भाकपा-माले की राज्य स्थायी समिति की एक दिवसीय बैठक 9 सितंबर को पटना में.

  • माले महासचिव काॅ. दीपंकर भट्टाचार्य सहित भाग लेंगे वरिष्ठ नेता.

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पटना 8 सितंबर, भाकपा-माले की राज्य स्थायी समिति की एक दिवसीय बैठक कल दिनांक 9 सितंबर को पटना अवस्थित राज्य कार्यालय में होगी. बैठक में भाग लेेने के लिए माले महासचिव काॅ. दीपंकर भट्टाचार्य आज देश शाम पटना पहुंच गये हैं. बैठक में माले राज्य सचिव कुणाल, पोलित ब्यूरो सदस्य काॅ. धीरेन्द्र झा व अमर, वरिष्ठ नेता रामजतन शर्मा, नंदकिशोर प्रसाद, केडी यादव, राजाराम सिंह, महबूब आलम, मीना तिवारी, रामेश्वर प्रसाद, सरोज चैबे, शशि यादव सहित वरिष्ठ पार्टी नेता भाग लेंगे. बैठक में वर्तमान राजीनतिक परिस्थितियों के साथ-साथ बिहार में बाढ़ की स्थिति आदि पर बातचीत की जाएगी.


कल बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में होगा चक्का जाम, आपदा प्रबंधन मंत्री से माले प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात.

भाकपा-माले राज्य सचिव ने कहा है कि बिहार सरकार द्वारा बाढ़ पीड़ितों के प्रति संवेदनहीन रवैया अपनाया जा रहा है. इसके खिलाफ हमारी पार्टी कल 9 सितंबर को बाढ़ प्रभावित इलाके में चक्का जाम करेगी. इसके पूर्व विधायक सुदामा प्रसाद के नेतृत्व में आज भाकपा-माले का एक प्रतिनिधिमंडल आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्री दिनेश चंद्र यादव से मुलाकात करके उन्हें अपना दस सूत्री ज्ञापन सौंपा. इस प्रतिनिधिमंडल में राज्य कमिटी सदस्य उमेश सिंह और कुमार परवेज शामिल थे. भाकपा-माले ने अपने ज्ञापन में कहा है कि  पिछले एक महीने से संपूर्ण उत्तर बिहार में प्रलयंकारी बाढ़ की बर्बादी-तबाही मची हुई है. सैकड़ो लोगों की अकाल मौत हो चुकी है. हजारो पशुधन मारे गये हैं. गरीबों का सारा अनाज बर्बाद हो गया है. झोपड़िया दह-बह गयी हैं तथा अब गांव-गांव में भूखमरी है. चूल्हे नहीं जल रहे व चारा के अभाव में मवेशियों की लगातार मौत हो रही है. लगभग 19 जिले में आम जन-जीवन पूरी तरह ध्वस्त है. यदि सरकार ने बाढ़ पूर्व आवश्यक कदम उठाये होते, तो इस व्यापक तबाही से बचा जा सकता था. बाढ़पीड़ितों के लिए जो राहत अभियान चलाया जा रहा है, वह भी बेहद नगण्य है. इसमें युद्ध स्तर की गति लाने की जरूरत है. 

अत: संकट की घड़ी में हम आपसे निम्नलिखित बिन्दुओं पर अविलंब कार्रवाई की मांग करते हैं:-

1. बाढ़ और उसके बाद की तबाही-बर्बादी कोई सामान्य घटना नहीं है, इसने बिहार की 50 प्रतिशत आबादी के जीवन के बेहद संकट में डाल दिया है. इसलिए हमारी मांग है कि इस विपदा को केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय आपदा घोषित करवाने के लिए आपकी सरकार द्वारा आवश्यक कदम अविलंब उठाये जायें.


2. बाढ़ की विनाशलीला को देखते हुए तमाम बाढ़ पीड़ितों को 3 माह का राशन व 15 हजार रु. तत्काल उपलब्ध करायी जाए. गरीबों को काम नहीं मिल रहा है. हमारी मांग है कि गरीबों-मजदूरों को मनरेगा की 3 महीने की अग्रिम मजदूरी दी जाए.  मृतक के परिजनों को 10 लाख रु. मुआवजा दिया जाए. हम बटाईदार किसानों सहित सभी किसानों के लिए 15 हजार रु. प्रति एकड़ की दर से फसल मुआवजे की भी मांग करते हैं. पशुधन क्षति का भी उपयुक्त मुआवजा और चारे की मुकम्मल व्यवस्था का ठोस इंतजाम भी किया जाए.

3. राहत अभियान में सरकार ने कई तरह की शर्तें थोप रखी हैं. इसकी वजह से बाढ़ पीड़ितों तक राहत सामग्री पहुंचना लगभग असंभव हो गया है. आधार कार्ड, बैंक खाता आदि की अनिवार्यता को समाप्त किया जाना चाहिए, क्योंकि सब के पास उक्त कागजात नहीं है और जिनके पास था भी इस बाढ़ में जब उनका घर ही बर्बाद हो गया, तो वे कागज कहां से लायेंगे? उसकी जगह वोटर लिस्ट व चूल्हा को आधार बनाकर राहत अभियान चलाया जाना चाहिए. सरकार बाढ़ पीड़ितो को या तो कैश दे अथवा बियरर चेक जारी करे.

