मोदी को हासिल करनी होगी 35 प्रतिशत की विकास दर : मनमोहन

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सूरत, 02 दिसंबर, वरिष्ठ कांग्रेस नेता तथा पूर्व प्रधानमंत्री डा़. मनमोहन सिंह ने आज कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भविष्य के विकास के दावों को काफी बढ़ा चढ़ा कर पेश कर रहे हैं और 2022 तक यानी अगले पांच साल में भारत को विकसित देशों की जमात में खड़ा करने के लिए उन्हें 35 प्रतिशत की सालाना विकास दर हासिल करनी हाेगी जैसा अब तक कोई नहीं कर पाया है। डा़ सिंह ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि श्री मोदी अक्सर कहते हैं कि 70 साल में कुछ नहीं किया गया है। आजादी के समय देश में लोगों की औसत आयु 31 साल होती थी जो अब 71 हो गयी। साक्षरता की दर 18 से बढ कर 76 प्रतिशत हाे गयी। देश ने जो विकास किया है उसका सर्वाधिक श्रेय जनता काे जाता है और उसमें कांग्रेस सरकारों के साथ ही साथ भाजपा और अन्य सरकारों का भी योगदान है। अब भी बहुत कुछ करने की जरूरत है पर श्री मोदी को भीड़ को प्रभावित करने के लिए देश को बदनाम करने की जगह अन्य सम्मानित तरीके का इस्तेमाल करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व वाली यूपीए 1 और 2 सरकार के दौरान देश का जीडीपी विकास दर औसत 7.8 प्रतिशत रहा था। जबकि श्री मोदी की सरकार ने पिछले तीन साल में 7.3 प्रतिशत की औसत दर हासिल की है। श्री मोदी जहां भूतकाल को बदनाम करते हैं वहीं भविष्य के विकास के बारे में अतिरेकपूर्ण बयान दे रहे हैं। वह 2022 तक भारत को विकसित देश बनाने की बात कह रहे हैं और अगर ऐसा होगा तो मै सबसे खुश व्यक्ति हूंगा। पर ऐसा होने के लिए भारत को हर साल 35 प्रतिशत की दर से विकास करना होगा क्योंकि अभी भारत की प्रति व्यक्ति आय मात्र 5000 अमेरिकी डालर है जबकि विकसित देशों की पायदान पर सबसे नीचे आंके जाने वाले ग्रीस में यह 25 हजार डालर है। क्या मोदी जी ऐसा कर पायेंगे। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को यूपीए सरकार जैसी विकास दर तक पहुंचने के लिए भी कड़ी मशक्कत करनी होगी और फिर भी उन्हें नहीं लगता कि ऐसा हो पायेगा। उन्होंने मोदी सरकार में कृषि विकास दर के भी उनके सरकार की तुलना में घट कर आधा हो जाने पर भी प्रहार किया। उन्होंने इस साल की दूसरी तिमाही में विकास दर के बढने का स्वागत किया पर कहा कि इससे यह नहीं कहा जा सकता है कि अर्थव्यवस्था में अपेक्षित सुधार होने लगा है। विकास दर के आंकलन में असंगठित क्षेत्र को शामिल नहीं किया गया है जिस पर नोटबंदी और जीएसटी का सबसे अधिक असर हुआ है। उन्हाेंने बैकों के पुनर्पूजीकरण के सरकार के निर्णय का स्वागत किया पर कहा कि नोटबंदी और जीएसटी के अनुभव से सीख लेकर इसके लिए व्यापक चर्चा होनी चाहिए।
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