) का इस्तेमाल शीघ्र शुरू करने पर विचार कर रही है। मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में आज यहां पर्यावरण एवं वन तथा सूचना प्रावैधिकी विभाग की हुई समीक्षा बैठक के बाद बताया कि पटना में वायु को प्रदूषित होने से बचाने के लिए सीएनजी के इस्तेमाल की संभावनाओं पर विचार कर इसे लागू करने का निर्णय लिया गया। श्री सिंह ने बताया कि अब गंगा नदी में सीवर ट्रिटमेंट प्लांट से पानी को नहीं छोड़ा जायेगा बल्कि उसका उपयोग वानिकी एवं अन्य कार्यों में किया जायेगा। उन्होंने बताया कि इस पर सभी संबंधित विभाग नगर विकास विभाग, जल संसाधन विभाग, कृषि विभाग, लघु सिंचाई विभाग, पर्यावरण एवं वन विभाग विचार-विमर्श करेंगे।

मुख्य सचिव ने बताया कि पथों के किनारे वृक्षारोपण की स्थिति का आंकलन स्वतंत्र एजेंसी से कराया जायेगा। उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के साथ ही उद्यान विभाग द्वारा पौधा लगाये जाने की उपलब्धि को भी हरियाली मिशन की उपलब्धि के साथ जोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग के सहयोग से बिहार के सभी विद्यालयों में वृक्ष सुरक्षा दिवस एवं बिहार पृथ्वी दिवस का विस्तार करने के साथ ही पर्यावरण एवं वन विभाग में इको-टूरिज्म तथा पार्क के लिये अलग प्रभाग स्थापित किये जायेंगे। श्री सिंह ने बताया कि गंगा नदी में पाये जाने वाले डाॅलफिन को देखने के लिये सुल्तानगंज में बनने वाले गंगा सड़क पुल में स्थल का चुनाव किये जाने का निर्णय लिया गया, जहाॅ से पर्यटकों को डाॅलफिन दिखाया जा सके। भीम बांध में गर्म पानी के स्रोत के आसपास के क्षेत्र को विकसित किया जायेगा ताकि पानी का समुचित उपयोग हो सके। यह क्षेत्र पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये भी उपयोगी साबित होगा। उन्होंने बताया कि नालंदा के सर्वेक्षण में औषधीय पौधों की कुल 21 एवं वृक्ष की 106 प्रजातियां पायी गयीं। इस क्षेत्र में और प्रजातियों के मिलने की संभावना है। सरकार सर्वे कराकर स्थिति का आकलन करवाएगी। मुख्य सचिव ने बताया कि वर्ष 2022 तक राज्य के कुल क्षेत्रफल का 17 प्रतिशत हरित आवरण प्राप्त करना है। उन्होंने बताया कि यह बताते हुये खुशी हो रही है कि हमलोग इस लक्ष्य के नजदीक पहुंच चुके हैं और आज राज्य का हरित आवरण करीब 15 प्रतिशत हो चुका है। उन्होंने कहा कि राजगीर के जंगल क्षेत्र में पाये जाने वाले स्थानीय बांस को लगाया जाना चाहिये। 

श्री सिंह ने सूचना प्रावैधिकी विभाग की बैठक में लिये गये निर्णयों के बारे में जानकारी देते हुये कहा कि सात निश्चय के तहत काॅलेजों में वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध करायी जानी थी। 306 काॅलेजों में यह सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि यूट्यूब और वाट्सएेप तक इस सुविधा का विस्तार करने के लिए विचार किये जाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि राजगीर में सौ एकड़ तथा बिहटा में 25 एकड़ जमीन विभाग को दी गई है। 14 सितम्बर को एक काॅनक्लेव का आयोजन किया गया है, जिसमें निवेशक आमंत्रित किये गये हैं। प्रधान सचिव ने बताया कि विभिन्न विभागों द्वारा बड़े पैमाने पर राशि सीधे हस्तांतरित की जा रही है। शिक्षा विभाग द्वारा लगभग डेढ़ करोड़ बच्चों को छात्रवृत्ति, पोशाक और साइकिल के लिये राशि हस्तांतरित की जा रही है। इसी तरह सामाजिक सुरक्षा पेंशन के तहत पूरे राज्य में लाभार्थियों को सीधे खाते में राशि हस्तांतरित करने की कार्रवाई की जा रही है। उन्होेने बताया कि राज्य में सूचना प्रावैधिकी के विस्तार एवं डाटा सुरक्षा को मजबूत बनाने का निर्णय लिया गया। बैठक में उप मुख्यमंत्री और पर्यावरण एवं वन तथा सूचना प्रावैधिकी मंत्री सुशील कुमार मोदी, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, विकास आयुक्त शिशिर सिन्हा, पर्यावरण एवं वन विभाग के प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव अतीश चन्द्रा एवं मनीष कुमार वर्मा, सूचना प्रावैधिकी विभाग के सचिव राहुल सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह समेत पर्यावरण एवं वन विभाग तथा सूचना प्रावैधिकी विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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