बायोपिक के नाम पर राष्ट्रवाद बेचा जा रहा है: अनुराग कश्यप

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नयी दिल्ली 10 जनवरी, पद्मावती को लेकर देशभर में चल रहा हंगामा अभी थमा भी नहीं था कि जाने माने निर्देशक अनुराग कश्यप ने यह कहकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है कि बॉलीवुड में बायोपिक के नाम पर राष्ट्रवाद बेचा जा रहा है। अनुराग ने अपनी फिल्म मुक्काबाज़ के लिये बुधवार को यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में भारतीय मुक्केबाजी संघ के अध्यक्ष अजय सिंह की मौजूदगी में यह विवादास्पद बयान दिया। अनुराग ने खिलाड़ियों के जीवन पर बॉलीवुड में बन रही बायोपिक पर ही सवाल उठाते हुये कहा“ बायोपिक आज का नया फार्मूला है जिसमें गाने होते हैं, मसाला होता है अौर फिल्म का अंत देशभक्ति के साथ होता है।” जाने माने निर्देशक ने कहा“ बायोपिक में हम देशभक्ति को बेचते हैं, जबरदस्ती बेचते हैं और उसे दर्शकों के मुंह में ठूंसते हैं। देश में खिलाड़ियों के सही हालात पर फिल्में नहीं बनती हैं लेकिन उनकी फिल्म पूरी तरह खेल को समर्पित फिल्म है। आप आज खिलाड़ियों को देखिये तो आपको कई अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता चाय बेचते मिलेंगे। खेलों में व्यवस्था को शुरूआत से ही सुधारने की जरूरत है।” उन्होंने कहा“ रियो ओलंपिक को देखिये, दो खिलाड़ियों ने पदक जीते और उनके जीवन पर फिल्म बनाने की घोषणा कर दी गयी। पीवी सिंधू के जीवन के संघर्ष को किसी ने नहीं देखा है, उन्होंने खुद को तैयार किया है। मैंने अपनी इस फिल्म में उन्होंने एक मुक्केबाज़ के बनने के संघर्ष को ईमानदारी के साथ सामने लाने की कोशिश की है। यह फिल्म कोई विज्ञापन नहीं है बल्कि एक तरह से सच्चाई का आइना है।” संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती को लेकर देशभर में उठे विवाद के बारे में पूछे जाने पर अनुराग ने उल्टे मीडिया पर ही आरोप लगाते हुये कहा कि वह सुर्खियां बनाने के लिये विवादों को हवा देता है। उन्होंने कहा“ जब तक फिल्म किसी ने देखी ही नहीं तो कैसे मान लिया जाए कि यह जातीय आधार पर बनी है। मैं खुद राजपूत हूं और राजस्थान के इतिहास को जानता हूं कि क्या सही है और क्या गलत। पब्लिसिटी पाने के लिये कितनी करणी सेना खड़ी हो जाती है।” अनुराग ने कहा“ हम खुद को साबित करना चाहते हैं कि हमसे बड़ा देशभक्त कोई नहीं है, यदि आप राष्ट्रवाद का तमगा नहीं पहनते हो तो यह माना जाता है कि आप देशद्रोही हैं। देशभक्ति एक मार्केटिंग फार्मूला बन चुका है और हम सभी लोग इसे बेच रहे हैं। यह सीधे एक भेड़चाल है।” मुक्काबाज़ के लिये निर्देशक ने कहा“ मैं मुक्केबाजी को नहीं जानता था लेकिन जब मैंने इसमें घुसना चालू किया तब पता लगा कि क्या क्या होता है। एक उदाहरण देना चाहता हूं कि एक रिकार्डिंग के लिये हम स्टेडियम गये तो वहां पता चला कि जिस स्टेडियम में टूर्नामेंट होना था वहां किसी मंत्री के यहां की शादी चल रही थी और टूर्नामेंट बाहर टैंट में आयोजित किया जा रहा है। यह तो भारत में खेलों की स्थिति है और इसमें सुधार की सख्त जरूरत है।”

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