चुनावी बौंड जारी करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में : जेटली

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नयी दिल्ली 01 सितंबर, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि राजनीतिक फंडिंग को स्वच्छ बनाने की प्रक्रिया के तहत चुनौवी बौंड लाने की घोषणा की गयी थी और अब उसे जारी करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है। श्री जेटली ने यहां ‘नया भारत-राजनीति में पारदर्शिता’ विषय पर चरती लाल गोयल स्मृति व्याख्यानमाला का शुभारंभ करते हुये कहा कि पिछले 70 वर्षाें में देश में बहुत कुछ सकरात्मक हुआ है लेकिन राजनीतिक फंडिंग में स्वच्छ धन आये, ऐसी व्यवस्था नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने इस दिशा में कुछ काम किया था और चेक से राजनीतिक दलों को चंदा देने वालों को आयकर में छूट देने का प्रावधान किया गया था लेकिन चंदा देने वालों ने इसका उपयोग नहीं किया और अभी भी चेक से चंदे का भुगतान न:न के बराबर होता है। वित्त मंत्री ने कहा कि राजनीतिक फंडिंग को स्वच्छ बनाने के उद्देश्य से चालू वित्त वर्ष के बजट में चुनावी बौंड जारी करने की घोषणा की गयी थी और अभी उसको जारी करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है। चंदा देने की चाहत रखने वाले इस बौंड को बैंक से खरीद सकते हैं और राजनीतिक दलों को इस बौंड को भुनाने के लिए एक अलग खाता रखना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक फंडिंग में अब तक पारदर्शिता नहीं आयी है और इसमें स्वच्छ धन नहीं आ रहा है जिससे राजनीति खराब हो रही है बल्कि राजनेताओं की छवि भी खराब हो रही है। राजनीति का मापदंड बदल गया है। चुनाव लड़ने के लिए अब संपत्ति आदि के लिए हलफनामा देना पड़ता है। श्री जेटली ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में लाेगों का कोई भी मामला व्यक्तिगत नहीं रहता है। राजनेता हो या नौकरशाह सभी को जबावदेह बनाने के लिए कानून बनाये गये थे लेकिन अब वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप उन पर विचार करने की जरूरत है। भाजपा नेता ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून 1988 का उल्लेख करते हुये कहा कि यह कानून उदारीकरण से पहले बना था और उस समय देश में खुलापन नहीं था। उस समय की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर कानून बनाया गया था लेकिन अब वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप में उसमें बदलाव की जरूरत है। अविश्वास के माहौल में शासन चलते नहीं हैं सिर्फ टालने की स्थिति होती है। उन्होंने कहा कि यदि कोई नौकरशाह वर्तमान परिस्थिति में निर्णय लेता है और उससे उसको कोई मौद्रिक लाभ नहीं होता है तो भी पांच वर्ष बाद यदि उस निर्णय से किसी तरह का नुकसान होता है तो उसके लिए सेवानिवृत्त हो चुके संबंधित नौकरशाह की पेंशन रोकी जाती है जो उचित नहीं है। इस तरह की व्यवस्था में बदलाव करना होगा। इस मौके पर बिहार एवं पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी, केन्द्रीय खेल मंत्री विजय गोयल, वरिष्ठ भाजपा नेता विजय कुमार मलहोत्रा और भाजपा उपाध्यक्ष श्याम जाजू भी मौजूद थे।

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