स्वामी विवेकानंद ने देश की अाधुनिक राष्ट्रीय चेतना को नई दिशा दी: कोविंद


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नई दिल्ली 28 अक्टूबर, राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने स्वामी विवेकानंद को देश का सच्चा सांस्कृतिक दूत करार देते हुए कहा है कि वह एेसे कुछ लोगोंं में थे जिन्होंने देश की राष्ट्रीय चेतना को नई दिशा दी । श्री कोविंद ने स्वामी विवेकानंद की शिष्या सिस्टर निवेदिता की 150 जयंती के मौके आज कहा कि स्वामी जी एेसे लोगोंं में थे जिन्होंने देश की राष्ट्रीय चेतना को नई दिशा दी थी। उन्होंने भारतीय प्राचीन मूल्यों को फिर से सामने लाकर कर पूरे विश्व में इनका प्रचार किया। वह देश के सच्चे सांस्कृतिक दूत थे और यह 1893 के शिकागाे विश्व धर्म सम्मेलन में उनके संबोधन से साबित होता है। उन्हाेंने कहा“ स्वामी विवेकानंद एक संन्यासी और एक आध्यात्मिक नेता से कहीं अधिक थे और एक संस्था निर्माता तथा राष्ट्र निर्माता थे जिन्होंने आध्यात्मिकता और विद्वता,आदर्शावादिता तथा व्यावहारिक साेच को अापस में मिलाकर एक नई विचारधारा को जन्म दिया। उनकी विरासत रामकृष्ण मिशन में झलकती है जो 120 वर्ष पुराना है और समय के साथ मजबूत होता गया है। इस मिशन ने संस्थागत दृढ़ता की स्थापना की तथा प्रबोधन और अस्मिता की संस्कृति का सूत्रपात किया। इसकी वजह से इस मिशन ने बहुत कठिन हालातों तथा स्थानोंं में सामाजिक एवं जन कल्याण कार्याें को पूरा किया।”  कोविंद ने कहा कि भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिकता ने सदियों से विश्व के कोने कोने से लोगों को अपनी तरफ आकर्षित किया है और सिस्टर निवेदिता इसी परंपरा का एक हिस्सा थी। राष्ट्रपति ने कहा“ तक्षशिला एक मशहूर विश्वविद्यालय था जहां कोटिल्य और अन्य पारंगत विद्वानों ने शिक्षण कार्य किया है और उस समय बेबीलोन तथा ग्रीक से छात्र शिक्षा हासिल करने वहां आया करते थे। राष्ट्रपति ने कहा कि सिस्टर निवेदिता इसी परंपरा का एक हिस्सा थी जो ज्ञान हासिल करने भारत आई थी लेकिन वह अन्य लोगों से अलग थी क्योंकि वह यहां सीखने और लौट जाने के लिए नहीं आई थी। उन्होंने यहां बहुत कुछ हासिल किया लेकिन वह भारत में ही रही आैर उन्होंने भारत को अपने जीवन का एक मिशन बना लिया। वह आयरलैंड में जन्मी थी लेकिन उन्होंने भारत को अपना वतन माना अौर भारत राष्ट्र निर्माता बनी। उन्होंने भारत के लिए जीवन समर्पित कर दिया और अंतिम सांस तक इसी धरती पर रही। श्री कोविंद ने कहा कि रामकृष्ण मिशन के शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए प्रयासों का असर,स्कूलों और अस्पतालों को पूरे भारत में देखा जा सकता है। रामकृष्ण मिशन को अरूणाचल प्रदेश से लेकर माओवादी प्रभावित छत्तीसगढ़ तक देखा जा सकता है जहां इसने गरीबों तथा वंचितो के लिए अनेक सराहनीय काम किए हैं।

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