4. बाढ़ राहत के लिए सरकार द्वारा आधारभूत संरचनाओं को आधार बनाया है. इस आधार पर बाढ़ से हुए नुकसान का सही आकलन नहीं हो सकता. इसमें पशुधन सहित कई चीजों को शामिल नहीं किया जा रहा है. व्यापक पैमाने पर अनाज का नुकसान हुआ है. गरीबों की झोपड़ियां पूरी तरह बर्बाद हो गयी हैं. इसलिए नुकसान का मुआइना व्यक्ति अथवा परिवार के आधार पर किया जाना चाहिए. 

5. बाढ़ पीड़ित लाभार्थियों के चयन में भी व्यापक पैमाने पर भेदभाव की रिपोर्ट मिल रही है. बड़े लोगों के नाम जोड़ दिए जा रहे हैं. खासकर दलित व अकलियत समुदाय जिनका बाढ़ में सर्वाधिक नुकसान हुआ है, उनका नाम सूची से बाहर कर दिया गया है. पश्चिम चंपारण में बाढ़ राहत के लिए 72 घंटे पानी के टिके रहने की शर्त बनाया गया है, जबकि पानी की तेज धार में कुछेक घंटों में ही सबकुछ तहस-नहस कर दिया गया. इसी तरह अररिया में चूल्हा डूबने को शर्त बनाया गया है. हम इन शत्र्तों को खत्म करने की मांग करते हैं. हमारी मांग है कि पहले की तरह सर्वदलीय अनुश्रवण टीम का गांव में गठन किया जाए और टीम लाभार्थियों की सूची बनाए तथा राहत सामग्री पहुंचाने की गारंटी करे. पंचायत स्तर पर सर्वदलीय अनुश्रवण की जो व्यवस्था से कार्यरत थी, वह पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है, जिसकी वजह से यह समस्या खड़ी हो रही है.

6. यह देखने में आया है कि पश्चिम चंपारण से लेकर किशनगंज तक जो बिहार का बोर्डर इलाका है, वहां बेहद गरीबी है. जिन लोगों के पास पक्का मकान था, वे तो किसी प्रकार बच गये और अपने सामान को भी बचा लिया. लेकिन जिनकी झोपड़ियां थीं, उनका सबकुछ बर्बाद हो गया. न तो वे अपनी जिंदगी बचा सके न अपना अनाज. इसलिए हमारी मांग है कि सरकार एक बड़ी योजना के तहत तमाम गरीबों के लिए पक्के मकान का इंतजाम करे.

7. सरकार ने कहा था कि अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को बकरीद तक आवश्यक मात्रा में राहत सामग्री मिल जाएगी, लेकिन जमीन पर कहीं भी ऐसा नहीं हो रहा है. इस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है. हमारी मांग है कि कम से कम दशहरे तक सभी बाढ़पीड़ितों को आवश्यक राहत सामग्री, पनुर्वास आदि की व्यवस्था कर दी जाए.

8. बाढ़ की तेज धार की वजह से कई इलाकों में खेत में बालू भर गया है और जमीन कट गयी है. ऐसे खास इलाकों की शिनाख्त कर सरकार को इसका भी मुआवजा देना चाहिए.

9. इस बार का बाढ़ पहले से भिन्न स्वरूप का है. नदियों ने तटबंधों को बराज से काफी पहलेे तोड़ा, इसलिए बाढ़ का पानी नए-नए इलाकों में फैला. बाढ़ से बड़ा इलाका पूरी तरह प्रभावित हुआ. नेपाल में भारी बारिश व तबाही हुई. संभवतः यह हिमालय में आए किसी परिवर्तन की वजह से हो रहा है. सरकार को चाहिए कि नेपाल के साथ मिलकर संयुक्त अध्ययन दल गठित करके आ रहे इस बदलाव का अध्ययन करे और बाढ़ का स्थायी समाधान निकाले. यह बेहद निराशाजनक है कि सांइस और टेक्नोलाॅजी के जमाने में भी हम बाढ़ का पूर्वानुमान लगाने में असफल साबित हो रहे हैं.

10. हमारी पार्टी ने बाढ़ राहत के लिए जनता के बीच कोष संग्रह अभियान चलाया. नोटों के रूप में प्राप्त राशि से हमारी पार्टी विभिन्न जिलों में राहत कार्य चला रही है. लेकिन करीब 2 लाख की राशि सिक्के के रूप में प्राप्त हुई है, जिसे भेजना संभव नहीं है. हमारी पार्टी का खाता पंजाब नेशनल बैंक के आर.के.एवेन्यू ब्रांच, कदमकुंआ में है. लेकिन बैंक उक्त रेजगारी लेने से इंकार कर बाढ़ पीड़ितों के प्रति संवेदनहीनता प्रकट कर रहा है. यह बेहद निंदनीय है. हम आपसे इसके समाधान के लिए उक्त बैंक को निर्देशित करने की मांग करते हैं.
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